Om Pratap
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Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में रविवार को आज फिर भूचाल आ गया। राज्य के नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता अजित पवार ने राजभवन में उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। अब महाराष्ट्र में दो-दो डिप्टी सीएम होंगे। उधर, एनसीपी के महाराष्ट्र सरकार में शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि राज्य में अब ट्रिपल इंजन की सरकार है।
शपथ ग्रहण समारोह के बाद राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस ने मीडिया से बातचीत की। देवेंद्र फड़णवीस ने कहा, आज जो हुआ वह महाराष्ट्र के हित में है. एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हम महाराष्ट्र के विकास में एक नया अध्याय लिखेंगे। हम तीनों मिलकर महाराष्ट्र के विकास को गति देंगे।
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, पहले हमारे पास डबल इंजन की सरकार थी। अब यह ट्रिपल इंजन सरकार बन गयी है, इसलिए महाराष्ट्र का विकास अब बुलेट ट्रेन की गति से होगा। हमारी डबल इंजन व्यवस्था में अब एक और कम्पार्टमेंट जुड़ गया है। अजित पवार के सरकार में शामिल होने से महाराष्ट्र की जनता को ही फायदा होगा।
अजीत पवार के साथ एनसीपी के 9 अन्य विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली। अजित पवार एनसीपी छोड़कर 54 में से 30 एनसीपी विधायकों के साथ सरकार में शामिल हो गए हैं। महाराष्ट्र के मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि राष्ट्रवादी पार्टी ने भाजपा का साथ देने का निर्णय लिया है। उनका हम स्वागत करते हैं। आज NCP के 40 से ज्यादा विधायक शामिल हो रहे हैं।
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सबसे पहले अजित पवार ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली। इसके बाद छगन भुजबल को भी राज्यपाल रमेश बैंस ने पद एवं गोपनियता की शपथ दिलाई। तीसरे नंबर पर दिलीप वलसे पाटिल, चौथे नंबर पर हसन मुश्रीफ, पांचवें नंबर पर धनंजय मुंडे, छठे नंबर पर धर्माराव, सातवें नंबर पर अदिति तटकरे, आठवें नंबर पर संजय बनसोडेऔर नौंवे नंबर पर अनिल पाटिल ने महाराष्ट्र सरकार में मंत्री पद की शपथ ली।
#WATCH | Inside visuals from Maharashtra Raj Bhawan where CM Eknath Shinde, NCP Leader Ajit Pawar and Chhagan Bhujbal are present. pic.twitter.com/lv8aqrF0yI
— ANI (@ANI) July 2, 2023
बता दें कि अजित पवार ने रविवार दोपहर अपने घर पर एनसीपी विधायकों की बैठक बुलाई थी। बैठक में प्रफुल पटेल और सुप्रिया सुले भी मौजूद थी। बैठक के बाद अजित पवार अचानक समर्थक विधायकों के साथ राजभवन पहुंचे। अब थोड़ी देर में अजित पवार, प्रफुल पटेल समेत अन्य विधायकों को पद एवं गोपनियता की शपथ दिलाई जाएगी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अजित पवार द्वारा बुलाई गई बैठक में बड़ी संख्या में एनसीपी विधायक शामिल हुए। दिलीप वलसे पाटिल, हसन मुश्रीफ, छगन भुजबल, किरण लहमते, नीलेश लंका, धनंजय मुंडे, रामराजे निंबालकर, दौलत दरोदा, मकरंद पाटिल, अतुल बेनके, सुनील टिंगरे, अमोल मिटकारी, अदिति तटकरे, शेखर निकम, निलय नाइक, अशोक पवार, अनिल पाटिल, सरोज अहिरे और अन्य उपस्थित थे।
#WATCH | Maharashtra: A meeting of NCP leaders has been called at the residence of NCP leader Ajit Pawar. NCP working president Supriya Sule, party leader Praful Patel and others have reached Ajit Pawar's residence for the meeting. (https://daveseminara.com) pic.twitter.com/wcOBZcgTFB
— ANI (@ANI) July 2, 2023
कहा जा रहा है कि पहले से नाराज अजित पवार को एनसीपी की कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने मनाने की कोशिश की लेकिन अजित पवार सुनने को तैयार नहीं थे। पिछले कई दिनों से ऐसी चर्चाएं चल रही थीं कि अजित पवार एनसीपी में नाखुश हैं। उधर, शरद पवार के विश्वासपात्र प्रफुल्ल पटेल और छगन भुजबल भी शिंदे-फडणवीस के साथ सरकार में शामिल हो रहे हैं। इस बीच प्रफुल्ल पटेल को केंद्र में मंत्री पद मिलने की उम्मीद है।
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दरअसल, कुछ दिनों पहले एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने पद से इस्तीफा दे दिया था। लेकिन समर्थकों की मांग पर उन्होंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया। बाद में शरद पवार ने अपनी बेटी सुप्रिया सुले और प्रफुल पटेल को एनसीपी का कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया था। जिसके बाद से ही अजित पवार नाराज नजर आ रहे थे। उन्होंने कई मौकों बीजेपी की तारीफ करके अपनी नाराजगी भी जताई थी।
अजित पवार ने पहली बार बगावत नहीं की है। बल्कि जब से महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी का गठबंधन हुआ था। उसके बाद से ही खुश नहीं थे। 2019 में उन्होंने अचानक से बीजेपी को समर्थन दे दिया था। तब देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री और अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। लेकिन तब शरद पवार ने इस बगावत को रोक लिया था। उन्होंने 48 घंटे में ही सब विधायकों को एकजुट कर लिया था। जिसके बाद देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
हालांकि बाद जब शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में महाविकास अघाड़ी की सरकार बनी तो उसमें अजित पवार को उपमुख्यमंत्री बनाया गया था। तब इसे शरद पवार का मास्टर स्ट्रोक माना गया था। लेकिन बाद में जब उद्धव सरकार गिरी तो अजित पवार नेता प्रतिपक्ष बने थे।
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