बेजुबान की मौत पर रो पड़ा पूरा गांव, बंदर की निकाली गई शवयात्रा, 5 दिन का रखा शोक
बिजली का करंट लगने से बंदर को जोरदार झटका लगा और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया. यह सीन देखकर, वहां मौजूद लोग सन्न रह गए. (पवन मराठे की रिपोर्ट)
Edited By Arif Khan

Edited By Arif Khan

महाराष्ट्र के धुले जिले के शिंदखेड़ा से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने हर किसी का दिल छू लिया. यहां एक मासूम बंदर की बिजली का करंट लगने से मौत हो गई, लेकिन उसके बाद जो हुआ, उसने इंसानियत और संवेदनशीलता की एक अनोखी मिसाल पेश कर दी.
यह कोई साधारण बंदर नहीं था, बल्कि इलाके के लोगों के लिए परिवार का हिस्सा बन चुका था. पिछले कई महीनों से वह वीर एकलव्य नगर में लोगों के बीच रहता, बच्चों के साथ खेलता और हर किसी का चहेता बन गया था. उसकी अचानक मौत की खबर जैसे ही फैली, पूरे इलाके में सन्नाटा पसर गया. लोगों की आंखों में आंसू थे और माहौल गमगीन हो उठा.
बुधवार, दोपहर के समय वरपाड़े रोड स्थित BSNL कार्यालय के पास यह दर्दनाक हादसा हुआ. बिजली का करंट लगने से बंदर को जोरदार झटका लगा और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया. यह सीन देखकर, वहां मौजूद लोग सन्न रह गए.
बंदर की मौत के बाद ग्रामीणों ने उसे यूं ही छोड़ना मंजूर नहीं किया. पूरे सम्मान के साथ उसकी शवयात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. माहौल बिल्कुल वैसा ही था, जैसा किसी अपने की अंतिम यात्रा में होता है – शोक, श्रद्धा और भावनाओं का सैलाब.
ग्रामीणों ने हिंदू रीति-रिवाजों के मुताबिक, बंदर का अंतिम संस्कार किया. हनुमान मंदिर के पास पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई और उसे विदाई दी गई. लोगों ने उसे ‘हनुमान का स्वरूप’ मानकर श्रद्धा सुमन अर्पित किए.
इतना ही नहीं, गांव वालों ने बंदर की मौत पर पांच दिन का शोक घोषित किया है. साथ ही उसकी दशक्रिया करने का भी निर्णय लिया गया है -जो आमतौर पर इंसानों के लिए की जाती है. यह फैसला गांव वालों के गहरे लगाव और सम्मान को दर्शाता है.
यह घटना सिर्फ एक बंदर की मौत की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस रिश्ते की मिसाल है जो इंसान और बेजुबान के बीच बनता है. शिंदखेड़ा के लोगों ने यह साबित कर दिया कि संवेदनशीलता और करुणा सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि जीने का तरीका है.
Get Breaking News First and Latest Updates from India and around the world on News24. Follow News24 on Facebook, Twitter.
First published on:
Read more: About our editorial guidelines and standards here.