'यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस' की तरफ से विभिन्न मांगों को लेकर बुलाई गई देशव्यापी हड़ताल में कर्मचारियों के शामिल होने के कारण शुक्रवार को झारखंड में, खासतौर पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहीं. हालांकि, राज्य में निजी बैंकों की सेवाएं हड़ताल से प्रभावित नहीं हुईं. बैंक ऑफ इंडिया एम्प्लॉइज यूनियन के झारखंड क्षेत्र के उप महासचिव उमेश दास ने कहा कि राज्य में राष्ट्रीयकृत बैंकों, भारतीय स्टेट बैंक और ग्रामीण बैंकों की शाखाओं में नकदी जमा और निकासी, चेक निपटान तथा प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हुआ. उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की प्रमुख मांग सभी शनिवार को अवकाश घोषित करना और पांच दिन का कार्यसप्ताह लागू करना है. यह मांग मार्च, 2024 में भारतीय बैंक संघ (आईबीए) के साथ हुए 12वें द्विपक्षीय समझौते में कथित तौर पर स्वीकार की गई थी, लेकिन इसके लिए सरकार की अधिसूचना अभी जारी नहीं हुई है.
कितने लोग हड़ताल पर?
दास ने कहा कि शीर्ष स्तर के कुछ अधिकारियों को छोड़कर लगभग सभी कर्मचारी हड़ताल पर रहे. उन्होंने कहा कि कर्मचारी प्रदर्शन से जुड़े प्रोत्साहन (पीएलआई) नीति में एकरूपता, पेंशन में संशोधन एवं सुधार, सभी पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते की एक समान गणना तथा राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) में जाने का विकल्प देने की भी मांग कर रहे हैं. स्टेट बैंक स्टाफ एसोसिएशन की सदस्य नेहा श्रीवास्तव ने कहा कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो कर्मचारी 28 सितंबर से 30 सितंबर तक तीन दिन की हड़ताल करेंगे और 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे.
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