Delhi Police Parliament March: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा 20 जुलाई 2026प्रस्तावित 'संसद मार्च' को लेकर दिल्ली पुलिस ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है. दिल्ली पुलिस ने इस तरह के किसी भी मार्च या जुलूस के लिए न तो कोई अनुमति दी है और न ही इसके लिए कोई आधिकारिक आवेदन किया गया था. नई दिल्ली जिले में धारा 163 BNSS लागू होने के कारण जंतर-मंतर के निर्धारित दायरे के बाहर किसी भी प्रकार के सार्वजनिक एकत्रीकरण या जुलूस पर पूर्ण प्रतिबंध है.
चूंकि 20 जुलाई से ही संसद का महत्वपूर्ण सत्र शुरू हो रहा है, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को अत्यधिक कड़ा कर दिया गया है. पुलिस ने चेतावनी दी है कि प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लेकर कानूनी धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा.
धारा 144 CrPC बनाम धारा 163 BNSS
पुराने कानून (CrPC) की धारा 144 की जगह अब BNSS की धारा 163 ने ले ली है. इसके तहत जिला मजिस्ट्रेट या अधिकृत पुलिस अधिकारी को लोक शांति बनाए रखने के लिए किसी भी संभावित खतरे या उपद्रव को रोकने हेतु निषेधाज्ञा जारी करने का तात्कालिक अधिकार होता है. CJP के मार्च को इसी धारा के तहत प्रतिबंधित किया गया है ताकि संसद के रणनीतिक मार्गों पर यातायात और शांति व्यवस्था बाधित न हो.
धारा 223 BNS के तहत कड़ी सजा का प्रावधान
यदि कोई प्रदर्शनकारी पुलिस की बैरिकेडिंग को तोड़ने या प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 लागू होगी. यह धारा किसी लोक सेवक द्वारा कानूनी रूप से जारी किए गए आदेश की अवज्ञा करने से संबंधित है. इसके तहत दोषी पाए जाने पर साधारण कारावास, आर्थिक दंड या दोनों का प्रावधान है, जो प्रदर्शनकारियों के करियर और कानूनी रिकॉर्ड को प्रभावित कर सकता है.
दिल्ली पुलिस की एडवाइजरी
दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक तौर पर नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी भ्रामक सोशल मीडिया पोस्ट या अनधिकृत भीड़ का हिस्सा न बनें. 20 जुलाई को नई दिल्ली और मध्य दिल्ली की ओर आने वाले प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा जांच के कारण यातायात धीमा रह सकता है. यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे समय से पहले निकलें और वैकल्पिक मार्गों या दिल्ली मेट्रो का उपयोग करें.
Delhi Police Parliament March: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा 20 जुलाई 2026प्रस्तावित ‘संसद मार्च’ को लेकर दिल्ली पुलिस ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है. दिल्ली पुलिस ने इस तरह के किसी भी मार्च या जुलूस के लिए न तो कोई अनुमति दी है और न ही इसके लिए कोई आधिकारिक आवेदन किया गया था. नई दिल्ली जिले में धारा 163 BNSS लागू होने के कारण जंतर-मंतर के निर्धारित दायरे के बाहर किसी भी प्रकार के सार्वजनिक एकत्रीकरण या जुलूस पर पूर्ण प्रतिबंध है.
चूंकि 20 जुलाई से ही संसद का महत्वपूर्ण सत्र शुरू हो रहा है, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को अत्यधिक कड़ा कर दिया गया है. पुलिस ने चेतावनी दी है कि प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लेकर कानूनी धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा.
धारा 144 CrPC बनाम धारा 163 BNSS
पुराने कानून (CrPC) की धारा 144 की जगह अब BNSS की धारा 163 ने ले ली है. इसके तहत जिला मजिस्ट्रेट या अधिकृत पुलिस अधिकारी को लोक शांति बनाए रखने के लिए किसी भी संभावित खतरे या उपद्रव को रोकने हेतु निषेधाज्ञा जारी करने का तात्कालिक अधिकार होता है. CJP के मार्च को इसी धारा के तहत प्रतिबंधित किया गया है ताकि संसद के रणनीतिक मार्गों पर यातायात और शांति व्यवस्था बाधित न हो.
धारा 223 BNS के तहत कड़ी सजा का प्रावधान
यदि कोई प्रदर्शनकारी पुलिस की बैरिकेडिंग को तोड़ने या प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 लागू होगी. यह धारा किसी लोक सेवक द्वारा कानूनी रूप से जारी किए गए आदेश की अवज्ञा करने से संबंधित है. इसके तहत दोषी पाए जाने पर साधारण कारावास, आर्थिक दंड या दोनों का प्रावधान है, जो प्रदर्शनकारियों के करियर और कानूनी रिकॉर्ड को प्रभावित कर सकता है.
दिल्ली पुलिस की एडवाइजरी
दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक तौर पर नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी भ्रामक सोशल मीडिया पोस्ट या अनधिकृत भीड़ का हिस्सा न बनें. 20 जुलाई को नई दिल्ली और मध्य दिल्ली की ओर आने वाले प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा जांच के कारण यातायात धीमा रह सकता है. यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे समय से पहले निकलें और वैकल्पिक मार्गों या दिल्ली मेट्रो का उपयोग करें.