JNU Professor Faces Sexual Harassment Allegations: जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के 10 स्टूडेंट्स ने एक प्रोफेसर के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज कराई हैं, जिसके बाद यूनिवर्सिटी की इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी (ICC) ने जांच शुरू कर दी है. ये शिकायतें मई 2026 में दर्ज कराई गई थीं, जिसके बाद आईसीसी ने औपचारिक कार्यवाही शुरू की. ये कमिटी विश्वविद्यालय के अंदर यौन उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतों की जांच करने के लिए जिम्मेदार है और अभी इन आरोपों की जांच कर रही है. मीडिया के सवालों के बावजूद जेएनयू प्रशासन ने इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है.
पुराने कार्रवाई पर फिर से गया ध्यान
ये ताजा मामला जेएनयू के एक सीनियर फैकल्टी मेंबर से जुड़े यौन उत्पीड़न के पिछले मामले की बैकड्रॉप में सामने आया है. पिछले साल अप्रैल में, यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल ने 4 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया था, जिनमें यौन उत्पीड़न के आरोपी एक प्रोफेसर और भ्रष्टाचार के मामले से जुड़े 3 अन्य कर्मचारी शामिल थे.
कौन है आरोपी प्रोफेसर?
बर्खास्त प्रोफेसर की पहचान स्वर्ण सिंह के तौर पर हुई, जो जेएनयू के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में पढ़ाते थे. उन्हें जापानी दूतावास की एक अधिकारी के यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद सेवा से हटा दिया गया था; ये अधिकारी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों के साथ एकेडमिक इवेंट्स पर काम करती थीं.
सबूत मिलने का दावा
उस मामले की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी के मुताबिक, शिकायतकर्ता प्रोफेसर के साथ अपनी आखिरी मुलाकात के बाद यूनिवर्सिटी पहुंची थीं. अधिकारी ने बताया कि जांच में आरोपों का सपोर्ट करने वाले ठोस सबूत मिले और ये भी पता चला कि उनके खिलाफ पहले भी शिकायतें की गई थीं.
जांच के नतीजों का इंतजार
नाम न बताने की शर्त पर एक सीनियर फैकल्टी मेंबर ने एचटी को कहा कि 2024 की जांच में डिटेल्ड इंवेस्टिगेशन शामिल थी, जिसमें कमिटी के किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले शिकायतकर्ता और आरोपी दोनों को गवाह पेश करने का मौका दिया गया था. 10 स्टूडेंट्स की तरफ दर्ज कराई गई शिकायतों पर आईसीसी की मौजूदा जांच अभी चल रही है और अभी तक कोई आधिकारिक नतीजों का ऐलान नहीं किया गया है.
BNS में यौन उत्पीड़न की सजा
भारत में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75 यौन उत्पीड़न से जुड़ी है. अवांछित शारीरिक संपर्क, यौन संबंधों की मांग या अश्लील सामग्री दिखाने जैसी हरकत पर 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है. वहीं, यौन इशारे वाले कमेंट करने पर एक साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है.