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Tej Pratap Yadav: बिहार में विधानसभा चुनाव का ऐलान संसद के मानसून सत्र के बाद कभी भी हो सकता है। इस बीच बिहार में फिलहाल एसआईआर को लेकर गहमागहमी का माहौल हैं। विपक्ष को कल सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा जब कोर्ट ने एसआईआर की प्रकिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इस मामले में अब अगली सुनवाई 28 जुलाई को होनी है। यानी एसआईआर की प्रकिया पूरी होने के बाद। इधर तेजप्रताप यादव भी चुनाव को लेकर तैयारियों में जुटे हैं। उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र महुआ का दौरा किया। इस दौरान तेजप्रताप की गाड़ी से आरजेडी का झंडा गायब था। उनकी गाड़ी पर पीले रंग का नया झंडा था, ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या तेज प्रताप यादव बगावत पर उतर आए हैं?
तेज प्रताप यादव लालू यादव के बड़े बेटे हैं। अनुष्का यादव के साथ नजदीकियां सामने आने के बाद उनके पिता लालू यादव ने उनको पार्टी से निकाल दिया। ऐसे में अब काफी समय तक शांत रहने के बाद उन्होंने अपनी विधानसभा महुआ का दौरा किया लेकिन गाड़ी पर झंडा बदला हुआ था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या तेजप्रताप नई पार्टी का ऐलान करने वाले हैं? पहले भी उनके द्वारा ऐसी कोशिशें की गई हैं लेकिन उसमें वे ज्यादा कामयाब नहीं हुए।
तेज प्रताप यादव को पहली बार आरजेडी से निष्कासित किया गया हैं। इससे पहले वे स्वयं कई बार पिता और परिवार से नाराज होकर पार्टी छोड़कर गए और नए-नए मोर्चे बनाए। जब बात नहीं बनी खुद ही वापस भी लौट आए। इस बार परिस्थितियां पूरी तरह अलग है। ऐसे में पहले के बनाए संगठन आज किस भूमिका में है?
1.2018 में तेज प्रताप यादव ने धर्म समर्थक सेवक संघ नामक युवा संगठन बनाया। इसमें डीएसएस को धर्मनिरपेक्ष संगठन के तौर पर दिखाया गया है। जो हर धर्म का सम्मान करता है। डीएसएस के बाद उन्होंने अप्रैल 2019 में लालू-राबड़ी मोर्चा नाम संगठन बनाया जोकि ज्यादा दिन तक नहीं चला। पार्टी मे नेतृत्व को लेकर उन्होंने एक प्रयास किया लेकिन पिता लालू यादव के सामने उनकी एक नहीं चली।
2.तेज प्रताप यादव ने 2019 में तेज सेना नामक संगठन बनाया। इस दौरान उन्होंने युवाओं को अपनी सेना में शामिल होने को कहा। उनका ये प्रयोग ज्यादा सफल नहीं रहा। इसके कुछ समय बाद यदुवंशी सेना नामक संगठन बनाया जोकि यादव समुदाय को ही समर्पित था लेकिन उसमें भी उनको कामयाबी नहीं मिली।
3.2021 में उन्होंने छात्र जनशक्ति परिषद् नामक छात्र संगठन की स्थापना की। उन्होंने कहा कि इस संगठन का मकसद पार्टी से युवाओं को जोड़ना है। इसके बाद यह संगठन भी कुछ समय के बाद ठंडे बस्ते में चला गया।
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राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो तेजप्रताप ने गाड़ी पर आरजेडी के झंडे की जगह दूसरा झंडा लगाकर प्रेशर पॉलिटिक्स की शुरुआत कर दी है। काफी दिनों तक शांत रहने के बाद उनको लगने लगा है कि उनकी मान-मनौव्वल अब नहीं होने वाली है। ऐसे में अब उन्होंने ऐसे संकेत देने शुरू कर दिए हैं कि वे नई पार्टी बना सकते हैं जिसका सीधा नुकसान आरजेडी को होना है। अब तक तेजप्रताप यादव ने अपने किसी संगठन के नाम पर चुनाव नहीं लड़ा है। ऐसे में देखना होगा कि क्या इस बार 12 प्रतिशत यादव वोटर्स में उनकी पार्टी कितनी सेंधमारी कर पाएगी। हां इसके लिए जरूरी है कि वे नया संगठन बनाए।
लालू यादव को डर सता रहा है कि तेजप्रताप यादव नई पार्टी बनाकर यादव वोट बैंक में सेंधमारी कर सकते हैं जोकि उनकी पार्टी के लिए भारी पड़ सकता है। विधानसभा चुनाव में हार-जीत का अंतर बहुत ही कम होता है, ऐसे में अगर तेज प्रताप यादव नई पार्टी बनाते हैं तो इसका नुकसान आरजेडी को हो सकता है। युवाओं में तेज प्रताप काफी लोकप्रिय हैं ऐसे में उनकी नई पार्टी तेजस्वी और लालू को जख्म देने के लिए काफी होगी। इसके अलावा अगर वे किसी और पार्टी का रुख करते हैं तो यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि वे किस पार्टी में शामिल होंगे।
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