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बालोद: मुख्यमंत्री का सपना साकार, समूह जल प्रदाय योजना गांवों के लिए साबित हो रहा है जीवन दायिनी

बालोद: राज्य शासन की महत्वाकांक्षी समूह जल प्रदाय योजना के अंतर्गत मिल रहे शुद्ध पेयजल जिले के डौण्डीलोहारा विकासखण्ड के देवरी द सहित आसपास के 07 गांव के ग्रामीणों के लिए मुश्किल वक्त का सहारा बनकर जीवनदायिनी साबित हो रहा है। यह सर्व विदित है कि व्यक्ति के लिए जल अत्यंत आवश्यक होने के साथ-साथ […]

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बालोद: राज्य शासन की महत्वाकांक्षी समूह जल प्रदाय योजना के अंतर्गत मिल रहे शुद्ध पेयजल जिले के डौण्डीलोहारा विकासखण्ड के देवरी द सहित आसपास के 07 गांव के ग्रामीणों के लिए मुश्किल वक्त का सहारा बनकर जीवनदायिनी साबित हो रहा है। यह सर्व विदित है कि व्यक्ति के लिए जल अत्यंत आवश्यक होने के साथ-साथ जल ही जीवन है। पानी की कमी तथा खास करके शुद्ध पेयजल की कमी से उत्पन्न समस्या का बयां इस समस्या से जुझने वाले लोग भली-भांति कर सकते हैं। ऐसे ही विकराल समस्या से आस से कुछ समय पहले तक जुझ रहे डौण्डीलोहारा विकासखण्ड के ग्राम देवरी द, देवसरा, खुरसुनी, गोड़ेला, मोहंदीपाट, चिरचार, बम्हनी सहित 07 गांवों के लोगों के लिए यह योजना किसी संजीवनी से कम नहीं है।

आज से 06 माह पूर्व इन गांवों में भूमिगत जलस्तर बहुत ही कम होने तथा सुखा ग्रस्त क्षेत्र होने से ग्रामीणों को पानी के विकट समस्या से जुझना पड़ता था। जिसके कारण उनकी दैनिक जीवन उथल पुथल हो गई थी। आज इस योजना के फलस्वरूप उनके घरों में पर्याप्त मात्रा में पानी पहुंचने से समूह जल योजना उनके जीवन के लिए एक वरदान बन गया है।

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इस योजना के फलस्वरूप इन गांवों में पर्याप्त मात्रा में पेयजल एवं निस्तारी हेतु ग्रामीणों की बहुप्रतिक्षित मांगे पूरी है। उनके प्रमुख समस्या का निराकरण होने से ग्रामीणों में हर्ष व्याप्त है। उन्होंने समूह नल जल योजना के माध्यम से उनके प्रमुख समस्याओं का निराकरण के लिए संजीवनी प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं राज्य शासन को हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया है।

इस योजना से 2207 परिवार के 8956 लोगों को प्रतिदिन शुद्ध पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। योजना अंतर्गत खरखरा नदी पर स्थित बुची भरदा एनीकट के पानी को जल शुद्धीकरण संयंत्र के माध्यम से शुद्ध कर पेयजल आपूर्ति की जा रही है। देवरी द निवासी हितग्राही श्रीमती सुमित्रा साहू ने बताया कि पानी टंकी के स्थापित होने से अब ग्रामीणों को पेयजल की समस्या से मुक्ति मिली हैै, उन्हें अब पर्याप्त पेयजल की आपूर्ति हो रही है। उन्होंने बताया कि पहले वे कोसों दूर कुआं हैंडपंप या नदी से पानी लाया करते थे, नहाने व जानवर को नहलाने के लिए तालाब डबरी आदि का उपयोग किया करते थे। बारिश के दिनों में हैंडपंप से मटमैला पानी व ग्रीष्म काल में भूजल स्तर कम होने से वृहद जल समस्या का सामना करना पड़ता था लेकिन अब स्वयं के आंगन में पर्याप्त जल मिलने से समय की बचत भी हो रही है।

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First published on: May 18, 2023 10:18 AM

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