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देश में कितने हैं जंतर-मंतर? किसने बनवाए और क्यों थे इतने खास; जानें इनका इतिहास

भारत में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन की हो रही है. लेकिन क्या आप जानते हैं आखिर इस जगह का निर्माण कब और क्यों किया गया था? जानिए दिल्ली के अलावा देश में और कहां-कहां है ये धरोहर.

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राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर अक्सर राजनीतिक प्रदर्शनों और आंदोलनों के लिए सुर्खियों में बना रहता है. अभी CJP और सोनम वांगचुक के प्रदर्शन के कारण यह जगह फिर चर्चा में है. लेकिन बहुत कम लोग यह बात जानते हैं कि जंतर-मंतर का निर्माण किसी प्रदर्शन स्थल के रूप में नहीं, बल्कि विज्ञान और खगोल अध्ययन के लिए किया गया था. रिपोर्ट के अनुसार, करीब 300 साल पुरानी यह ऐतिहासिक जगह आज भी काफी महत्वपूर्ण है. आइए जानते हैं इस जगह की हैरान करने वाली सच्चाई, जो अक्सर लोग नहीं जानते हैं.

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जंतर-मंतर का क्या है विज्ञान से कनेक्शन?

माना जाता है कि, जब दुनिया में आधुनिक दूरबीन और कंप्यूटर जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं, तब भी भारत में ग्रहों, तारों और समय की सटीक गणना करने के लिए विशाल वैज्ञानिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता था. इन्हीं उपकरणों से बने परिसर को आज हम जंतर-मंतर के नाम से जानते हैं. जंतर-मंतर शब्द अपने आप में विज्ञान से जुड़ा हुआ है, यानी यह नाम संस्कृत के दो शब्दों ‘यंत्र’ और ‘मंत्र’ से मिलकर बना है. यहां यंत्र का अर्थ होता है वैज्ञानिक उपकरण या मशीन, जबकि मंत्र का मतलब गणना और अध्ययन से जुड़ा है.

इस तरह जंतर-मंतर का मतलब ऐसे विशाल वैज्ञानिक उपकरणों का समूह है, जिनकी मदद से सूर्य, चांद, ग्रहों और तारों की स्थिति का अध्ययन किया जाता था. इन यंत्रों के जरिए समय की गणना, ग्रहों की चाल और खगोलीय घटनाओं की जानकारी काफी सटीक तरीके से हासिल की जाती थी.

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किसने और कितने बनाएं ऐसे जंतर-मंतर?

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में मौजूद जंतर-मंतर वेधशालाओं का निर्माण आमेर के मशहूर शासक महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने 18वीं शताब्दी में करवाया था. विज्ञान और खगोल विज्ञान में उनकी गहरी रुचि थी, इसी वजह से उन्होंने अपने जीवनकाल में देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसे जंतर-मंतर बनवाए, थे ताकि खगोलीय गणनाओं को और ज्यादा सटीक बनाया जा सके. बताया जाता है कि, महाराजा जय सिंह द्वितीय ने अपने जीवनकाल में कुल पांच जंतर-मंतर बनवाए थे. इनमें दिल्ली, जयपुर, उज्जैन, वाराणसी और मथुरा शामिल थे. हालांकि समय के साथ मथुरा का जंतर-मंतर पूरी तरह नष्ट हो गया और अब इसके मूल अवशेष भी नहीं हैं. हालांकि, अभी देश में चार ऐतिहासिक जंतर-मंतर मौजूद हैं.

जयपुर का जंतर-मंतर

राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित जंतर-मंतर देश का सबसे बड़ा और सबसे अच्छी तरह संरक्षित खगोलीय परिसर है. इसका निर्माण महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने साल 1728 से 1734 के बीच करवाया था. यहां मौजूद सम्राट यंत्र दुनिया की सबसे बड़ी पत्थर से बनी सूर्य घड़ियों में शामिल है. कहा जाता है कि, शुरुआत में यह परिसर साधारण पत्थर और चूने से बनाया गया था, लेकिन बाद में इसे बेहतर रूप दिया गया. अपनी अनोखी डिजाइन और वैज्ञानिक महत्व के कारण जयपुर के जंतर-मंतर को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में भी शामिल किया गया है.

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उज्जैन और वाराणसी के जंतर-मंतर

महाराजा जय सिंह द्वितीय ने उज्जैन और वाराणसी में भी जंतर-मंतर बनवाए थे. प्राचीन समय से उज्जैन को भारत में समय गणना और खगोल विज्ञान का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता था. इसलिए यहां बनाई गई वेधशाला का उद्देश्य ग्रहों और समय की गति का अध्ययन करना था.

वहीं, वाराणसी में गंगा नदी के किनारे करीब 1737 के आसपास जंतर-मंतर का निर्माण कराया गया. यहां सूर्य की स्थिति, ग्रहों की चाल और समय चक्र का अध्ययन किया जाता था. इन दोनों वेधशालाओं ने उस दौर में वैज्ञानिक शोध को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

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दिल्ली का जंतर-मंतर

अब बात करते हैं, सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले दिल्ली के जंतर-मंतर की. इसे भी महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा साल 1724 में निर्माण कराया गया था. यहां मौजूद विशाल यंत्रों की मदद से खगोलशास्त्री सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की गतिविधियों का अध्ययन करते थे. कहा जाता है कि यह सबसे पहली वेधशाला है. हालांकि, समय के साथ इसका वैज्ञानिक उपयोग कम हुआ, लेकिन यह स्थान भारत की प्राचीन वैज्ञानिक उपलब्धियों का शानदार प्रतीक बन गया.

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First published on: Jul 18, 2026 07:11 PM

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Azhar Naim

अज़हर नईम एक डिजिटल पत्रकार हैं और उन्हें न्यूज़ और ऑनलाइन कंटेंट लिखने का अच्छा अनुभव है. वर्तमान में वह News24 Bag Convergence में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं, जहां वह मुख्य रूप से न्यूज, ट्रेंडिंग, हाइपर-लोकल, वायरल, ऑटो, लाइफस्टाइल और हेल्थ बीट से जुड़ी खबरों पर स्टोरीज तैयार करते हैं. वह ट्रेनी के रूप में ट्रेंडिंग, वायरल, जनरल नॉलेज, टेक्नोलॉजी, इंटरनेशनल और लाइफस्टाइल जैसे विभिन्न विषयों पर डिजिटल कंटेंट लिखते आए हैं. अज़हर ने 2024 में श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान और उसके बाद उन्हें कई मीडिया संस्थानों में काम करने का अनुभव मिला, जिससे उन्हें न्यूज रिपोर्टिंग, डिजिटल स्टोरीटेलिंग और पाठकों को ध्यान में रखकर कंटेंट बनाने की अच्छी समझ हासिल की. 1 साल से ज्यादा के अनुभव में अज़हर का मुख्य काम है डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स को समझना, SEO-फ्रेंडली कंटेंट लिखना और पाठकों से जुड़ी स्टोरीज तैयार करना.

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अज़हर नईम एक डिजिटल पत्रकार हैं और उन्हें न्यूज़ और ऑनलाइन कंटेंट लिखने का अच्छा अनुभव है. वर्तमान में वह News24 Bag Convergence में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं, जहां वह मुख्य रूप से न्यूज, ट्रेंडिंग, हाइपर-लोकल, वायरल, ऑटो, लाइफस्टाइल और हेल्थ बीट से जुड़ी खबरों पर स्टोरीज तैयार करते हैं. वह ट्रेनी के रूप में ट्रेंडिंग, वायरल, जनरल नॉलेज, टेक्नोलॉजी, इंटरनेशनल और लाइफस्टाइल जैसे विभिन्न विषयों पर डिजिटल कंटेंट लिखते आए हैं. अज़हर ने 2024 में श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान और उसके बाद उन्हें कई मीडिया संस्थानों में काम करने का अनुभव मिला, जिससे उन्हें न्यूज रिपोर्टिंग, डिजिटल स्टोरीटेलिंग और पाठकों को ध्यान में रखकर कंटेंट बनाने की अच्छी समझ हासिल की. 1 साल से ज्यादा के अनुभव में अज़हर का मुख्य काम है डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स को समझना, SEO-फ्रेंडली कंटेंट लिखना और पाठकों से जुड़ी स्टोरीज तैयार करना.

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