Amar Dev Paswan
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पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल कांग्रेस अभूतपूर्व राजनीतिक संकट का सामना कर रही है. पार्टी के भीतर बगावत लगातार बढ़ती जा रही है और अब यह लड़ाई केवल नेतृत्व तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि पार्टी की पहचान, चुनाव चिह्न और सैकड़ों करोड़ रुपये की संपत्ति पर अधिकार की जंग में बदलती दिखाई दे रही है.
ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के नेतृत्व में 65 विधायकों ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. दूसरी ओर सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में 20 सांसदों ने तृणमूल से अलग होकर खुद को ‘असली तृणमूल’ बताते हुए एनसीपीआई में विलय का दावा किया है. बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से संसद में अलग बैठने की मांग भी की है.
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इस बीच बागी विधायक भी चुनाव आयोग, विधानसभा अध्यक्ष और अदालत के समक्ष अपनी संख्या बल का दावा पेश कर पार्टी और उसके चुनाव चिह्न पर अधिकार जताने की तैयारी में जुटे हैं. कोलकाता हाई कोर्ट द्वारा ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष का नेता मानने संबंधी आदेश ने बागी खेमे का मनोबल और बढ़ा दिया है.
मामले ने नया मोड़ तब लिया जब तृणमूल के पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप विश्वास ने एक निजी बैंक को पत्र लिखकर पार्टी के खाते के संचालन पर रोक लगाने की मांग की. अपने पत्र में उन्होंने पार्टी के वैध नेतृत्व को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता और विधायकों-सांसदों की बगावत का हवाला दिया. बताया जा रहा है कि यह पार्टी के प्रमुख खातों में से एक है, जिसमें निर्वाचन आयोग के समक्ष जमा ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार लगभग 534 करोड़ रुपये जमा हैं.
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हालांकि, ममता बनर्जी खेमे ने 5 जून को अरूप विश्वास को कोषाध्यक्ष पद से हटा दिया था, लेकिन 12 जून को लिखे गए उनके पत्र ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है. माना जा रहा है कि पार्टी की वैधता को लेकर चल रही लड़ाई का सीधा असर उसके वित्तीय संसाधनों पर भी पड़ सकता है.
बागी नेताओं ने विधानसभा चुनाव में तृणमूल की करारी हार के लिए अभिषेक बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया है. उनका आरोप है कि राष्ट्रीय महासचिव रहते हुए अभिषेक बनर्जी ने विवादित बयान देकर मतदाताओं को पार्टी से दूर किया, वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों की राय को नजरअंदाज किया तथा पार्टी में परिवारवाद को बढ़ावा दिया. बागी खेमे ने यह भी आरोप लगाया है कि पार्टी के महत्वपूर्ण निर्णयों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया.
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इन आरोपों और दावों के बीच शुक्रवार को अभिषेक बनर्जी के लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात करने की संभावना है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तृणमूल के भीतर जारी यह संघर्ष अब केवल नेतृत्व का नहीं, बल्कि पार्टी की वैधता, चुनाव चिह्न और 534 करोड़ रुपये के वित्तीय संसाधनों पर नियंत्रण की निर्णायक लड़ाई बन चुका है.
अब सभी की निगाहें चुनाव आयोग, अदालतों और संवैधानिक संस्थाओं पर टिकी हैं, जिनके फैसले यह तय करेंगे कि आखिर पश्चिम बंगाल की राजनीति में ‘असली तृणमूल’ कौन है.
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TMC के बैंक अकाउंट तुरंत फ्रीज़ करने की मांग को लेकर ‘ऋतब्रत गुट’ के 10 विधायकों ने बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट में दर्ज कराई औपचारिक शिकायत दर्ज करवाई है. एक प्राइवेट बैंक ने तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक अकाउंट फ्रीज़ कर दिए हैं, जिनमें कुल ₹440 करोड़ शामिल हैं.
बागी TMC MLA बिश्वनाथ दास की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए, बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस ने HDFC बैंक में मौजूद तीन TMC अकाउंट की जांच शुरू की है. इसके बाद, HDFC बैंक ने तीनों अकाउंट पर ‘डेबिट फ्रीज’लगा दिया और कथित तौर पर 24 घंटे के अंदर अकाउंट से जुड़े डॉक्युमेंट और उनकी ट्रांजेक्शन हिस्ट्री जमा करने को कहा. सूत्रों से पता चला है कि इन तीनों अकाउंट में कुल बैलेंस लगभग ₹440 करोड़ था.
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