एमएलसी चुनाव के लिए नामांकन के आखिरी दिन राजनीतिक हलचल तेज रही. संख्या के हिसाब से 9 में से 5 सीटें भाजपा के हिस्से में आईं और पार्टी ने अपने पांच उम्मीदवार—सुनील कर्जतकर, माधवी नाइक, संजय भेंडे, विवेक कोल्हे और प्रमोद जाठर—को मैदान में उतारा. इसके अलावा विधान परिषद उपचुनाव के लिए भाजपा ने प्रज्ञा राजीव सातव को भी उम्मीदवार बनाया.
बीजेपी उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल करते समय खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस अपने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ मौजूद थे. वहीं, शिवसेना (शिंदे गुट) ने नीलम गोरहे और बच्चू कड़ू को उम्मीदवार बनाया, जबकि एनसीपी (अजित पवार गुट) की ओर से जिशान सिद्दीकी ने नामांकन दाखिल किया.
असल राजनीतिक पेच महा विकास आघाड़ी (MVA) में देखने को मिला. गठबंधन के भीतर यह इच्छा जताई जा रही थी कि शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे स्वयं चुनाव लड़ें. दिलचस्प बात यह रही कि भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट) और कांग्रेस—तीनों का रुख भी यही था कि अगर उद्धव ठाकरे खुद मैदान में उतरते हैं, तो वे अतिरिक्त उम्मीदवार नहीं उतारेंगे.
हालांकि, नामांकन के अंतिम दिन शिवसेना (यूबीटी) ने अंबादास दानवे को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया. इसके बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के साथ बैठक हुई और कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा. साथ ही, भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) ने भी कोई अतिरिक्त प्रत्याशी खड़ा नहीं किया.
इस तरह 9 सीटों के लिए 9 ही उम्मीदवार रहने से चुनाव निर्विरोध हो गया. नतीजतन, सत्ताधारी महायुति को 8 सीटें मिलीं, जबकि विपक्षी महा विकास आघाड़ी को 1 सीट हासिल हुई.










