आंध्र प्रदेश पुलिस ने सोमवार सुबह बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी सुनील कुमार नायक के आवास पर छापेमारी की. इस दौरान बिहार पुलिस के अधिकारी भी मौजूद रहे. सुनील कुमार नायक वर्तमान में बिहार में आईजी (फायर सर्विसेज) के पद पर तैनात हैं. यह कार्रवाई आंध्र प्रदेश विधानसभा के उपसभापति रघु राम कृष्ण राजू पर कथित जानलेवा हमले और हिरासत में प्रताड़ना के मामले से जुड़ी बताई जा रही है. सूत्रों के अनुसार, इस मामले में नायक की भूमिका की जांच की जा रही है और उनसे पूछताछ की संभावना है. गिरफ्तारी को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं, हालांकि आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
कौन हैं बिहार कैडर के IPS सुनील नायक
सुनील कुमार नायक बिहार कैडर के IPS अधिकारी हैं. नायक 2019 में प्रतिनियुक्ति पर आंध्र प्रदेश गए थे और डीआईजी, सीआईडी के रूप में कार्यरत रहे. वर्ष 2023 में वे वापस बिहार लौट आए और वर्तमान में आईजी (फायर सर्विसेज) के पद पर कार्य कर रहे हैं.
IPS सुनील नायक के आवास पर छापा क्यों पड़ा?
आंध्र प्रदेश पुलिस की एक टीम ने पटना (बिहार) स्थित उनके आवास पर छापेमारी की. आंध्र प्रदेश विधानसभा के वर्तमान उपसभापति और 2021 में तत्कालीन सांसद रघु राम कृष्ण राजू ने आरोप लगाया था कि 2021 में जब उन्हें राजद्रोह के मामले में गिरफ्तार किया गया था, तब पुलिस हिरासत में उन्हें बेरहमी से पीटा गया और प्रताड़ित किया गया. उस समय सुनील नायक आंध्र प्रदेश में डीआईजी, सीआईडी के पद पर कार्यरत थे और इस मामले की जांच प्रक्रिया का हिस्सा थे.
पूर्व मुख्यमंत्री और IPS सुनील नायक पर दर्ज हुआ था केस
जुलाई 2024 में टीडीपी (TDP) सरकार आने के बाद राजू की शिकायत पर पुलिस ने तत्कालीन मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी सहित कई पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. एफआईआर में तत्कालीन सीआईडी प्रमुख, खुफिया प्रमुख और अन्य अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं.
गिरफ्तारी की तलवार क्यों लटकी है?
जांच अधिकारी प्रकाशम जिले के पुलिस अधीक्षक ए.आर. दामोदर ने सुनील नायक को दो बार पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया था, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए. छापेमारी का उद्देश्य पूछताछ करना और मामले से जुड़े सबूत जुटाना है. यदि वे जांच में सहयोग नहीं करते हैं तो पुलिस गिरफ्तारी की दिशा में आगे बढ़ सकती है. यदि वे आंध्र प्रदेश पुलिस के सामने पेश होकर अपना पक्ष रखते हैं और जांच में सहयोग करते हैं, तो पुलिस गिरफ्तारी के बजाय पूछताछ तक सीमित रह सकती है.
आंध्र प्रदेश पुलिस ने सोमवार सुबह बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी सुनील कुमार नायक के आवास पर छापेमारी की. इस दौरान बिहार पुलिस के अधिकारी भी मौजूद रहे. सुनील कुमार नायक वर्तमान में बिहार में आईजी (फायर सर्विसेज) के पद पर तैनात हैं. यह कार्रवाई आंध्र प्रदेश विधानसभा के उपसभापति रघु राम कृष्ण राजू पर कथित जानलेवा हमले और हिरासत में प्रताड़ना के मामले से जुड़ी बताई जा रही है. सूत्रों के अनुसार, इस मामले में नायक की भूमिका की जांच की जा रही है और उनसे पूछताछ की संभावना है. गिरफ्तारी को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं, हालांकि आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
कौन हैं बिहार कैडर के IPS सुनील नायक
सुनील कुमार नायक बिहार कैडर के IPS अधिकारी हैं. नायक 2019 में प्रतिनियुक्ति पर आंध्र प्रदेश गए थे और डीआईजी, सीआईडी के रूप में कार्यरत रहे. वर्ष 2023 में वे वापस बिहार लौट आए और वर्तमान में आईजी (फायर सर्विसेज) के पद पर कार्य कर रहे हैं.
IPS सुनील नायक के आवास पर छापा क्यों पड़ा?
आंध्र प्रदेश पुलिस की एक टीम ने पटना (बिहार) स्थित उनके आवास पर छापेमारी की. आंध्र प्रदेश विधानसभा के वर्तमान उपसभापति और 2021 में तत्कालीन सांसद रघु राम कृष्ण राजू ने आरोप लगाया था कि 2021 में जब उन्हें राजद्रोह के मामले में गिरफ्तार किया गया था, तब पुलिस हिरासत में उन्हें बेरहमी से पीटा गया और प्रताड़ित किया गया. उस समय सुनील नायक आंध्र प्रदेश में डीआईजी, सीआईडी के पद पर कार्यरत थे और इस मामले की जांच प्रक्रिया का हिस्सा थे.
पूर्व मुख्यमंत्री और IPS सुनील नायक पर दर्ज हुआ था केस
जुलाई 2024 में टीडीपी (TDP) सरकार आने के बाद राजू की शिकायत पर पुलिस ने तत्कालीन मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी सहित कई पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. एफआईआर में तत्कालीन सीआईडी प्रमुख, खुफिया प्रमुख और अन्य अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं.
गिरफ्तारी की तलवार क्यों लटकी है?
जांच अधिकारी प्रकाशम जिले के पुलिस अधीक्षक ए.आर. दामोदर ने सुनील नायक को दो बार पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया था, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए. छापेमारी का उद्देश्य पूछताछ करना और मामले से जुड़े सबूत जुटाना है. यदि वे जांच में सहयोग नहीं करते हैं तो पुलिस गिरफ्तारी की दिशा में आगे बढ़ सकती है. यदि वे आंध्र प्रदेश पुलिस के सामने पेश होकर अपना पक्ष रखते हैं और जांच में सहयोग करते हैं, तो पुलिस गिरफ्तारी के बजाय पूछताछ तक सीमित रह सकती है.