Nirmal Pareek
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जयपुर: राजस्थान में गायों में लंपी रोग तेजी से फैल रहा है। प्रदेश में इस रोग से प्रभावित 16 जिलों में गायों के ट्रांसपोर्टेशन पर रोक लगा दी गई है। अब तक 5 हजार से ज्यादा गायों की लंपी स्कीन रोग से मौत हो चुकी है। इसी बीच सीएम अशोक गहलोत ने गोवंशों में हो रही लंपी रोग को लेकर चिंता जताई है। सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि ये रोग अत्यंत संक्रामक है। अपने पशुओं को इससे बचाने के लिए आवश्यक सावधानियों का पालन करें।
वहीं सीएम गहलोत ने केन्द्र सरकार से गौवंश को इस बीमारी से बचाने के लिए आर्थिक एवं आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने और बीमारी के प्रभावी नियंत्रण में सहयोग का गुरुवार को आग्रह किया।
गहलोत ने कहा कि राज्य सरकार गौवंशीय पशुओं के प्रति सजगता एवं संवेदनशीलता बरतते हुए रोग नियंत्रण के सभी संभावित उपाय कर रही है। उन्होंने राज्य के पशुपालकों से धैर्य बनाये रखने एवं गौशाला संचालकों, जनप्रतिनिधियों और स्वयंसेवी संस्थाओं से बीमारी के नियंत्रण एवं रोकथाम में राज्य सरकार का सहयोग करने की अपील भी की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गौवंश में लम्पी चर्म रोग राजस्थान सहित गुजरात, तमिलनाडु, ओडिशा, कर्नाटक, केरल, असम, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे कई राज्यों में फैल रहा है। एक सरकारी बयान के मुताबिक, गहलोत ने बताया कि प्रदेश के जैसलमेर, जालौर, बाड़मेर, पाली, सिरोही, नागौर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, जोधपुर, चुरू, जयपुर, सीकर, झुंझुनू, उदयपुर, अजमेर व बीकानेर जिलों में रोग की पुष्टि हुई है। बयान में कहा गया है कि राज्य में अब तक 1.21 लाख पशु इस बीमार से प्रभावित हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि आपातकालीन आवश्यक औषधियां खरीदने के लिए संभाग स्तरीय अजमेर, बीकानेर और जोधपुर कार्यालयों को आठ से 12 लाख रुपये और बाकी प्रभावित जिलों को दो से आठ लाख रुपये सहित कुल 1.06 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि आवंटित की गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि जयपुर मुख्यालय से भेजे गए नोडल अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर सतत निगरानी कर रहे हैं। गहलोत के मुताबिक, इस रोग की सतत निगरानी के लिए प्रभावित जिलों के साथ-साथ जयपुर मुख्यालय में भी नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है।
बताया जा रहा है कि इस रोग के कई लक्षण है। जिसमें बुखार, वजन कम होना, लार निकलना, आंख और नाक का बहना, दूध का कम होना, शरीर पर अलग-अलग तरह के नोड्यूल दिखाई देना शामिल है। इसके साथ ही इस रोग में शरीर में गांठें भी बन जाती हैं। साथ ही ये भी देखने को मिला है कि, इससे मादा मवेशियों को बांझपन, गर्भपात, निमोनिया और लंगड़ापन झेलना पड़ जाता है।
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