Bihar Floor Test : झारखंड के बाद अब बिहार में फ्लोर टेस्ट की बारी है। विधानसभा में 12 फरवरी को नीतीश सरकार को अपना बहुमत साबित करना है। इससे पहले राजनीतिक दलों को विधायकों के टूटने का डर सता रहा है, इसलिए इंडिया गठबंधन ने अपने-अपने विधायकों को ‘नजरबंद’ कर रखा है। पटना में हुई जेडीयू की बैठक से चार विधायक गायब रहे। इसके बाद जेडीयू के विधायकों को एक होटल में ठहराया गया है। अब बड़ा सवाल उठता है कि क्या तेजस्वी यादव की बात सच हो जाएगी? बिहार के राजनीतिक समीकरण में बड़े उलटफेर के संकेत मिल रहे हैं।
बिहार में इंडिया गठबंधन के टूटने के बाद आरजेडी के नेता और पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने कहा था कि खेल अभी शुरू हुआ है, खेल बाकी है। क्या तेजस्वी यादव की भविष्यवाणी सत्य हो जाएगी? नीतीश कुमार के चार विधायकों के गायब होने के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि फ्लोर टेस्ट में बड़ा खेल हो सकता है। बताया जा रहा है कि जेडीयू के विधायक न तो मीटिंग में शामिल हुए और न ही फोन उठा रहे हैं। वहीं, पूर्व सीएम जीतन राम मांझी पहले से ही नीतीश कुमार से नाराज चल रहे हैं।
बिहार विधानसभा में कुल 243 सदस्य हैं। किसी भी पार्टी को बहुमत के लिए 122 सदस्य की जरूरत है। अगर एनडीए सरकार बात करें तो उनके पास कुल 128 विधायक हैं, जिनमें बीजेपी के 78, जेडीयू के 45, HAM के चार और एक निर्दलीय विधायक शामिल हैं। अगर जेडीयू के 4 गायब विधायकों को माइनस कर देते हैं तो यह आंकड़ा 124 हो जाता है। इसके बाद एनडीए के पास बहुमत रहेगा और नीतीश की सरकार फ्लोर टेस्ट पास कर ले जाएगी।
मांझी के पाले में गई नीतीश की गेंद
अब मांझी के पाले में नीतीश सरकार की गेंद आ गई है। अगर अचानक से मांझी का भी मन बदल गया तो नीतीश सरकार संकट में आएगी और तेजस्वी यादव की बात सत्य हो जाएगी। जीतन राम मांझी के 4 विधायक हैं और वे एनडीए को सपोर्ट कर रहे हैं। वहीं, इंडिया गठबंधन के विधायकों की संख्या 115 है। ऐसे में इंडिया गठबंधन को सरकार बनाने के लिए सिर्फ 7 विधायक और चाहिए। आरजेडी के 79, कांग्रेस के 19, सीपीआई माले के 12, सीपीएम और सीपीआई के 2-2 एवं एआईएमआईएम के 1 विधायक हैं। ऐसे में जेडीयू के गायब चार में से तीन विधायक और मांझी सपोर्ट कर देते हैं तो इंडिया गठबंधन की सरकार बन सकती है।