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लोहगड केतन अग्रवाल हत्याकांड में बड़ा अपडेट, करीब 2500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल; चैट, CDR और फॉरेंसिक सबूत बने अहम कड़ी

अब इस मामले में पुलिस के आरोप, डिजिटल सबूत, फॉरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों के बयान किस तरह अदालत में परखे जाते हैं, इस पर सभी की नजर रहेगी. केतन अग्रवाल की मौत हादसा थी या सुनियोजित हत्या, इसका अंतिम फैसला अदालत में सबूतों की न्यायिक जांच के बाद ही होगा.

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महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बने पुणे के लोहगड किले के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में पुलिस जांच अब एक अहम पड़ाव पर पहुंच गई है. लोनावला ग्रामीण पुलिस ने मामले की जांच पूरी करने के बाद वडगांव मावल स्थित प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में करीब 2500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है. पुलिस की चार्जशीट में इस मामले से जुड़े फॉरेंसिक, तकनीकी, डिजिटल और प्रत्यक्ष साक्ष्यों को शामिल किया गया है.

लोहगड किले से गिरने के बाद हुई थी केतन की मौत

केतन अग्रवाल की 18 जून 2026 को लोहगड किले से गिरने के बाद मौत हुई थी. शुरुआती तौर पर इसे हादसा माना जा रहा था. केतन की मंगेतर सिया गोयल ने भी पुलिस को बताया था कि फोटो लेते समय संतुलन बिगड़ने के कारण केतन खाई में गिर गए. लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस को इस कहानी पर संदेह हुआ और मामला कथित हत्या की साजिश में बदल गया.

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पुलिस ने इस मामले में केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित साथी चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया था. बाद में जांच के दौरान चेतन के दोस्त रितेश हांगे को भी कथित साजिश में भूमिका के आरोप में गिरफ्तार किया गया. पुलिस के मुताबिक, हांगे को चेतन और सिया के बीच हुई बातचीत तथा कथित साजिश से जुड़े डिजिटल सबूतों के आधार पर जांच के दायरे में लाया गया.

यह भी पढ़ें: केतन मर्डर केस में आया नया ट्विस्ट, पुणे पुलिस ने चेतन के दोस्त को किया गिरफ्तार

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चार्जशीट में क्या-क्या सबूत?

पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट में जांच के दौरान जुटाए गए कई तरह के सबूत शामिल किए गए हैं. इनमें फॉरेंसिक रिपोर्ट, घटनास्थल से जब्त सामग्री, डिजिटल और साइबर एविडेंस, CCTV फुटेज, गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और आरोपियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी CDR शामिल हैं.

जांच में आरोपियों के मोबाइल फोन और कथित तौर पर डिलीट की गई चैट को भी अहम कड़ी माना गया है. पुलिस ने आरोप लगाया था कि सिया और चेतन के बीच हत्या से पहले और बाद में बातचीत हुई थी और कुछ चैट डिलीट की गई थीं. इन डिजिटल डाटा को फॉरेंसिक जांच के जरिए रिकवर किया गया.

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मामले की जांच में लोहगड किले के प्रवेश क्षेत्र के CCTV फुटेज और आरोपियों की गतिविधियों को भी खंगाला गया. पुलिस ने घटनास्थल का क्राइम सीन रीक्रिएट भी कराया था, ताकि घटना के दौरान आरोपियों की कथित गतिविधियों और घटनाक्रम को समझा जा सके.

हत्या की साजिश को लेकर पुलिस का क्या दावा?

पुलिस जांच के मुताबिक, केतन और सिया की सगाई फरवरी 2026 में हुई थी और दोनों की शादी प्रस्तावित थी. जांच एजेंसियों का दावा है कि सिया और चेतन के बीच संबंध थे और शादी को लेकर पैदा हुई परिस्थितियों के बीच केतन को रास्ते से हटाने की कथित साजिश रची गई. पुलिस के मुताबिक, लोहगड को अंतिम घटनास्थल बनाने से पहले कुछ अन्य जगहों पर भी विचार किया गया था.

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जांच के दौरान पुलिस ने कथित तौर पर दोनों आरोपियों की कई मुलाकातों, फोन कॉल्स और डिजिटल बातचीत की भी पड़ताल की. इससे पहले सामने आई पुलिस जांच में सिया और चेतन के बीच हजारों कॉल्स का रिकॉर्ड भी सामने आया था.

पुलिस का यह भी दावा है कि हत्या की कथित साजिश को अंजाम देने से पहले आरोपियों ने घटनास्थल और परिस्थितियों को लेकर तैयारी की थी. हालांकि, इन सभी दावों की अंतिम पुष्टि अब न्यायालय में साक्ष्यों और गवाहियों की जांच के बाद ही होगी.

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यह भी पढ़ें: सिया गोयल का नया चौंकाने वाला खुलासा, केतन के लिए पहले बनाई थी कोई और योजना, जानें फिर क्यों बदला प्लान?

अब आगे क्या होगा?

चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया का अगला चरण शुरू होगा. अदालत पुलिस की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों और साक्ष्यों की जांच करेगी. इसके बाद मामले में आरोप तय करने यानी चार्ज फ्रेमिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.

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वहीं, मुख्य आरोपी चेतन चौधरी के वकील एडवोकेट राम सहाणे ने भी चार्जशीट दाखिल किए जाने की पुष्टि की है. उनका कहना है कि वे पुलिस की ओर से पेश किए गए आरोपपत्र का अध्ययन करने के बाद अदालत के सामने अपना पक्ष रखेंगे.

अब इस मामले में पुलिस के आरोप, डिजिटल सबूत, फॉरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों के बयान किस तरह अदालत में परखे जाते हैं, इस पर सभी की नजर रहेगी. केतन अग्रवाल की मौत हादसा थी या सुनियोजित हत्या, इसका अंतिम फैसला अदालत में सबूतों की न्यायिक जांच के बाद ही होगा.

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First published on: Sep 19, 2026 09:03 PM

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