आज के समय में लगभग हर नई कार में एयरबैग एक जरूरी सेफ्टी फीचर बन चुका है. सरकार भी नई कारों में ज्यादा एयरबैग देने पर जोर दे रही है ताकि सड़क हादसों में लोगों की जान बचाई जा सके. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि आखिर एयरबैग के अंदर क्या भरा होता है और ये दुर्घटना के समय इतनी तेजी से कैसे खुल जाता है.
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एयरबैग क्या होता है?
एयरबैग एक खास तरह का सुरक्षा गैजेट है, जो कार के स्टीयरिंग व्हील, डैशबोर्ड, सीट या साइड में लगा होता है. सामान्य हालात में ये मुड़ा हुआ रहता है, लेकिन जैसे ही कार किसी गंभीर टक्कर का शिकार होती है, ये कुछ मिलीसेकंड में खुलकर चालक और यात्रियों को चोट लगने से बचाने की कोशिश करता है. एयरबैग के अंदर सामान्य हवा पहले से भरी नहीं होती. इसके साथ एक गैस जनरेटर और खास रासायनिक पदार्थ लगे होते हैं. दुर्घटना होने पर सेंसर टक्कर की स्पीड को पहचानते हैं और तुरंत गैस बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. इससे बड़ी मात्रा में नाइट्रोजन गैस बनती है, जो एयरबैग को पलभर में फुला देती है. आधुनिक एयरबैग सिस्टम पहले की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और एड्वांस तकनीक का इस्तेमाल करते हैं.
एयरबैग कैसे काम करता है?
कार में कई सेंसर लगे होते हैं, जो लगातार स्पीड और टक्कर की स्थिति पर नजर रखते हैं. जैसे ही गंभीर दुर्घटना होती है, सेंसर एयरबैग कंट्रोल यूनिट को सिग्नल भेजते हैं. इसके बाद गैस जनरेटर एक्सपर्ट होता है और कुछ ही मिलीसेकंड में एयरबैग पूरी तरह खुल जाता है. ये चालक या यात्री के शरीर और कार के कठोर हिस्सों के बीच कुशन का काम करता है, जिससे गंभीर चोट का खतरा काफी कम हो जाता है. एयरबैग तभी सबसे असरदार होता है, जब सीट बेल्ट भी लगी हो. अगर व्यक्ति सीट बेल्ट नहीं पहनता, तो एयरबैग अकेले पूरी सुरक्षा नहीं दे सकता. इसलिए कार चलाते समय हमेशा सीट बेल्ट पहनना जरूरी है. नई कारों में सिर्फ फ्रंट एयरबैग ही नहीं, बल्कि साइड एयरबैग, कर्टेन एयरबैग और नी एयरबैग जैसे कई प्रकार के एयरबैग दिए जा रहे हैं. इनका मकसद अलग-अलग दिशा से होने वाली टक्कर में यात्रियों को बेहतर सुरक्षा देना है.
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आज के समय में लगभग हर नई कार में एयरबैग एक जरूरी सेफ्टी फीचर बन चुका है. सरकार भी नई कारों में ज्यादा एयरबैग देने पर जोर दे रही है ताकि सड़क हादसों में लोगों की जान बचाई जा सके. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि आखिर एयरबैग के अंदर क्या भरा होता है और ये दुर्घटना के समय इतनी तेजी से कैसे खुल जाता है.
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एयरबैग क्या होता है?
एयरबैग एक खास तरह का सुरक्षा गैजेट है, जो कार के स्टीयरिंग व्हील, डैशबोर्ड, सीट या साइड में लगा होता है. सामान्य हालात में ये मुड़ा हुआ रहता है, लेकिन जैसे ही कार किसी गंभीर टक्कर का शिकार होती है, ये कुछ मिलीसेकंड में खुलकर चालक और यात्रियों को चोट लगने से बचाने की कोशिश करता है. एयरबैग के अंदर सामान्य हवा पहले से भरी नहीं होती. इसके साथ एक गैस जनरेटर और खास रासायनिक पदार्थ लगे होते हैं. दुर्घटना होने पर सेंसर टक्कर की स्पीड को पहचानते हैं और तुरंत गैस बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. इससे बड़ी मात्रा में नाइट्रोजन गैस बनती है, जो एयरबैग को पलभर में फुला देती है. आधुनिक एयरबैग सिस्टम पहले की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और एड्वांस तकनीक का इस्तेमाल करते हैं.
एयरबैग कैसे काम करता है?
कार में कई सेंसर लगे होते हैं, जो लगातार स्पीड और टक्कर की स्थिति पर नजर रखते हैं. जैसे ही गंभीर दुर्घटना होती है, सेंसर एयरबैग कंट्रोल यूनिट को सिग्नल भेजते हैं. इसके बाद गैस जनरेटर एक्सपर्ट होता है और कुछ ही मिलीसेकंड में एयरबैग पूरी तरह खुल जाता है. ये चालक या यात्री के शरीर और कार के कठोर हिस्सों के बीच कुशन का काम करता है, जिससे गंभीर चोट का खतरा काफी कम हो जाता है. एयरबैग तभी सबसे असरदार होता है, जब सीट बेल्ट भी लगी हो. अगर व्यक्ति सीट बेल्ट नहीं पहनता, तो एयरबैग अकेले पूरी सुरक्षा नहीं दे सकता. इसलिए कार चलाते समय हमेशा सीट बेल्ट पहनना जरूरी है. नई कारों में सिर्फ फ्रंट एयरबैग ही नहीं, बल्कि साइड एयरबैग, कर्टेन एयरबैग और नी एयरबैग जैसे कई प्रकार के एयरबैग दिए जा रहे हैं. इनका मकसद अलग-अलग दिशा से होने वाली टक्कर में यात्रियों को बेहतर सुरक्षा देना है.
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