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‘डार्लिंग तुम्हारे लिए पेपर आउट करा दिया’: जांच कमेटी ने प्रोफेसर को पाया दोषी, हुआ सस्पेंड

प्रोफेसर को आरोप-पत्र जारी कर 15 दिनों के अंदर जवाब देने को कहा गया है. यदि इस अवधि में संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उनकी सेवा समाप्ति की भी कार्यवाही की जा सकती है. पढ़िये मनोज पाण्डेय की रिपोर्ट.

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लखनऊ विश्वविद्यालय में एक गंभीर कांड सामने आया है, जिसमें जूलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह पर बीएससी की छात्रा को पेपर लीक का लालच देकर यौन शोषण का प्रयास करने का आरोप लगा है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने उच्चस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर प्रोफेसर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है.

विश्वविद्यालय की अनुशासन जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में डॉ. परमजीत सिंह को छात्रा के साथ अनैतिक व्यवहार, गोपनीय परीक्षा जानकारी लीक करने की बात स्वीकार करने, विशाखा गाइडलाइंस और यूजीसी नियमों का उल्लंघन और विश्वविद्यालय की छवि को ठेस पहुंचाने का दोषी पाया है. कार्यपरिषद की बैठक के बाद लिया गया यह फैसला तत्काल प्रभावी है.

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प्रोफेसर को आरोप-पत्र जारी कर 15 दिनों के अंदर जवाब देने को कहा गया है. यदि इस अवधि में संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उनकी सेवा समाप्ति की भी कार्यवाही की जा सकती है.

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वायरल ऑडियो ने खोला मामला


पूरा मामला बीते शुक्रवार का है, जब प्रोफेसर और छात्रा के बीच हुई कथित बातचीत का ऑडियो वायरल हो गया. ऑडियो में प्रोफेसर छात्रा से कहते सुनाई देते हैं, ‘डार्लिंग तुम्हारे लिए पेपर आउट करा दिया है, आकर मिलो.’ ऑडियो वायरल होने के बाद छात्रों में आक्रोश फैल गया और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन किया.

प्रदर्शन को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने पुलिस को सूचित किया. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर प्रोफेसर को हिरासत में लिया और बाद में जेल भेज दिया. परीक्षा नियंत्रक की शिकायत पर हसनगंज थाने में पेपर लीक का मामला दर्ज किया गया है.

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जांच समिति ने पाया दोषी


इस मामले में विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) ने छात्रा के आरोपों की जांच की और अपनी रिपोर्ट सौंप दी. इसके बाद उच्चस्तरीय अनुशासन समिति का गठन किया गया, जिसने प्रोफेसर के विरुद्ध गंभीर आरोपों को प्रथम दृष्टया सही पाया. समिति ने पाया कि प्रोफेसर ने परीक्षा की गोपनीयता भंग की, छात्रा के साथ अमर्यादित व्यवहार किया और शिक्षक आचरण नियमावली का उल्लंघन किया.

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विश्वविद्यालय के प्रवक्ता ने कहा कि ऐसे गंभीर आरोपों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है. उन्होंने छात्राओं की सुरक्षा और विश्वविद्यालय की अकादमिक गरिमा बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है. डॉ. परमजीत सिंह लखनऊ विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे.

First published on: May 19, 2026 11:51 PM

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