झारखंड में भूख हड़ताल पर बैठे 5 और प्रदर्शनकारी, CM सोरेन का बातचीत का ऑफर, जानें क्या है छात्र आंदोलन की मांगें

झारखंड का छात्र आंदोलन और तेज हो गया है, क्योंकि 5 और प्रदर्शनकारी अनशन पर बैठ गए हैं. वहीं एक अनशनकारी ने चौथे दिन पानी पिया, क्योंकि उनकी तबियत खराब होने लगी थी. इधर प्रदेश के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आंदोलनकारी छात्रों को बातचीत करने का ऑफर दिया है.

Jharkhand Protest

Credit- PTI

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झारखंड के छात्र आंदोलन में 5 और प्रदर्शनकारियों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है. भर्ती परीक्षा में गड़बड़ियों के मामले में 5 और लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. वहीं मामले में अब तक कुल 19 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं. इधर प्रदेश के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पेपर लीक के मुद्दे को राष्ट्रीय समस्या बताते हुए अनशनकारियों को बातचीत करने का प्रस्ताव दिया है. मशहूर सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्र नाथ महतो से बातचीत की और उनसे पानी पीने की अपील की, जिसे महतो ने माना और 4 दिन के अनशन के बाद पानी पिया.

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अनशन पर बैठे लोगों की संख्या 6 हुई

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) सुधार मंच के बैनर तले 5 और लोगों ने रात को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी. इसके साथ ही जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनशन पर बैठे लोगों की संख्या बढ़कर 6 हो गई है. झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के सदस्य देवेंद्र नाथ महतो 4 दिन से इसी जगह पर अनशन कर रहे हैं. नीट पेपर लीक मामले को लेकर 26 दिन का अनशन कर चुके वांगचुक ने महतो को सलाह दी कि उनकी ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर लगातार गिर रहा है, इसलिए पानी पिएं और महतो ने पानी पी लिया.

जांच CBI या पूर्व जज से कराने की मांग

बता दें कि 25 जुलाई से 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा रद्द करने, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग में सुधार करने की मांग को लेकर अनशन जारी है. प्रदर्शनकारी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से या राज्य से बाहर के हाई कोर्ट के पूर्व जजों के स्वतंत्र पैनल से कराने की भी मांग कर रहे हैं. JPSC-JSSC सुधार मंच के प्रवक्ता जीवन कुमार ने कहा कि हमारी मांगों के समर्थन में मंगलवार रात से 2 महिलाओं समेत 5 साथी भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं. सरकार उनकी मांगें नहीं मान रही, इसलिए अनशन के लिए मजबूर होना पड़ा.

सरकार का गतिरोध खत्म करने का प्रयास

वहीं एक अन्य प्रदर्शनकारी हबीबा ने कहा कि मुख्यमंत्री हमारे अभिभावक जैसे हैं. जब बच्चे भूखे होते हैं तो अभिभावकों को भी पीड़ा होती है. इसलिए हमें उम्मीद है कि वह हमारी शिकायतों और मांगों पर ध्यान देंगे. सरकार संवेदनशील हो सकती है, लेकिन हमें आश्वासन नहीं, कार्रवाई और न्याय चाहिए. जैसे-जैसे आंदोलन तेज हुआ, राज्य प्रशासन ने बातचीत करके गतिरोध खत्म करने की कोशिशें शुरू की. रांची के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (कानून व्यवस्था) धनंजय कुमार ने प्रदर्शन स्थल का दौरा किया और छात्रों के 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री आवास पर बातचीत का न्योता दिया.

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सरकार से बातचीत के लाइव प्रसारण की मांग

सरकार के बातचीत के ऑफर पर छात्र नेता रवींद्र पासवान ने कहा कि बातचीत सबके सामने होनी चाहिए, बंद कमरे में बैठक की बजाय इसका सीधा प्रसारण किया जाए. एक अन्य छात्र नेता प्रेम सागर ने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री ‘सरकार आपके द्वार’ की पहल को बढ़ावा देते हैं, इसलिए हमारी मांग है कि मुख्यमंत्री प्रदर्शनस्थल पर आएं. इस बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बुधवार को कहा कि भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होने का मामला सिर्फ राज्य का नहीं, बल्कि यह एक राष्ट्रीय समस्या है. सरकार छात्रों की समस्याओं को हल करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन ताली दोनों ओर से बजनी चाहिए.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

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खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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