MP UCC Bill : मध्य प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की दिशा में मोहन यादव सरकार ने बहुत बड़ा कदम उठाया है. रविवार को राजधानी भोपाल के बाहरी इलाके जगदीशपुर में आयोजित कैबिनेट की विशेष बैठक में यूसीसी के ड्राफ्ट बिल को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी गई है. अब इस विधेयक को 20 जुलाई से शुरू हो रहे मध्य प्रदेश विधानसभा के 5 दिवसीय मॉनसून सत्र में पेश किया जाएगा.
कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पत्रकारों से बात करते हुए इसे महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समरसता की दिशा में एक ऐतिहासिक फैसला बताया. मुख्यमंत्री ने साफ किया कि मध्य प्रदेश के आदिवासी समुदाय को इस कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है. सीएम यादव ने बताया कि ड्राफ्ट तैयार करने वाली कमेटी के सामने करीब 80 प्रतिशत मुस्लिम महिलाओं और 40 प्रतिशत मुस्लिम पुरुषों ने इस कानून का खुलकर समर्थन किया है. उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से वोट बैंक की राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रीय एकता के लिए इस बिल का समर्थन करने की अपील की.
क्या-क्या प्रावधान हैं इस बिल में?
रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली कमेटी द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट में कुल 4 भाग, 404 धाराएं और 7 अनुसूचियां शामिल हैं. कमेटी को जनता से 9.58 लाख से ज्यादा सुझाव मिले थे. इस नए कानून के तहत मध्य प्रदेश में विवाह, तलाक, भरण-पोषण, जमीन-जायदाद के उत्तराधिकार, गोद लेने और सरोगेसी जैसे पारिवारिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान नियम लागू होंगे.
खास बात यह है कि लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा और टेस्ट ट्यूब बेबी से पैदा होने वाले बच्चों को भी समान कानूनी दर्जा मिलेगा. मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा, आप और वामपंथी दलों ने कमेटी के सामने अपने सुझाव रखे, लेकिन कांग्रेस हर मुद्दे को हिंदू-मुस्लिम के चश्मे से देखती है, इसलिए वह इससे दूर रही.
MP UCC Bill : मध्य प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की दिशा में मोहन यादव सरकार ने बहुत बड़ा कदम उठाया है. रविवार को राजधानी भोपाल के बाहरी इलाके जगदीशपुर में आयोजित कैबिनेट की विशेष बैठक में यूसीसी के ड्राफ्ट बिल को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी गई है. अब इस विधेयक को 20 जुलाई से शुरू हो रहे मध्य प्रदेश विधानसभा के 5 दिवसीय मॉनसून सत्र में पेश किया जाएगा.
कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पत्रकारों से बात करते हुए इसे महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समरसता की दिशा में एक ऐतिहासिक फैसला बताया. मुख्यमंत्री ने साफ किया कि मध्य प्रदेश के आदिवासी समुदाय को इस कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है. सीएम यादव ने बताया कि ड्राफ्ट तैयार करने वाली कमेटी के सामने करीब 80 प्रतिशत मुस्लिम महिलाओं और 40 प्रतिशत मुस्लिम पुरुषों ने इस कानून का खुलकर समर्थन किया है. उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से वोट बैंक की राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रीय एकता के लिए इस बिल का समर्थन करने की अपील की.
क्या-क्या प्रावधान हैं इस बिल में?
रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली कमेटी द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट में कुल 4 भाग, 404 धाराएं और 7 अनुसूचियां शामिल हैं. कमेटी को जनता से 9.58 लाख से ज्यादा सुझाव मिले थे. इस नए कानून के तहत मध्य प्रदेश में विवाह, तलाक, भरण-पोषण, जमीन-जायदाद के उत्तराधिकार, गोद लेने और सरोगेसी जैसे पारिवारिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान नियम लागू होंगे.
खास बात यह है कि लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा और टेस्ट ट्यूब बेबी से पैदा होने वाले बच्चों को भी समान कानूनी दर्जा मिलेगा. मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा, आप और वामपंथी दलों ने कमेटी के सामने अपने सुझाव रखे, लेकिन कांग्रेस हर मुद्दे को हिंदू-मुस्लिम के चश्मे से देखती है, इसलिए वह इससे दूर रही.