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क्या संजू सैमसन को चुकानी पड़ी टीम इंडिया में वैभव सूर्यवंशी की एंट्री की कीमत? 12 गेंद में खत्म हो गया करियर!

टी20 वर्ल्ड कप 2026 की खिताबी जीत के हीरो रहे संजू सैमसन को टीम इंडिया के आगामी जिम्बाब्वे दौरे से ड्रॉप किए जाने के फैसले ने हर क्रिकेट फैन को हैरान कर दिया है. कोच गौतम गंभीर और कप्तान श्रेयस अय्यर का नया मैनेजमेंट युवाओं पर दांव लगाने के नाम पर बेखौफ क्रिकेट की बात कर रहा है, लेकिन क्या महज़ 12 गेंदों की नाकामी के बाद एक बड़े मैच-विनर को यूं बेंच पर बिठा देना सही है? सवाल बीसीसीआई और सिलेक्टर्स से भी है कि कई और खिलाड़ी भी तो बुरी तरह फ्लॉप हुए हैं. फिर बदलाव के नाम पर आयरलैंड दौरे पर मिली हार का पूरा बिल सिर्फ संजू सैमसन के नाम फाड़ना जायज़ कैसे माना जाए ?

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Sanju Samson: ज़रा पीछे मुड़कर वर्ल्ड कप 2026 के उन रोमांचक मैचों को याद कीजिए. जब भारतीय बैटिंग लाइन-अप दबाव में बिखर रहा था, तब संजू ही वो खिलाड़ी थे जिन्होंने टीम को संभाला था. उन्होंने लगातार तीन मैचों में नाबाद 97, 89 और 89 रन की ऐसी मैच-विनिंग पारियां खेलीं, जिसने जीत की पूरी स्क्रिप्ट ही बदल दी. नॉकआउट मैचों में उन्होंने अपने पर्सनल रिकॉर्ड की परवाह किए बिना टीम के लिए रिस्क लिया और बेखौफ होकर बैटिंग की. उनकी यही निडर अप्रोच हमें चैंपियन बना गई. लेकिन आज, उसी वर्ल्ड कप हीरो को महज़ तीन मैचों के खराब फॉर्म के आधार पर भुला दिया गया है, क्या सूर्यकुमार यादव की तरह अब संजू सैमसन के भी करियर पर फुलस्टॉप लगाने की तैयारी है.

12 गेंदें और एक ‘चैंपियन’ का पत्ता साफ!

12 गेंदें किसी टी20 मैच का मोमेंटम बदल सकती हैं. लेकिन भारतीय क्रिकेट में ऐसी ही 12 गेंदों ने संजू सैमसन का पूरा करियर ही पलट कर रख दिया. टी20 वर्ल्ड कप 2026 की जीत को अभी कुछ ही महीने बीते हैं, लेकिन टीम को चैंपियन बनाने वाला यह हीरो आज प्लेइंग इलेवन तो दूर, स्क्वॉड में भी अपनी जगह तलाश रहा है. आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे की तीन पारियों में संजू ने कुल 12 गेंदें खेलीं (5, 0 और 1 रन) और बस यहीं से सिलेक्टर्स ने तय कर लिया कि इस खिलाड़ी को अब साइडलाइन कर देना चाहिए. जिम्बाब्वे दौरे से उन्हें ड्रॉप किया जाना सिर्फ एक फैसला नहीं है, यह उन लाखों फैंस के लिए एक बड़ा हार्टब्रेक है, जिन्होंने संजू को तिरंगे के साथ वर्ल्ड कप ट्रॉफी उठाते देखा था.

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‘फीयरलेस क्रिकेट’ की डिमांड के बीच इनसिक्योरिटी ?

माना कि गौतम गंभीर और श्रेयस अय्यर की नई जोड़ी टीम इंडिया में एक नया कल्चर सेट करना चाहती है. यह मैनेजमेंट लगातार खिलाड़ियों से ‘फीयरलेस क्रिकेट’ की डिमांड कर रहा है. गंभीर हमेशा कहते हैं कि विकेट गिरने की टेंशन लिए बिना आक्रामक शॉट खेलो. लेकिन ज़रा सोचिए, जब टीम का माहौल ऐसा बन जाए कि महज़ 12 गेंदें खराब खेलने पर वर्ल्ड कप जिताने वाले खिलाड़ी को सीधे ड्रॉप कर दिया जाए, तो ड्रेसिंग रूम में क्या मैसेज जाएगा? मेरी राय में तो इससे खिलाड़ियों में और भी गहरा डर और इनसिक्योरिटी पैदा होगी. वे टीम के लिए रिस्क लेने के बजाय सिर्फ अपनी जगह बचाने के लिए सेफ क्रिकेट खेलने लगेंगे.

हार का सारा बिल सिर्फ संजू पर क्यों?

बीसीसीआई का नया रुख साफ है कि अब वो सिलेक्टर्स और कोच को फैसले लेने की पूरी आज़ादी दे रहे हैं, शायद कुछ लोग कहेंगे कि एक हद तक ये बात सही भी है. लेकिन सवाल ये है कि इस खुली छूट में कोच और उनके सपोर्ट स्टाफ, कप्तान और सिलेक्टर्स के लिए जवाबदेही की जगह क्यों नहीं है? एक बेहद सीधा सवाल जो शायद हर क्रिकेट फैन के मन में होगा कि आयरलैंड जैसी टीम से वर्ल्ड कप जीतने के तुरंत बाद मिली मिली हार का पूरा ठीकरा क्या सिर्फ संजू के सिर फोड़ना सही है? उस सीरीज में टीम के दूसरे बड़े नाम भी तो पूरी तरह फ्लॉप रहे थे, तो फिर ड्रॉप करने की गाज सिर्फ संजू पर ही क्यों गिरी? अभी इंग्लैंड दौरा जारी है जहां प्लेइंग-11 से पहले ही संजू बाहर किए जा चुके हैं. मान लिया जाए कि इस दौरे पर भी भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ता है, तो इस दूसरी हार के लिए भी गंभीर और श्रेयस को ज़िम्मेदार नहीं माना जाएगा?

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लेफ्ट-राइट कॉम्बिनेशन और वैभव सूर्यवंशी!

क्रिकेट की पिच पर जैसा खेल अंडर-19 वर्ल्ड कप के बाद से 15 साल के वैभव सूर्यवंशी दिखा रहे हैं, वर्ल्ड क्रिकेट का हर फैन उनका मुरीद बन गया है. खासतौर से आईपीएल 2026 के बाद तो टीम इंडिया में भी उनका डेब्यू ज्यादा देर तक टाला नहीं जा सकता था. संजू सैमसन भी लगातार 3 मैच फ्लॉप हुए, नतीजतन उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टी20 में बेंच पर बिठाकर वैभव सूर्यवंशी का डेब्यू करा दिया गया. यंग टैलेंट को बैक करना अच्छी बात है लेकिन संजू सैमसन को ज़िम्बाब्वे दौरे के लिए चुने गए स्क्वॉड से भी बाहर करना ज़रूरी नहीं था ? टीम में बतौर बदलाव चुने गए प्रभसिमरन सिंह की जगह संजू सैमसन ही ज़िम्बाब्वे दौरे पर जा सकते थे, जहां ज़रूरत पड़ने पर उन्हें दोबारा मौका दिया जा सकता था. आज टीम इंडिया के मौजूदा टी20 सेटअप में लेफ्ट-हैंडेड बल्लेबाजों की लाइन लग गई है. जहां संजू जैसे टॉप क्लास राइट-हैंडेड बैटर को बाहर करने से टीम का बैलेंस भी बिगड़ रहा है. संजू टॉप ऑर्डर के अलावा मिडिल ऑर्डर में भी खेल सकते हैं. पेस और स्पिन दोनों को डोमिनेट करने का दम रखते हैं.

क्या कमबैक होगा या फिर करियर का एंडगेम?

संजू सैमसन के करियर का ग्राफ हमेशा से रोलरकोस्टर की तरह रहा है. उन्होंने पहले भी कई बार ड्रॉप होने के बाद डोमेस्टिक क्रिकेट और आईपीएल में रन बनाकर टीम इंडिया में शानदार कमबैक किया है. लेकिन इस बार उन्हें तब बाहर का रास्ता दिखाया गया है, जब वो कुछ मैचों को छोड़कर अपने करियर की सबसे बेहतरीन फॉर्म में थे और उनके पास वर्ल्ड कप जीतने का कॉन्फिडेंस था. अगर इसी तरह महज़ 12 गेंदों के आधार पर किसी भी वर्ल्ड चैंपियन का पत्ता साफ होने लगा, तो टीम इंडिया में मैच-विनर्स को बैक करने का सिस्टम ही खत्म हो जाएगा. संजू का यह ड्रॉप होना सिर्फ एक खिलाड़ी की हार नहीं, बल्कि इंडियन क्रिकेट के उस सिस्टम पर सवाल है जो टैलेंट को संवारने से ज्यादा उसे उलझाने में लगा है. यहां जवाबदेही सिर्फ कप्तान, कोच या सिलेक्टर्स की नहीं, बल्कि बीसीसीआई की भी बनती है जिसे अपने हर फैसले को लेकर अब गंभीरता से विचार करने की ज़रूरत है.

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ये भी पढ़िए- फर्जी बयान के वायरल होने पर सूर्यकुमार यादव ने तोड़ी चुप्पी, वैभव सूर्यवंशी को लेकर कही दिल छू लेने वाली बात

First published on: Jul 07, 2026 05:23 PM

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