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बिहार में नीतीश कब देंगे CM पद से इस्तीफा? संसद सत्र में होंगे शामिल, BJP नेतृत्व का रास्ता साफ

बिहार की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है. लंबे समय से चल रही अटकलों पर अब विराम लगता दिख रहा है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी राजनीति का केंद्र अब पटना से बदलकर दिल्ली करने जा रहे हैं. यह महज एक नेता का स्थान परिवर्तन नहीं, बल्कि बिहार की सत्ता में एक बड़े युग के अंत और नए अध्याय की शुरुआत का संकेत है.

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Written By: Kumar Gaurav Updated: Apr 4, 2026 12:02

बिहार की राजनीति में जारी उथल-पुथल के बीच अब तस्वीर काफी हद तक साफ होती नजर आ रही है. नीतीश कुमार अपनी राजनीतिक पारी का फोकस पटना से दिल्ली की ओर शिफ्ट करते दिख रहे हैं. यह बदलाव सिर्फ पद परिवर्तन नहीं, बल्कि राज्य और केंद्र, दोनों स्तरों पर सत्ता संतुलन में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है. जानकारी के मुताबिक, नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ लेंगे. इसके बाद वे 16 से 18 अप्रैल तक प्रस्तावित संसद के सत्र में हिस्सा लेंगे. इस सत्र में महिला आरक्षण से जुड़े प्रावधानों में बदलाव और लोकसभा /विधानमंडलो में सीटों की संख्या बढ़ाने जैसे अहम विधेयकों पर चर्चा होगी और उसे पास किया जाएगा . ऐसे में नीतीश कुमार की मौजूदगी को राष्ट्रीय राजनीति में उनकी औपचारिक सक्रिय भूमिका की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है.

13 अप्रैल को इस्तीफा दे सकते हैं नीतीश

इसी क्रम में 13 अप्रैल को उनके मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की भी चर्चा तेज है. सूत्रों के अनुसार, राज्यसभा की शपथ लेने के बाद वे पटना लौटकर राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप देंगे . हाल ही में बिहार विधान परिषद की सदस्यता छोड़ना भी इसी रणनीतिक बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है. नीतीश कुमार के इस कदम के साथ ही बिहार में ‘पावर शिफ्ट’ लगभग तय माना जा रहा है. सत्ता की कमान अब भारतीय जनता पार्टी के हाथों में जाने की संभावना है. मुख्यमंत्री पद के लिए सम्राट चौधरी का नाम सबसे प्रमुख दावेदार के रूप में सामने आ रहा है. भाजपा इस बार गठबंधन में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने की रणनीति पर काम कर रही है.

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बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव

हालांकि, जनता दल (यूनाइटेड) पूरी तरह हाशिए पर जाने के मूड में नहीं है. सत्ता साझेदारी के तहत जेडीयू डिप्टी सीएम और विधानसभा स्पीकर जैसे अहम पदों पर दावा बनाए रखना चाहती है, ताकि सरकार में उसका प्रभाव कायम रहे. कुल मिलाकर, 13 से 16 अप्रैल के बीच बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. एक ओर नीतीश कुमार राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते नजर आएंगे, तो दूसरी ओर राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली नई सरकार का रास्ता साफ होता दिख रहा है. यह घटनाक्रम बिहार के राजनीतिक इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत साबित हो सकता है.

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First published on: Apr 04, 2026 12:02 PM

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