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रात गहरी थी… सिद्धेश्वर एक्सप्रेस अपनी रफ्तार से मुंबई की ओर दौड़ रही थी. एसी कोच में ज्यादातर यात्री नींद की आगोश में थे. उन्हीं में एक ज्वेलरी व्यापारी भी था, जिसकी ट्रॉली बैग में करोड़ों रुपये के सोने के आभूषण रखे थे. लेकिन उसे क्या पता था कि उसी डिब्बे में कुछ ऐसी नजरें भी उसका पीछा कर रही हैं, जो उसकी हर गतिविधि पर पैनी निगाह बनाए हुए थीं. व्यापारी गहरी नींद में सो गया… और इसी के साथ शुरू हुआ एक ऐसा ‘गोल्ड हाइस्ट’, जिसने रेलवे पुलिस के भी होश उड़ा दिए.

करीब छह महीने बाद अब मुंबई रेलवे क्राइम ब्रांच ने इस सनसनीखेज चोरी का पर्दाफाश करते हुए चार शातिर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. इतना ही नहीं, चोरी के बाद गलाकर ठिकाने लगाने की कोशिश किया गया 1 करोड़ 62 लाख 27 हजार 500 रुपये कीमत का 1 किलो 98.5 ग्राम सोना भी बरामद कर लिया गया है.

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एक रात और करोड़ों का खेल

6 और 7 दिसंबर 2025 की दरम्यानी रात गोरेगांव निवासी ज्वेलरी कारोबारी अभयकुमार मदनलाल जैन सोलापुर से कल्याण की यात्रा कर रहे थे. सिद्धेश्वर एक्सप्रेस के ए-1 कोच में सीट नंबर 49 पर बैठे जैन ने अपनी दो ट्रॉली बैग सीट के नीचे चेन और लॉक से सुरक्षित बांध रखी थीं. बैग में सोने के आभूषण और अन्य कीमती सामान रखा था. लेकिन चोरों ने सुरक्षा के इन इंतजामों को भी चुनौती दे दी. रात के अंधेरे में, जब पूरा कोच नींद में डूबा हुआ था, गिरोह ने बेहद सफाई से ट्रॉली बैग पार कर दी और अगले ही पल करोड़ों रुपये का माल लेकर गायब हो गया. सुबह आंख खुली तो व्यापारी के पैरों तले जमीन खिसक चुकी थी.

CCTV में दिखीं परछाइयां, शुरू हुई शिकंजे की कहानी

घटना के बाद कल्याण रेलवे पुलिस में मामला दर्ज हुआ, लेकिन शुरुआती जांच में पुलिस के हाथ लगभग खाली थे. न कोई प्रत्यक्ष गवाह और न ही कोई ठोस सुराग. इसके बाद मुंबई रेलवे पुलिस आयुक्त एम. राकेश कलासागर और डीसीपी प्रज्ञा जेडगे के निर्देश पर जांच रेलवे क्राइम ब्रांच को सौंपी गई. क्राइम ब्रांच ने सिद्धेश्वर एक्सप्रेस के सोलापुर से कल्याण तक के पूरे रूट की पड़ताल शुरू की. रेलवे स्टेशनों के सीसीटीवी कैमरे खंगाले गए, सराफा बाजारों पर नजर रखी गई और तकनीकी जांच के जरिए संदिग्ध चेहरों को चिन्हित किया गया. सैकड़ों घंटे की फुटेज और महीनों की मेहनत के बाद पुलिस को एक संगठित गिरोह की गतिविधियां दिखाई देने लगीं.

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सोलापुर के गांवों तक पहुंची जांच

जांच का धागा पुलिस को सोलापुर जिले के माढा तालुका तक ले गया. पता चला कि वारदात को अंजाम देने वाले आरोपी बारलोनी, कव्हे और वडशिंगे गांवों से जुड़े हैं. इसके बाद रेलवे क्राइम ब्रांच, स्थानीय पुलिस और अपराध शाखा की संयुक्त टीमों ने कई गांवों में लगातार दबिश दी.

करीब छह महीने तक चली इस तलाश के बाद आखिरकार पुलिस ने गिरोह के चार अहम सदस्यों को धर दबोचा. गिरफ्तार आरोपियों में रमेश डिकोळे, फुलचंद उर्फ सरपंच गुंजाळ, धनराज गुंजाळ और पुणेकर उर्फ शिवण्या डिकोळे शामिल हैं.

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पहचान मिटाने के लिए गलाया सोना

पुलिस पूछताछ में जो खुलासा हुआ, उसने जांच अधिकारियों को भी चौंका दिया. आरोपियों ने चोरी के तुरंत बाद सोने के आभूषणों को गलाकर लगड़ियों में तब्दील कर दिया था, ताकि उसकी पहचान पूरी तरह खत्म हो जाए और पुलिस तक कोई सबूत न पहुंचे. लेकिन अपराधियों की यह चाल ज्यादा दिनों तक नहीं चल सकी.

छापेमारी के दौरान पुलिस ने 250 ग्राम, 548.5 ग्राम और 300 ग्राम वजन की तीन सोने की लगड़ियां बरामद कीं. बरामद सोने की कुल कीमत 1.62 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है.

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ऐसे करता था गिरोह शिकार

जांच में सामने आया कि यह गिरोह ट्रेनों में सफर करने वाले व्यापारियों और लंबी दूरी के यात्रियों पर विशेष नजर रखता था. गिरोह के सदस्य पहले यह पता लगाते थे कि किस यात्री के पास कीमती सामान है. फिर पूरी यात्रा के दौरान उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जाती थी. जैसे ही यात्री नींद में जाता, गिरोह अपना खेल कर देता. रेलवे पुलिस को आशंका है कि यह गिरोह कई अन्य राज्यों में भी इसी तरह की वारदातों में शामिल रहा हो सकता है.

छह महीने की जंग, आखिरकार पुलिस की जीत

चलती ट्रेन में करोड़ों के सोने की चोरी, फिर सबूत मिटाने के लिए उसे गलाकर नया रूप देना और महीनों तक पुलिस को चकमा देना… यह किसी क्राइम थ्रिलर फिल्म की कहानी जैसी जरूर लग सकती है, लेकिन मुंबई रेलवे क्राइम ब्रांच ने साबित कर दिया कि अपराधी चाहे कितने भी शातिर क्यों न हों, कानून की पकड़ से ज्यादा दिनों तक बच नहीं सकते. अब पुलिस की नजर गिरोह के बाकी फरार सदस्यों पर है. माना जा रहा है कि उनकी गिरफ्तारी के साथ इस हाई-प्रोफाइल ‘गोल्ड हाइस्ट’ के और भी कई राज सामने आ सकते हैं.

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First published on: Jun 03, 2026 01:14 PM

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