घर बनाना लोगों के जीवन का सबसे बड़ा सपना होता है। लोग इस सपने में अपनी पूरे जीवन की कमाई लगा देते हैं। ताकि केवल घर नहीं बल्कि एक सपनों को बना सकें। जीवनभर मेहनत के बाद लोग पूंजी तो जमा कर लेते हैं। लेकिन सरकारी नियमों से मात खाते हुए कई बार सपना चूर चूर हो जाता है। लेकिन यूपी में अब ऐसा नहीं है। उत्तर प्रदेश भवन उपविधियां (bylaws) 2025 की प्रमुख विशेषताएं शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश भवन उपविधियां 2025 की प्रमुख विशेषताएं है। इन उपविधियों की मुख्य विशेषताओं में विनियमन में शिथिलता, विश्वास-आधारित ऑनलाइन नक्शा स्वीकृति प्रणाली, नक्शा अनुमतियों से छूट, अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के लिए मानी गई स्वीकृति प्रणाली, ग्राउंड कवरेज प्रतिबंधों की समाप्ति, फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) में वृद्धि और ऊंचाई मानकों में ढील के माध्यम से ऊर्ध्व विकास को प्रोत्साहन, तथा सेटबैक आवश्यकताओं, भूखंड आकार, सड़क चौड़ाई, पार्किंग मानदंडों और ज़ोर्निंग नियमों में शिथिलता शामिल है। इसके अतिरिक्त, मसौदा प्रावधानों में चिकित्सा सुविधाओं, औद्योगिक इकाइयों आदि के लिए मानकों में भी छूट प्रदान की गई है, और पूर्णता प्रमाणपत्र जारी होने की तिथि से 10वें वर्ष में भवनों का संरचनात्मक ऑडिट अनिवार्य किया गया है।
इसके अलावा जोनिंग नियमों को भी सरल बनाया गया है। प्रस्तावित उपविधियों और मॉडल जोनिंग रेगुलेशन्स की मुख्य विशेषताएं निम्नानुसार हैं।
डी-रेगुलेशन-
अनुज्ञा की आवश्यकता नहीं है, केवल पंजीकरण कराना होगा। 100 वर्ग मीटर तक के भूखंडों के लिए-आवासीय भवन।
30 वर्ग मीटर तक के भूखंडों के लिए-वाणिज्यिक भवन। विश्वास आधारित (Trust based) ऑनलाइन अनुमोदन। लाइसेंस प्राप्त तकनीकी व्यक्ति द्वारा स्वतः तैयार किए गए मानचित्रों पर तत्काल ऑनलाइन अनुमोदन। 500 वर्ग मीटर तक आवासीय भवन, 200 वर्ग मीटर तक-वाणिज्यिक भवन आदि। महायोजना में आवासीय भूमि उपयोग हेतु चिन्हित क्षेत्रों में, 300 वर्ग मीटर तक के भूखण्डों पर निर्मित व्यक्तिगत आवासीय भवनों के लिए, लाइसेंस प्राप्त तकनीकी व्यक्ति द्वारा तैयार किए गए नक्शे (जो या तो किसी सरकारी विभाग द्वारा निर्मित 9 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़कों पर स्थित हों, या प्राधिकरण द्वारा चिन्हित क्षेत्रों में हो) आवश्यक प्रमाणपत्रों, दस्तावेज़ों और समस्त देय शुल्क का पूर्ण भुगतान करने पर, स्वचालित रुप से अनुमोदित होंगे।
इसके अलावा नए नियमों में मानचित्र अनुज्ञा से छूट आर्किटेक्ट, चार्टर्ड अकाउंटेंट, चिकित्सक, अधिवक्ता जैसे सेवा प्रोफेशनल्स द्वारा अपने कार्यालय के उपयोग के लिए तथा नर्सरी, कैच, होमस्टे संचालन हेतु अपने घर का 25 प्रतिशत तक एफ.ए. आर. का उपयोग किया जा सकता है, बशर्ते कि पर्याप्त पार्किंग आवश्यकताओं का प्राविधान किया गया हो, इसके लिए पृथक से मानचित्र अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होगी।
कठिनाई निवारण समिति
गृह और शहरी नियोजन विभाग के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक शिकायत निवारण समिति का गठन किया गया है, जो उपविधियों या मॉडल जोनिंग विनियमों में किसी भी अस्पष्टता, चूक, विरोधाभास या किसी शर्त के अभाव की स्थिति में स्पष्टता प्रदान करेगी।
डीम्ड अनुमोदन प्रणाली
इसके अतिरिक्त, अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए मानी गई स्वीकृति प्रणाली के तहत, संबंधित विभागों से आवश्यक और उन्हें जारी करने के निर्धारित समयसीमा स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट की गई हैं।
भू-आच्छादन व्यवस्था का विलोपन में आवश्यक सेटबैक सुनिश्चित करने के बाद, शेष भूखंड क्षेत्र आवश्यक सेटबैबैंक सुनिश्चित करने के बाद, शेष भूखंड क्षेत्र के लिए अधिकतम अनुमत ग्राउंड कवरेज अब दिया जा सकता है। परिणामस्वरुप, मौजूदा प्रावधानों की तुलना में 20 से 40% अधिक भू-आच्छादन संभव हो सकेगा। (विरासत या प्रतिबंधित क्षेत्रों को छोड़कर)।
फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) में अधिकांश श्रेणियों हेतु चौड़ी सड़कों पर फ्लोर एरिया रेशियो बढ़ा दिया गया है और अब इसे खरीदी योग्य तथा प्रीमियम खरीदी योग्य आधार पर अनुमति दी गई है। 45 मीटर से अधिक चौड़ी सड़कों पर एफएआर की कोई अधिकतम सीमा नहीं है, जिससे ऊर्ध्व विकास को प्रोत्साहन मिलता है। इसके अतिरिक, ग्रीन रेटेड भवनों को अतिरिक्त एफएआर निःशुल्क प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया है।
भवन की ऊंचाई से प्रतिबंध हटा दिए गए हैं, अब भवन की ऊंचाई प्रयुक्त एफएआर के आधार पर निर्धारित की जाएगी, सिवाय उन मामलों के जहां यह रिहायशी प्लॉटेड विकास हो, या वैधानिक अथवा प्रशासनिक प्रतिबंध लागू हाँ, जैसे हवाई अड्डों, एएसआई स्मारकों के पास, या जहां ऊंचाई की सीमाएं विशेष रूप से निर्दिश है।ॉ
15 मीटर तक ऊंचाई वाले भवनों के लिए, सेटबैक विभिन्त्र भवन उपयोगों के अनुसार भित्र होता है, और समूह आवास (ग्रुप हाउसिंग) के लिए इसे चारों ओर 5 मीटर तक तर्कसंगत बनाया गया है। समग्र भूमि उपयोग में सुधार के उद्देश्य से, 15 मीटर से अधिक ऊँचाई वाले भवनों के लिए अधिकतम सेटबैक आवश्यकता को सभी ओर से 16 मीटर से घटाकर, अग्रभाग पर 15 मीटर तथा अन्य सभी ओर 12 मीटर कर दिया गया है।
समस्त प्रकार के भवनों हेतु न्यूनतम भूखंड आकार की आवश्यकताओं को तर्कसंगत बनाते हुए घट्दया गया है। अस्पतालों और शॉपिंग मॉल्स के लिए न्यूनतम भूखंड आकार 3,000 वर्ग मीटर निर्धारित किया गया है।
शैक्षणिक भवनों को संस्थागत आवश्यकताओं के अनुरुप होना चाहिए, साथ ही खेल मैदानों, खुले क्षेत्रों आदि के लिए पर्याप्त स्थान सुनिश्चित करना होगा। मूल्यवान शहरी भूमि के सर्वोत्तम उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए, समूह आवास (ग्रुप हाउसिंग) के लिए न्यूनतम भूखंड आकार को निर्मित क्षेत्रों के लिए 2,000 वर्ग मीटर से घटाकर 1,000 वर्ग मीटर, और अनिर्मित क्षेत्रों के लिए 1,500 वर्ग मीटर कर दिया गया है। बहु-इकाई आवास (मल्टी-यूनिट हाउसिंग) के लिए न्यूनतम आवश्यक भूखंड आकार को घटाकर 150 वर्ग मीटर किया गया है।
सड़क की चौड़ाई
अधिकांश श्रेणियों में पहुंच मार्ग की न्यूनतम चौड़ाई की आवश्यकता को कम किया गया है, जैसे कृषि भू-उपयोग में 7-मीटर चौड़ी सड़कों पर उद्योग एवं हेरिटेज होटल, 9-मीटर सड़कों पर बिना शैय्या वाले चिकित्सा प्रतिष्ठान तथा प्राथमिक विद्यालय एवं 18-मीटर सड़कों पर शॉपिंग मॉल की अनुमति प्रस्तावित की गई है।
पार्किंग अपेक्षाएं
बेहतर पार्किंग उपलब्धता को प्रोत्साहित करने के लिए अब पोडियम पार्किंग और मशीनीकृत ट्रिपल-स्टेक पार्किंग की अनुमति दी गई है। 4,000 वर्ग मीटर से बड़े भूखंडों हेतु एक अलग पार्किंग ब्लॉक की अनुमति प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त, चिकित्सालयों के लिए समर्पित एम्बुलेंस पार्किंग की नई व्यवस्था की गई है, साथ ही स्कूलों के लिए बस पार्किंग और अलग पिक-एंड-ड्रॉप ज़ोन अब अनिवार्य कर दिया गया है।
चिकित्सालय
अब 9 मीटर चौड़ी सड़कों पर बिना बिस्तरों वाली चिकित्सा संस्थाओं (नॉन-बेडेड मेडिकल एस्टैब्लिशमेंट्स) की अनुमति दी गई है, साथ ही छोटे भूखंडों पर अस्पतालों की स्थापना की भी अनुमति दी गई है। इसका उद्देश्य मूल्यवान शहरी भूमि के सर्वोत्तम उपयोग को प्रोत्साहित करना है।
मिश्रित उपयोग की अनुमन्यता
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में 24 मी. या इससे अधिक चौड़ी सड़कों और (बी) वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 10 लाख से कम आबादी वाले शहरों में 18 मी. या इससे अधिक चौड़ी सड़कों पर होगी।
अफोर्डेबल आवास के निर्माण से अफोर्डेबल हाउसिंग निर्माण से संबंधित दिशा-निर्देशों को शामिल किया गया है, जिनमें निम्नलिखित कारपेट एरिया श्रेणियां निर्धारित की गई हैं- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) हेतु 30 से 35 वर्ग मीटर, निम्न आय वर्ग (एलआईजी) हेतु 35 से 45 वर्ग मीटर, तथा अन्य आय वर्गों के लिए: 45 से 90 वर्ग मीटर।
जोनिंग रेगुलेशन्स का सरलीकरण
विभित्र विकास प्राधिकरणों में लागू महायोजनाओं के अन्तर्गत भू-उपयोगो का वर्गीकरण एक समान नहीं है साथ ही विभित्र क्रियाओं की अनुमन्यता में भी प्राधिकरणों में एकरुपता नहीं है। इसके अतिरिक्त विभित्र प्राधिकरणों में अलग-अलग क्रियायें अलग-अलग भू-उपयोगो में जटिल रूप में अनुमन्य हैं। यह भी अनुभव किया गया है कि एक प्राधिकरण में किसी भू-उपयोग में जो क्रिया अनुमन्य है वह दूसरे प्राधिकरण में निषिद्ध है। इन कारणों से विरोधाभाष एवं विसंगतियां उत्पन्न होती है।
इनके निराकरण के लिए प्रदेश स्तर पर भू-उपयोगों का मानकीकरण कराते हुए विभित्र महायोजनाओं में प्रचलित भू-उपयोगो को वर्गीकृत कराया गया एवं समस्त प्राधिकरणों के लिए क्रियाओं की अनुमन्यता में एकरुपता निर्धारित की गई है।
विभित्र महायोजनाओं के भू-उपयोगों के अन्तर्गत जोन्स में वर्तमान आवश्यकताओं तथा क्रियाओं की कॉम्पैटिबिलिटी के आलोक में अधिक क्रियाओं की अनुमति दी गई है। प्रणाली को सरल, सुसंगत, उपयोगकर्ता के अनुकूल तथा विरोधाभासों और विसंगतियों से मुक्त बनाने के उद्देश्य से, भवन उपविधियों और ज़ोर्निंग विनियमों को अब एक एकीकृत दस्तावेज़ के रूप में समाहित किया गया है, जिसे उत्तर प्रदेश शहरी नियोजन एवं विकास अधिनियम की धारा-57 एवं धारा-13 के अंतर्गत जारी किया जाएगा।










