दिवाली पर दिल्ली में जिन ग्रीन पटाखों को SC ने दी मंजूरी, वो कितने हैं सेफ?
Delhi Diwali Green Firecrackers: सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों को लेकर मंजूरी दे दी है, लेकिन सवाल उठता है कि आखिर ये पटाखे पारंपरिक पटाखों से कैसे अलग है और कितने सुरक्षित है. आइए जानते हैं इस स्टोरी में.
इस दिवाली दिल्ली में चलेंगे ग्रीन पटाखे, जानें कितने सेफ हैं ये? (Image: Pexels)
दिवाली का त्योहार जैसे-जैसे करीब आता है लोग तैयारियों में जुट जाते हैं, ताकि इस साल का त्योहार पिछले साल से ज्यादा अच्छी तरीके से मनाया जा सके. आमतौर पर भारत के कई राज्यों में इस दिन को पटाखों के साथ खास बनाया जाता है, लेकिन दिल्ली-NCR में रहने वालों के लिए पटाखों का इस्तेमाल आसान नहीं होता है, क्योंकि इस पर पाबंदी लागू है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में पटाखे फोड़ने को लेकर मंजूरी दे दी है, लेकिन ये पटाखे तय मानकों और फॉर्मूलेशन का पालन करने वाले खास ‘नेक्स्ट-जेनरेशन जॉइंटेड ग्रीन पटाखों’ बिक्री और निर्माण को लेकर है.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पटाखा की बिक्री और निर्माण में तय फॉर्मूलेशन, उत्सर्जन, आवाज और सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा. यानी कि ऐसे ही पटाखे अब बाजार में उतरेंगे, जो प्रदूषण के खतरे को न बढ़ाए और लोगों को हानि भी न पहुंचा सके. सुप्रीम कोर्ट के सामने केंद्र सरकार ने बताया कि सीएसआईआर-नीरी की तरफ से तैयार मानकों के मुताबिक, बनाए गए जॉइंटेड पटाखों को सीमित और शर्तों के साथ अनुमति दी जा सकती है.
ग्रीन पटाखे कैसे अलग है पुराने लड़ी वाले पटाखों से?
जानकारी के अनुसार, पुराने लड़ी वाले पटाखों यानी जिसमें एक साथ कई पटाखे तेजी से जोरदार आवाज और धुएं के साथ फूटते थे, उसके सामने ये नया ग्रीन पटाखा काफी अलग होगा. पुराने जॉइंटेड पटाखों में एक सेकेंड के अंदर 25 अलग-अलग ब्रेड फटते थे, लेकिन नए वर्जन में इसे घटाकर पांच ब्रेड प्रति सेकंड किया गया है. मतलब साफ है कि इस नए पटाखों से धुआं और शोर दोनों कम से कम हो सकेगा. इतना ही नहीं, रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीन पटाखों में कम मात्रा में बेरियम साल्ट या नाइट्रेट और दूसरे ऑक्सीडाइजर वाले नए फॉर्मूलेशन से पुराने वाले पटाखों की तुलना में पीएम10 और पीएम 2.5 के उत्सर्जन में 45 से 60 फीसदी तक कमी देखी गई है. लेकिन अभी इसपर रिसर्च जारी है कि दिल्ली, भोपाल आदि अन्य राज्यों के एयर क्वालिटी पर असर कैसा पड़ेता है, ताकि कमियों पर काम किया जाए. जानकारी के अनुसार, इस रिसर्च की रिपोर्ट 15 अक्टूबर तक आ सकती है.
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क्या आपकी सेहत पर असर नहीं डालेंगे ये पटाखे?
अगर आप सोच रहे हैं कि ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल से आपकी सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा और प्रदूषण भी नहीं होगा, तो ये जान लीजिए कि आप पूरी तरह सही नहीं है. बता दें कि ग्रीन पटाखों का मकसद पारंपरिक पटाखों की तुलना में पार्टिकुलेट और गैसीय उत्सर्जन को कम करना है.
CSIR-NEERI ऐसे पटाखों के लिए अलग-अलग फॉर्मूलेशन तैयार किए हैं, जिनमें रसायनों की मात्रा और संरचना, पुराने वाले पटाखों से अलग है. इसका मतलब ये नहीं है कि आप इस मंजूरी के बाद दिनभर पटाखे फोड़ सकेगे, कोर्ट ने साफ किया है कि पटाखों पर पूरी तरह बैन से लोगों की भावनाएं प्रभावित होंगी, लेकिन पूरे दिन पटाखे चलाने से बुजुर्गों, बीमार लोगों और बच्चों समेत सभी पर असर पड़ेगा. इसलिए पटाखों को लेकर तय समय को लेकर अलग आदेश दिया जाएगा.