राजस्थान में NEET एग्जाम से पहले गैस पेपर लीक होने के मामले की जांच में बड़े खुलासे खुलासे हुए हैं। मामले की जांच राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) कर रही है। नीट एग्जाम से पहले एक गैस पेपर सीकर के हजारों छात्र-छात्राओं तक पहुंचने का दावा किया गया। SOG ने मामले की जांच करते हुए संदिग्ध कंसल्टेंसी के मालिक समेत 13 युवकों से पूछताछ करके अहम सबूत जुटाए। कंसल्टेंसी और करियर काउंसिलर्स के मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर और CCTV फुटेज जब्त किए। जांच में सामने आया कि पकड़े गए 13 युवकों में से कोई भी नीट परीक्षार्थी नहीं था।
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कई हॉस्टल संचालक और मालिक हुए फरार
बता दें कि जांच करते हुए SOG ने हॉस्टल संचालकों पर शिकंजा कसा। सीकर के 25 से अधिक हॉस्टल संचालकों की कॉल डिटेल खंगाली। 45 से ज्यादा हॉस्टल संचालकों, सहयोगियों और युवकों को चिन्हित किया, जिन्हें पूछताछ के लिए कभी भी हिरासत में लिया जा सकता है। कार्रवाई के डर से कई हॉस्टल संचालक और मालिक फरार बताए जा रहे हैं। जब्त किए गए मोबाइल का डेटा डिलीट किया गया है, जिसकी रिकवरी के प्रयास जारी हैं। आरोपियों ने वॉट्सऐप और टेलीग्राम ग्रुप भी डिलीट किए हैं। छात्र और छात्राओं को गैस पेपर बेचने के लिए ही टेलीग्राम और वॉट्सऐप पर ग्रुप बनाए गए थे।
5-5 लाख रुपये लेकर बेचा गया था गैस पेपर
SOG के अनुसार, करीब 10000 छात्र-छात्राओं तक नीट का गैस पेपर पहुंचा। झुंझुनूं जिले के मंडावा के पास एक गांव के रहने वाले कंसल्टेंसी संचालक ने सबसे पहले कुछ छोटे काेचिंग सेंटरों, हॉस्टल संचालकों को 5-5 लाख रुपये में पेपर बेचे। इस शख्स ने बहुत से छात्रों को गैस पेपर के जरिए पास करवाने की बात कहकर वॉट्सऐप और टेलीग्राम ग्रुपों से जोड़ लिया था। छात्रों ने पेपर के बदले एक फिक्स अमाउंट देने का सौदा भी कर लिया था, जो पेपर होने के बाद दी जानी थी। लेकिन पेपर देते ही ग्रुप डिलीट कर दिए गए, जिन्हें रिकवर करने का प्रयास अब SOG और साइबर टीम कर रही है।
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पिपराली रोड पर लगे 1000 CCTV खंगाले
SOG के अनुसार, एक संदिग्ध युवक के मोबाइल में 600 से अधिक लोगों और विद्यार्थियों वाला सोशल मीडिया ग्रुप मिला। वहीं 1000 से ज्यादा CCTV फुटेज खंगाले गए। सीकर के हॉस्टलों, कोचिंग सेंटरों, कैफे और रेस्टोरेंट में लगे 1000 से ज्यादा CCTV फुटेज जब्त किए गए। पिपराली रोड पर विशेषकर यह कार्रवाई की गई। NTA ने जयपुर, धौलपुर, कोटा और सीकर को नीट एग्जाम के लिए अति संवेदनशील केंद्र माना था। परीक्षा से करीब एक महीने पहले NTA की टीम और अन्य एजेंसियों ने सीकर में जांच की थी। इइसके बावजूद पेपर बेचने वाले संदिग्ध लोग एजेंसियों के रडार से बच गए।
राजस्थान में NEET एग्जाम से पहले गैस पेपर लीक होने के मामले की जांच में बड़े खुलासे खुलासे हुए हैं। मामले की जांच राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) कर रही है। नीट एग्जाम से पहले एक गैस पेपर सीकर के हजारों छात्र-छात्राओं तक पहुंचने का दावा किया गया। SOG ने मामले की जांच करते हुए संदिग्ध कंसल्टेंसी के मालिक समेत 13 युवकों से पूछताछ करके अहम सबूत जुटाए। कंसल्टेंसी और करियर काउंसिलर्स के मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर और CCTV फुटेज जब्त किए। जांच में सामने आया कि पकड़े गए 13 युवकों में से कोई भी नीट परीक्षार्थी नहीं था।
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5-5 लाख रुपये लेकर बेचा गया था गैस पेपर
SOG के अनुसार, करीब 10000 छात्र-छात्राओं तक नीट का गैस पेपर पहुंचा। झुंझुनूं जिले के मंडावा के पास एक गांव के रहने वाले कंसल्टेंसी संचालक ने सबसे पहले कुछ छोटे काेचिंग सेंटरों, हॉस्टल संचालकों को 5-5 लाख रुपये में पेपर बेचे। इस शख्स ने बहुत से छात्रों को गैस पेपर के जरिए पास करवाने की बात कहकर वॉट्सऐप और टेलीग्राम ग्रुपों से जोड़ लिया था। छात्रों ने पेपर के बदले एक फिक्स अमाउंट देने का सौदा भी कर लिया था, जो पेपर होने के बाद दी जानी थी। लेकिन पेपर देते ही ग्रुप डिलीट कर दिए गए, जिन्हें रिकवर करने का प्रयास अब SOG और साइबर टीम कर रही है।
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