Amitabh Ojha
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बिहार के सबसे चर्चित “टेंडर किंग” रिशु श्री की कहानी अब सिर्फ एक ठेकेदार की कहानी नहीं रह गई है, बल्कि यह उस कथित नेटवर्क की कहानी बन चुकी है, जिसने सरकारी टेंडरों के पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
रिशु श्री… एक ऐसा नाम, जिस पर आरोप है कि उसने बिहार में सरकारी टेंडरों का एक मजबूत नेटवर्क खड़ा किया. जांच एजेंसियों का दावा है कि वह सिर्फ ठेके लेने तक सीमित नहीं था, बल्कि टेंडर निकलने से पहले ही उससे जुड़ी गोपनीय जानकारियां हासिल कर ली जाती थीं. फिर टेंडर की शर्तों को इस तरह तैयार कराया जाता था कि फायदा चुनिंदा कंपनियों को मिले और बदले में कमीशन का खेल चलता रहे.
ईडी की जांच में बिहार के कई चर्चित आईएएस अधिकारियो की सीधी संलिप्तता के सबूत मिले थे. आरोपियों के फर्द बयानों में भी इन अधिकारियों का नाम आया था लेकिन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की.
ईडी की जांच में दावा किया गया है कि रिशु श्री और उसके नेटवर्क की कंपनियों को करोड़ों रुपये के सरकारी ठेके दिलाए गए. आरोप है कि ठेका राशि का 8 से 10 प्रतिशत तक कमीशन लिया जाता था और इस रकम का हिस्सा संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया जाता था. जांच एजेंसियों का यह भी कहना है कि रिश्वत की रकम को वैध दिखाने के लिए सब-कॉन्ट्रैक्ट, फर्जी बिलिंग और अन्य वित्तीय तरीकों का इस्तेमाल किया जाता था.
जांच के दायरे में आया सबसे चर्चित मामला सुपौल जिले के बीरपुर में बनने वाले करीब 125 करोड़ रुपये के फिजिकल मॉडलिंग सेंटर का है. आरोप है कि इस परियोजना का टेंडर एक विशेष कंपनी को दिलाने में प्रभाव का इस्तेमाल किया गया और बाद में इसका सब-कॉन्ट्रैक्ट अपने करीबी नेटवर्क को दिलाया गया.
जुलाई 2024 में ईडी की छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और कथित कमीशन से जुड़े कागजात मिलने का दावा किया गया. जांच में “S Sir” नाम से 67 लाख रुपये की एंट्री भी सामने आने की बात कही गई, जिसने कई बड़े अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए.
अब स्पेशल विजिलेंस यूनिट की हालिया कार्रवाई ने इस पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है. छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में सोना, चांदी, हीरे, नकदी और कई संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज मिलने का दावा किया गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 61 सेल डीड, करोड़ों रुपये के जेवरात और बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई है. इस बीच ईडी के दस्तावेजों में दर्ज कुछ बयानों ने भी सनसनी फैला दी है.
कुछ अधिकारियों और कारोबारी सहयोगियों के बयानों में टेंडर प्रक्रिया में कथित हस्तक्षेप, कमीशनखोरी और प्रभावशाली लोगों की भूमिका का जिक्र किया गया है. हालांकि इन आरोपों की सत्यता का अंतिम फैसला जांच और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगा. पिछले साल मुख्य अभियंता मुमुक्षु चौधरी के घर ईडी ने छापेमारी की थी. जिसके बाद मुमुक्षु चौधरी ने 22.04.2025 को धारा 50 के तहत दर्ज अपने बयान में कहा कि रिशु श्री ने उन्हें नगर निगम सीतामढ़ी में अतिरिक्त प्रभार के रूप में नगर आयुक्त की पोस्टिंग दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. इसके लिए रिशु श्री ने उच्च अधिकारियों को 25 लाख रुपये दिए थे, जिसे बाद में सीतामढ़ी में मिले सैनिटेशन टेंडर के मुनाफे से समायोजित किया गया.
मुमुक्षु चौधरी ने यह भी कहा कि रिशु श्री अक्सर बताते थे कि उन्हें आईएएस अधिकारी आनंद किशोर से मदद मिली थी, जिन्हें रिशु श्री “भैया” कहकर संबोधित करते थे. आनंद किशोर सरकार के सबसे खास अधिकारियो में से रहे है.
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रिशु श्री अकेले इस पूरे खेल का चेहरा था, या फिर उसके पीछे अधिकारियों, ठेकेदारों और प्रभावशाली लोगों का एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था? फिलहाल ईडी और स्पेशल विजिलेंस यूनिट दोनों एजेंसियां जांच में जुटी हैं. आने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासे और संभावित कार्रवाइयां इस मामले को बिहार के सबसे बड़े कथित टेंडर घोटालों में से एक बना सकती हैं.
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