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राजस्थान के रेतीले इलाकों में पाए जाने वाले मिठी जल या पीलू के पेड़ को यहां का देसी एसी कहा जाता है. सोशल मीडिया पर वायरल इस पेड़ की घनी छाया भीषण गर्मी में लोगों को जबरदस्त राहत पहुंचा रही है.
यह पेड़ तपती गर्मी में ठंडक कैसे देता है?

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इस पेड़ की पत्तियां बहुत घनी होती हैं जिससे सूरज की सीधी धूप जमीन तक नहीं पहुंच पाती है. साथ ही यह पेड़ ट्रांसपिरेशन प्रक्रिया के जरिए हवा में महीन जलवाष्प छोड़ता है जो आसपास की गर्मी को सोख लेता है.
तापमान में कितनी गिरावट ला सकता है यह पेड़?

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मिठी जल के पेड़ के नीचे का तापमान आसपास के मुकाबले 5 से 8 डिग्री तक कम बना रहता है. तेज लू के थपेड़ों के बीच भी इसकी सघन पत्तियों से टकराकर आने वाली हवा काफी ठंडी महसूस होती है.
राजस्थान के किन जिलों में मिलता है यह पेड़?

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यह खास पेड़ मुख्य रूप से जोधपुर, बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर, चूरू, झुंझुनू और नागौर जैसे शुष्क इलाकों में पाया जाता है. लंबी यात्रा करने वाले राहगीर और ग्रामीण लोग गर्मी से बचने के लिए अक्सर इसी पेड़ का सहारा लेते हैं.
छाया के अलावा इस पेड़ के और क्या फायदे हैं?

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ठंडक देने के साथ ही इस पेड़ में लगने वाली मीठी बेर खाने के काम आती हैं जो काफी स्वादिष्ट होती हैं. इसके अलावा इसकी टहनियों का इस्तेमाल ग्रामीण इलाकों में आज भी दातून के रूप में बखूबी किया जाता है.
प्रकृति का यह वरदान मशीनी एसी से बेहतर क्यों है?

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जहां शहरों में एसी चलाने के लिए बिजली और भारी खर्च की जरूरत होती है वहीँ यह प्राकृतिक उपाय बिल्कुल मुफ्त है. इसमें न तो बिजली कटने की कोई टेंशन होती है और न ही ब्लास्ट जैसा कोई भी बड़ा खतरा बना रहता है. नोट: यह जानकारी राजस्थान की स्थानीय परंपराओं और प्राकृतिक संसाधनों के फायदों पर आधारित है.