Siddharth Sharma
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नई दिल्ली: भारत में खेले जाने वाले वनडे वर्ल्ड कप (ODI World Cup 2023) की शुरुआत 5 अक्टूबर 2023 से होने वाली है। क्रिकेट के सबसे बड़े टूर्नामेंट में गेंद और बल्ले के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी। जिसमें गेंदबाज बल्लेबाजों को जल्द से जल्द आउट करना चाहेंगे। वहीं बैट्समैन ज्यादा से ज्यादा रन बनाना चाहेंगे। इस खेल में हर बॉलर बेट्समैन को आउट करना चाहता है। लेकिन क्या आप जानते हैं बल्लेबाज सिर्फ गेंदबाज की अच्छी बॉल की वजह से नहीं बल्कि अपनी गलती से भी आउट हो सकते हैं।
क्रिकेट के नियमों के अनुसार, एक बल्लेबाज करीब 11 तरीकों से आउट हो सकता है और उसमें बल्लेबाज का व्यवहार और गलती भी शामिल है। इनमें से बोल्ड, कैच, लेग बिफोर विकेट (एलबीडब्ल्यू), रन-आउट और स्टंप किया जाना सबसे ज्यादा आम है। विश्वकप शुरू होने ही वाला है ऐसे में हम आपकों इन सभी तरीकों के बारे में बताने जा रहे हैं।
जब गेंदबाज की ओर से फेंकी गई बॉल विकेट पर लग जाती है तो उसे बोल्ड करार दिया जाता है। ऐसे में यह बॉल बैट, पैड या शरीर को लगकर भी विकेटों को लगती है तो उसे आउट माना जाता है। हालांकि अगर गेंद नो बॉल करार दी जाती है या फिर गिल्लियां मैदान पर नहीं गिरती है तो इसे नॉटआउट माना जाता है।
अगर गेंदबाज की बॉल बल्लेबाज के बल्ले या बल्ले को पकड़ने वाले हाथ से लगकर हवा में उछलती है और जमीन पर गिरने से पहले विपक्षी टीम के खिलाड़ी द्वारा कैच कर लिया जाता है तो बल्लेबाज को आउट करार दिया जाता है। विकेटकीपर द्वारा भी कैच पकड़ने पर आउट माना जाता है। हालांकि अगर पैड से टकराने के बाद बॉल कोई पकड़ता है तो उसे नॉटआउट करार दिया जाता है।
जब बल्लेबाज रन लेने के लिए दौड़ता है और उसी बीच फील्डर, बल्लेबाज या उसके बैट के क्रीज में पहुंचने से पहले उस साइड के विकेट की गिल्लियां गिरा देता है तो उसे रन आउट माना जाएगा। ऐसे में अंपायर का निर्णय ही फाइनल होता है।
जब गेंदबाज बॉल फेंकता है और विकेट कीपर गेंद से विकेटों की गिल्लियों को गिरा देता है और उस वक्त बल्लेबाज या उसका बैट क्रीज में नहीं होता है तो उसे आउट माना जाएगा। इसे स्टम्ड आउट कहते हैं। ऐसे में विकेटकीपर की चालाकी और तेजी का असली टेस्ट होता है।
जब बल्लेबाज शॉट मारते वक्त अपने बल्ले से ही विकेट की गिल्लियां गिरा देता है तो उसे हिट विकेट के माध्यम से आउट माना जाता है। ऐसे में गेंदबाज को मुफ्त में विकेट मिल जाता है क्योंकि ये बल्लेबाज की ही बेवकूफी कहलाती है।
अगर कोई बल्लेबाज सिर्फ अपने विकेट को बचाने के मकसद से या विपक्षी टीम की सहमति के बिना गेंद को दो बार मारता है तो उसे आउट करार दिया जाता है।
गर कोई बल्लेबाज जानबूझकर फील्डर को बाधा पहुंचाता है तो उसे आउट करार दिया जाता है, जिसमें फील्डर की फेंकी गई गेंद को रोकना भी शामिल है।
यदि कोई बल्लेबाज अपनी बारी आने पर टेस्ट और वनडे मैचों में 3 मिनट के अंदर मैदान पर नहीं आता है तो उसके आउट करार दिया जा सकता है। हालांकि इसका निर्णय अंपायर पर निर्भर करता है। क्रिकेट में ये बेहद कम बार देखा गया है।
मांकडिंग आउट हमेशा चर्चाओं का विषय बना रहता है। इसमें जब गेंदबाज को लगता है कि उसके गेंद फेंकने से पहले ही बल्लेबाज नॉन-स्ट्राइकर क्रीज से बहुत पहले बाहर निकल रहा है तो वह नॉन-स्ट्राइकर छोर की गिल्लियां उड़ाकर नॉन-स्ट्राइकर बल्लेबाज को आउट कर सकता है।
अगर बॉल बैट से टकराने से पहले बल्लेबाज के पैर से इस तरह टकरा जाती है कि अगर बैट्समैन सामने नहीं खड़ा होता तो वह सीधे स्टंप में घुस जाती तो ऐसे में लेग बिफोर आउट करार दिया जाता है। इसमें भी अंपायर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
अगर कोई बल्लेबाज विपक्षी टीम के खिलाड़ी की अनुमति के बिना गेंद को हाथ से छूता है तो उसे फील्ड को बाधित करने वाले नियम के तहत आउट करार दिया जाता है। हालांकि इस तरह से भी बेहद कम बार ही आउट होते देखा गया है। इसमें विपक्षी टीम द्वारा अपील करना जरूरी है।
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