'उद्धव से नाराजगी नहीं, लेकिन…', MP ने बताया शिवसेना-UBT छोड़कर क्यों गए एकनाथ शिंदे के साथ?

रविवार को नागेश पाटील आष्टीकर ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर दी कि वह उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना (शिंदे सेना) में शामिल हो गए हैं.

Shivsena

महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है. ‘ऑपरेशन टाइगर’ की अटकलों के बीच शिवसेना (UBT) के हिंगोली से लोकसभा सांसद नागेश पाटील आष्टीकर ने आखिरकार पाला बदल लिया है. रविवार को उन्होंने आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर दी कि वह उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना (शिंदे सेना) में शामिल हो गए हैं.

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आष्टीकर ने इस बड़े फैसले के पीछे अपने संसदीय क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए फंड की भारी कमी और विपक्ष में रहने की वजह से हो रहे राजनीतिक नुकसान को मुख्य वजह बताया है.

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‘उद्धव ठाकरे से नाराजगी नहीं, लेकिन…’

पार्टी छोड़ने के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में आष्टीकर ने साफ किया कि वह शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे से बिल्कुल भी नाराज नहीं हैं. हालांकि, उन्होंने पार्टी प्रवक्ता संजय राउत द्वारा बागी सांसदों के खिलाफ इस्तेमाल किए जा रहे कड़े और अपशब्दों पर गहरी आपत्ति जताई.

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आष्टीकर ने अपनी विचारधारा से समझौता करने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, ‘मैं कहीं बाहर नहीं गया हूं. मैंने सिर्फ एक शिवसेना से दूसरी शिवसेना में कदम रखा है. लोग अपनी नाराजगी जाहिर कर सकते हैं, लेकिन उन्हें अपनी भाषा की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए.’

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‘बयानबाजी ने बदला सांसदों का इरादा’

सांसद ने अपने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी कर ‘ऑपरेशन टाइगर’ के पीछे की इनसाइड स्टोरी बयां की. उन्होंने खुलासा किया कि वह और उनके साथी सांसदों ने 18 जून तक पार्टी छोड़ने का कोई अंतिम फैसला नहीं लिया था. लेकिन इसके बाद पार्टी के कुछ शीर्ष नेताओं द्वारा की गई तीखी और अपमानजनक टिप्पणियों ने बागी गुट को सोचने पर मजबूर कर दिया.

आष्टीकर ने कहा, ‘गुरुवार के बाद जिस तरह के बयान हमारे खिलाफ दिए गए, उससे हमें अहसास हो गया कि अब इस पार्टी में रहने का कोई मतलब नहीं बचा है. मेरे पास इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं था.’

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फंड के लिए उठाया कदम

अपने निर्वाचन क्षेत्र के प्रति जिम्मेदारी का हवाला देते हुए बागी सांसद ने कहा कि सत्ता पक्ष में न होने के कारण उनके क्षेत्र के विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े थे. जनता ने उन्हें बड़ी उम्मीदों के साथ जिताया था, लेकिन पिछले दो सालों की तमाम कोशिशों के बावजूद विपक्ष में होने के चलते वे अपनी लोकसभा सीट के लिए सरकारी फंड हासिल करने में नाकाम रहे.

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उन्होंने बताया कि सालाना मिलने वाली 5 करोड़ रुपये की सांसद निधि इतनी बड़ी जिम्मेदारी के लिए बेहद सीमित और नाकाफी है. जनता के अधूरे काम पूरे करने के लिए ही उन्होंने शिंदे सरकार के साथ जाने का फैसला किया.

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संजय राउत को जवाब

संजय राउत द्वारा बागी सांसदों को शिवसेना कार्यकर्ताओं के गुस्से का सामना करने की चेतावनी देने पर भी आष्टीकर ने दोटूक जवाब दिया. उन्होंने कहा, ‘राउत साहब हमारे लिए पितातुल्य हैं और उन्हें डांटने का हक है, लेकिन उन्हें यह भी समझना चाहिए कि सामने वाले के पास भी उसी भाषा में करारा जवाब देने की पूरी क्षमता है. ऐसी घटनाएं कभी-कभार हो सकती हैं, लेकिन इसके बाद होने वाले अंजाम से खुद संजय राउत भी अच्छी तरह वाकिफ हैं.’

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लेखक के बारे में

Arif Khan

Arif Khan

आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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