Arpit Pandey
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Chhattisgarh Congress: छत्तीसगढ़ में साल के आखिर में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सत्ताधारी कांग्रेस में चुनावी साल में बड़े बदलाव की अटकलें लंबे समय से लग रही हैं, लेकिन माना जा रहा है कि अब बदलाव जल्द होगा। छत्तीसगढ़ कांग्रेस संगठन में राज्य में नेतृत्व बदले जाने की चर्चा है। बताया जा रहा है कि मोहन मरकाम की जगह युवा सांसद को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है।
कहा जा रहा है कि मोहन मरकाम की जगह राज्य संगठन का नेतृत्व नये चेहरे को सौंप दिया जाएगा। बदलाव की अटकलों के बीच दो चेहरे कैबिनेट मंत्री अमरजीत भगत और बस्तर से लोकसभा सांसद दीपक बैज के रूप में देखे गये और कहा गया कि इनमें से किसी एक चेहरे को राज्य का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी। इन अटकलों के बीच दिल्ली में ही दीपक बैज की मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से हुई मुलाकात ने लगभग ये संकेत दे दिये हैं कि बदलाव की स्थिति में दीपक बैज बड़ी जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके अलावा आज उन्होंने प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा से भी मुलाकात की है।
#Breaking: छत्तीसगढ़ कांग्रेस में हो सकता है बड़ा बदलाव, दीपक बैज को मिल सकती हैं बड़ी जिम्मेदारी #Chhattisgarh pic.twitter.com/apr3XkIr5p
— News24 MP-CG (@News24_MPCG) April 5, 2023
इस चर्चा को उस वक्त और बल मिला जब संगठन और सरकार के बड़े नेता दिल्ली में सक्रिय हुए, सोमवार की रात सूरत से दिल्ली पहुंचे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की राष्ट्रीय महासचिव संगठन के सी वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा से मुलाकात हुई। इस मुलाकात को संगठन में बदलाव से जोड़कर देखा गया। इसके बाद आज दीपक बैज भी कुमारी शैलजा से मिलने पहुंचे।
संकेत हैं कि एक-दो दिनों के भीतर स्थिति स्पष्ट हो जाएगी कि राज्य संगठन का नेतृत्व कौन करेगा? मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दिल्ली के नेताओं के सामने अपनी बात रख दी है। चर्चा यही है कि मुख्यमंत्री खुद संगठन में बदलाव के पक्षधर है। सत्ता और संगठन के बीच पिछले कुछ वक्त से खींची दरारों को चुनाव के पहले भरने का यही एक विकल्प माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि अब एक दो दिन में स्थिति स्पष्ट हो जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दिल्ली के नेताओं के सामने अपनी बात रख दी है। चर्चा यही है कि मुख्यमंत्री खुद संगठन में बदलाव के पक्षधर है। सत्ता और संगठन के बीच पिछले कुछ वक्त से खींची दरारों को चुनाव के पहले भरने का यही एक विकल्प माना जा रहा है।
इससे पहले तक राज्य संगठन के भीतर यह समीकरण सुना गया था कि सरगुजा से आने वाले कैबिनेट मंत्री अमरजीत भगत को पार्टी की कमान सौंपकर मोहन मरकाम को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा, लेकिन कहते हैं कि यह समीकरण उस वक्त फेल हो गया जब भगत की ओर से अध्यक्ष नहीं बनने की बात रखी गई।
दीपक बैज को लेकर सहमति बनने की खबर के पीछे यह दलील दी जा रही है कि मरकाम कि तरह वह भी बस्तर से आते हैं। पार्टी के सांसद हैं युवा चेहरे हैं। हाल ही में रायपुर में हुए अधिवेशन में भी युवा चेहरों को महत्वपूर्ण पदों पर लाने का प्रस्ताव पारित हुआ था। इसके अलावा मरकाम आदिवासी वर्ग से आते हैं, जबकि दीपक भी इसी वर्ग से आते हैं, ऐसे में समीकरण भी बना रहेगा।
दीपक को यदि पार्टी की कमान सौंपी जाती है तो यह नई परंपरा कि शुरुआत करने जैसा होगा। दूसरा फैक्टर बस्तर का धर्मांतरण का मुद्दा भी है, जिसे बीजेपी-आरएसएस हवा दे रही है। आने वाले चुनाव में यह बड़ा सियासी मुद्दा बनेगा। दीपक बस्तर से होने के नाते इस सियासी मुद्दा का काट बेहतर ढंग से तलाश सकते हैं।
वहीं नेतृत्व परिवर्तन की खबरों के बीच वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम ने मीडिया से बातचीत में कहा कि चार सालों तक पार्टी ने उन्हें अध्यक्ष में रूप में बड़ी जिम्मेदारी दी है। आलाकमान आगे भी जो जिम्मेदारी देगा, निष्ठापूर्वक काम करूंगा। हालांकि उनका कहना है कि फिलहाल बदलाव को लेकर कोई जानकारी नहीं है। प्रदेश प्रभारी नहीं चाहती कि फिलहाल कोई बदलाव हो, जबकि कुछ मंत्री भी बदलाव नहीं चाहते है।
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