राजस्थान में बनेगा 523 किलोमीटर का नया हाईवे नेटवर्क! दो नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को मिली मंजूरी, अब सिर्फ 2 घंटे में पूरा होगा 5-6 घंटे का थकाऊ सफर
Rajasthan Greenfield Expressway: राजस्थान में जल्द 523 किलोमीटर लंबा नया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे नेटवर्क तैयार होने जा रहा है. राज्य में दो एक्सप्रेसवे बनेंगे, जो दिल्ली-जयपुर-अजमेर सहित कई प्रमुख शहरों का सफर तेज करने में मदद करेंगे. सरकार का दावा है कि इससे ट्रैफिक, व्यापार, निवेश और रियल एस्टेट सेक्टर को बड़ा फायदा मिलेगा, जिसकी लंबे वक्त से जरूरत भी थी. आइए जानते हैं इन प्रोजेक्ट्स के बारे में.
Written By: Azhar Naim|Updated: May 26, 2026 14:49
Edited By : Azhar Naim|Updated: May 26, 2026 14:49
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राजस्थान में बनेगा 523 किलोमीटर का नया हाईवे नेटवर्क (Image: AI)
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राजस्थान में आने वाले समय में सफर पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज होने वाला है. रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार ने दो बड़े ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने की तैयारी तेज कर दी है, जिनसे करीब 523 किलोमीटर लंबा नया हाई-स्पीड सड़क नेटवर्क तैयार होगा. राजस्थान राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम (RSRDC) की बैठक में इन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण हेतु लगभग ₹4,398 करोड़ के ऋण को मंजूरी दी गई है. सरकार का लक्ष्य है कि निर्माण शुरू होने से पहले जमीन से जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएं, ताकि बाद में किसी तरह की कानूनी या प्रशासनिक रुकावट सामने न आए. माना जा रहा है कि ये एक्सप्रेसवे राज्य में ट्रांसपोर्ट, व्यापार और निवेश के नए अवसर खोल सकते हैं.
सरकार जिन दो बड़े एक्सप्रेसवे पर काम कर रही है, उनमें पहला कोटपुतली-किशनगढ़ एक्सप्रेसवे और दूसरा ब्यावर-भरतपुर एक्सप्रेसवे शामिल है. कोटपुतली-किशनगढ़ एक्सप्रेसवे करीब 181 किलोमीटर लंबा होगा और इसे 4 से 6 लेन के आधुनिक हाईवे के रूप में विकसित किया जाएगा. इस सड़क के बनने के बाद दिल्ली, जयपुर और अजमेर के बीच यात्रा समय लगभग 5 घंटे से घटकर करीब 2 घंटे तक रह सकता है.
वहीं दूसरी ओर ब्यावर-भरतपुर एक्सप्रेसवे करीब 342 किलोमीटर लंबा होगा, जो राजस्थान के कई बड़े इलाकों को सीधे जोड़ने का काम करेगा. नई सड़कें उन क्षेत्रों से होकर गुजरेंगी जहां अभी तक बड़े हाईवे नहीं हैं, जिससे ट्रैफिक दबाव कम होगा और भारी वाहनों को वैकल्पिक रास्ता मिलेगा.
व्यापार, ट्रांसपोर्ट और प्रॉपर्टी सेक्टर को मिलेगा बड़ा फायदा
इन हाईवे परियोजनाओं से मकराना, नावा, कुचामन सिटी और अन्य व्यापारिक क्षेत्रों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है. खासकर ट्रांसपोर्ट कंपनियों को NH-48 के भारी ट्रैफिक से राहत मिल सकती है, जिससे समय और ईंधन दोनों की बचत होगी. इतना ही नहीं, इस एक्सप्रेसवे के आसपास जमीन और प्रॉपर्टी की मांग भी तेजी से बढ़ेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं से राजस्थान में रियल एस्टेट सेक्टर को नई गति मिल सकती है. इसके अलावा राज्य सरकार छोटे हाईवे और सड़कों को भी अपग्रेड करने पर ध्यान दे रही है, ताकि शहरों और कस्बों की कनेक्टिविटी मजबूत हो सके और लोग कम समय में लबी दूरी तय कर सके.
यह बड़े प्रोजेक्ट्स से कैसे बदल देंगे राजस्थान की सड़क व्यवस्था
कोटपुतली-किशनगढ़ एक्सप्रेसवे की लंबाई 181 किलोमीटर होगी और यह मकराना मार्बल हब व खाटू श्याम क्षेत्र को बेहतर कनेक्टिविटी देगा.
ब्यावर-भरतपुर एक्सप्रेसवे 342 किलोमीटर लंबा होगा, जो कई जिलों और औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ेगा.
SH-26 को चौड़ा कर 2 लेन से 4 लेन बनाया जाएगा.
केकड़ी के पास नया बाईपास बनाया जाएगा ताकि भारी ट्रकों को शहर के अंदर से न गुजरना पड़े.
गोतान-बिलारा-पुंडल रोड नेटवर्क की मरम्मत के लिए बजट बढ़ाया गया है.
नए हाईवे बनने से ट्रैफिक जाम कम होगा, यात्रा समय घटेगा और ईंधन की बचत होगी.
एक्सप्रेसवे के आसपास प्रॉपर्टी और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है.
सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं से आने वाले सालों में राजस्थान का इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक विकास दोनों मजबूत होंगे.
राजस्थान में आने वाले समय में सफर पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज होने वाला है. रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार ने दो बड़े ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने की तैयारी तेज कर दी है, जिनसे करीब 523 किलोमीटर लंबा नया हाई-स्पीड सड़क नेटवर्क तैयार होगा. राजस्थान राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम (RSRDC) की बैठक में इन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण हेतु लगभग ₹4,398 करोड़ के ऋण को मंजूरी दी गई है. सरकार का लक्ष्य है कि निर्माण शुरू होने से पहले जमीन से जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएं, ताकि बाद में किसी तरह की कानूनी या प्रशासनिक रुकावट सामने न आए. माना जा रहा है कि ये एक्सप्रेसवे राज्य में ट्रांसपोर्ट, व्यापार और निवेश के नए अवसर खोल सकते हैं.
सरकार जिन दो बड़े एक्सप्रेसवे पर काम कर रही है, उनमें पहला कोटपुतली-किशनगढ़ एक्सप्रेसवे और दूसरा ब्यावर-भरतपुर एक्सप्रेसवे शामिल है. कोटपुतली-किशनगढ़ एक्सप्रेसवे करीब 181 किलोमीटर लंबा होगा और इसे 4 से 6 लेन के आधुनिक हाईवे के रूप में विकसित किया जाएगा. इस सड़क के बनने के बाद दिल्ली, जयपुर और अजमेर के बीच यात्रा समय लगभग 5 घंटे से घटकर करीब 2 घंटे तक रह सकता है.
वहीं दूसरी ओर ब्यावर-भरतपुर एक्सप्रेसवे करीब 342 किलोमीटर लंबा होगा, जो राजस्थान के कई बड़े इलाकों को सीधे जोड़ने का काम करेगा. नई सड़कें उन क्षेत्रों से होकर गुजरेंगी जहां अभी तक बड़े हाईवे नहीं हैं, जिससे ट्रैफिक दबाव कम होगा और भारी वाहनों को वैकल्पिक रास्ता मिलेगा.
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व्यापार, ट्रांसपोर्ट और प्रॉपर्टी सेक्टर को मिलेगा बड़ा फायदा
इन हाईवे परियोजनाओं से मकराना, नावा, कुचामन सिटी और अन्य व्यापारिक क्षेत्रों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है. खासकर ट्रांसपोर्ट कंपनियों को NH-48 के भारी ट्रैफिक से राहत मिल सकती है, जिससे समय और ईंधन दोनों की बचत होगी. इतना ही नहीं, इस एक्सप्रेसवे के आसपास जमीन और प्रॉपर्टी की मांग भी तेजी से बढ़ेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं से राजस्थान में रियल एस्टेट सेक्टर को नई गति मिल सकती है. इसके अलावा राज्य सरकार छोटे हाईवे और सड़कों को भी अपग्रेड करने पर ध्यान दे रही है, ताकि शहरों और कस्बों की कनेक्टिविटी मजबूत हो सके और लोग कम समय में लबी दूरी तय कर सके.
यह बड़े प्रोजेक्ट्स से कैसे बदल देंगे राजस्थान की सड़क व्यवस्था
कोटपुतली-किशनगढ़ एक्सप्रेसवे की लंबाई 181 किलोमीटर होगी और यह मकराना मार्बल हब व खाटू श्याम क्षेत्र को बेहतर कनेक्टिविटी देगा.
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ब्यावर-भरतपुर एक्सप्रेसवे 342 किलोमीटर लंबा होगा, जो कई जिलों और औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ेगा.
SH-26 को चौड़ा कर 2 लेन से 4 लेन बनाया जाएगा.
केकड़ी के पास नया बाईपास बनाया जाएगा ताकि भारी ट्रकों को शहर के अंदर से न गुजरना पड़े.
गोतान-बिलारा-पुंडल रोड नेटवर्क की मरम्मत के लिए बजट बढ़ाया गया है.
नए हाईवे बनने से ट्रैफिक जाम कम होगा, यात्रा समय घटेगा और ईंधन की बचत होगी.
एक्सप्रेसवे के आसपास प्रॉपर्टी और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है.
सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं से आने वाले सालों में राजस्थान का इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक विकास दोनों मजबूत होंगे.
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