मेरठ मर्डर ने बढ़ाया यूपी का सियासी पारा, क्या ललिता को मिलेगा न्याय या चुनावी हथियार बनेगा ये मुद्दा?

Lalita Gautam murder case: मेरठ की दलित छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड ने पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है. चंद्रशेखर आजाद से लेकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी तक, सभी दल इस मुद्दे पर अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं. वहीं बीजेपी विपक्ष पर दलित वोट बैंक की राजनीति का आरोप लगा रही है. ऐसे में नजर सिर्फ जांच पर नहीं, बल्कि इस बात पर भी है कि आने वाले दिनों में यह मामला प्रदेश की चुनावी राजनीति को कितना प्रभावित करता है. पढ़ें लखनऊ से मानस श्रीवास्तव की रिपोर्ट

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Lalita Gautam murder case: मेरठ की दलित छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड अब सिर्फ एक क्राइम केस नहीं रह गया है, ये उत्तर प्रदेश की सियासत का सबसे बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है. एक तरफ पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद को पुलिस ने रोक दिया, दूसरी तरफ कांग्रेस नेताओं को हाउस अरेस्ट किया गया, बसपा सुप्रीमो मायावती ने बिना नाम लिए चंद्रशेखर पर निशाना साधा, समाजवादी पार्टी ने सरकार को दलित विरोधी बताया, जबकि बीजेपी का आरोप है कि विपक्ष दलित वोट बैंक की राजनीति कर रहा है. सवाल ये है कि क्या ललिता गौतम को न्याय मिलेगा, या फिर ये मामला 2027 की चुनावी सियासत का सबसे बड़ा हथियार बन जाएगा.

चंद्रशेखर आजाद को रोका, कांग्रेस नेता हाउस अरेस्ट

मेरठ की सियासत उस वक्त और गरमा गई जब नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद पीड़ित परिवार से मिलने निकले, लेकिन पुलिस ने उन्हें दौराला टोल प्लाजा पर ही रोक दिया, इसके बाद समर्थकों ने जमकर हंगामा किया और धरने पर बैठ गए, चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि सरकार दलितों की आवाज दबा रही है और न्याय मांगने वालों को रोका जा रहा है, इससे पहले कलेक्ट्रेट में हुए प्रदर्शन, लाठीचार्ज और पूर्व एसएसपी अविनाश पांडे के थप्पड़ विवाद ने भी सरकार को विपक्ष के निशाने पर ला दिया, वहीं प्रशासन का दावा है कि प्रदर्शन के दौरान बाहरी तत्व माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे.

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दूसरी तरफ, कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर योगी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे कांग्रेस के 32 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से पहले पार्टी नेत्री पूनम पंडित को पुलिस ने हाउस अरेस्ट कर लिया. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय का आरोप है कि सरकार विपक्ष की आवाज दबा रही है और पीड़ित परिवार तक किसी को नहीं पहुंचने दिया जा रहा. कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उत्तर प्रदेश की सरकार को घूरते हुए सोशल मीडिया पर दलित उत्पीड़न का मुद्दा उठाया

मायावती और अखिलेश का सरकार पर तीखा हमला

इस पूरे घटनाक्रम के बीच बसपा सुप्रीमो मायावती ने बिना नाम लिए चंद्रशेखर आजाद पर हमला बोला, उन्होंने कहा कि कुछ लोग दलितों के हितैषी बनने का दिखावा कर रहे हैं लेकिन असल मकसद अपनी राजनीति चमकाना है, मायावती ने दलित समाज से कानून हाथ में न लेने और शांति बनाए रखने की अपील भी की.

वहीं, समाजवादी पार्टी ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सरकार पर सीधा हमला बोला. समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सरकार को ‘दलित विरोधी’ बताते हुए कहा कि भाजपा राज में पुलिस अन्याय का रिकॉर्ड तोड़ रही है और न्याय मांग रहे लोगों पर लाठीचार्ज बेहद निंदनीय है.

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BJP का पलटवार, विपक्ष कर रहा है वोट बैंक की राजनीति

चौतरफा हमलों के बीच BJP ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. BJP का कहना है कि प्रशासन मामले की निष्पक्ष जांच कर रहा है और मुख्य आरोपी पहले ही जेल जा चुका है. पार्टी ने आरोप लगाया कि विपक्ष केवल 2027 के चुनाव को देखते हुए दलित समाज की भावनाओं को भड़काकर राजनीतिक फायदा उठाना चाहता है. BJP का दावा है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी और किसी निर्दोष को परेशान नहीं किया जाएगा.

यूपी में क्यों अहम है दलित वोट बैंक?

उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में दलित मतदाता बेहद निर्णायक भूमिका में रहेंगे. आंकड़ों के लिहाज से देखें तो,

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  • यूपी की कुल आबादी में अनुसूचित जाति (SC) की हिस्सेदारी लगभग 21 प्रतिशत है.
  • प्रदेश में अनुमानित दलित मतदाताओं की संख्या करीब 3.8 से 4 करोड़ है.
  • यूपी विधानसभा की 84 सीटें और लोकसभा की 17 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं.
  • जाटव समाज सबसे बड़ा दलित समुदाय है, लेकिन पासी, वाल्मीकि, कोरी, धोबी और खटीक जैसी उपजातियां भी हर सीट पर चुनावी समीकरण तय करती हैं.

ललिता गौतम हत्याकांड अब कानून और व्यवस्था से आगे बढ़कर उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी राजनीतिक लड़ाई बन चुका है, दलित वोट बैंक को लेकर सभी दल अपनी-अपनी रणनीति में जुटे हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है, क्या इस सियासी शोर के बीच पीड़ित परिवार को जल्द न्याय मिलेगा, या फिर यह मामला 2027 के चुनाव तक राजनीति का बड़ा मुद्दा बना रहेगा.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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