मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में फैली एक रहस्यमयी बीमारी ने लोगों के बीच भारी दहशत फैला दी है. राज्य के माछुर्दा, अदोरी, बोंडारी, कोरका और कुंडेकासा सहित कई गांवों में लगभग 40 दिनों से बीमारी के मामलों में अचानक भारी वृद्धि देखी जा रही है. इस अज्ञात बीमारी की वजह से अब तक 8 मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों अन्य निवासी और बच्चे इसकी चपेट में आकर बीमार पड़े हैं. इनमें कुंडेकासा गांव सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र बनकर उभरा है.
स्वास्थ्य विभाग की टीमें तुरंत हरकत में आ गई हैं और प्रभावित गांवों में शिविर लगाकर मरीजों का इलाज किया जा रहा है. हालांकि, अभी तक बीमारी की मुख्य वजह का सही-सही पता नहीं चल पाया है.
बालाघाट जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. परेश उपलाप ने कहा, “जिन बच्चों की मौत हुई है और जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है, उनमें मलेरिया बुखार और खुजली जैसे कई संक्रमणों के लक्षण दिखाई दिए हैं, साथ ही पोषण संबंधी कमियों के संकेत भी मिले हैं.”
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एक विशेष बीमारी या वायरस के स्पष्ट लक्षण नहीं
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, प्रभावित इलाकों में मरीजों के अंदर किसी एक बीमारी के बजाय अलग-अलग तरह के लक्षण देखने को मिल रहे हैं. क्षेत्र में मलेरिया, टाइफाइड, फंगल और त्वचा संक्रमण, खुजली, खसरा, बुखार, सर्दी-खांसी और डिहाइड्रेशन जैसी बीमारियों के मामले एक साथ सामने आए हैं. स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से गांवों में पानी के सैंपल, खाद्य पदार्थों की जांच और स्वच्छता अभियानों पर ध्यान दिया जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं यह संक्रमण दूषित पानी या भोजन की वजह से तो नहीं फैल रहा.
बीमारी के मुख्य कारण का सही-सही पता लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने गांव-गांव जाकर जांच शुरू कर दी है. मरीजों के रक्त और पीने के पानी के नमूनों को एकत्रित करके विस्तृत जांच के लिए भेजा गया है. इन सैंपलों को कोलकाता स्थित ICMR संस्थान और पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV) सहित देश भर के कई उन्नत परीक्षण केंद्रों में जांच के लिए भेजा गया है. फिलहाल स्वास्थ्य अधिकारियों को इन जांच रिपोर्टों का इंतजार है.
अस्पतालों और प्रभावित गांवों में मेडिकल कैंप लगाकर मरीजों का इलाज किया जा रहा है. गंभीर रूप से बीमार बच्चों को बेहतर इलाज के लिए पास के बड़े अस्पतालों में भर्ती कराया गया है. प्रशासन ने स्थानीय ग्रामीणों से साफ-सफाई बनाए रखने, उबला हुआ पानी पीने और बीमारी का कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाने की सलाह दी है.
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