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‘महिलाओं को पीरियड की बात करने से डरना नहीं चाहिए’, इस वुमेन वर्ल्ड कप चैंपियन के कमेंट पर मचा हंगामा

Alex Hartley On Menstrual Cycle: महिलाओं, खासकर स्पोर्ट्स वुमेन को अक्सर पीरियड की वजह से परेशानी का सामना करना पड़ता है, इसको लेकर इंग्लैंड की आईसीसी वुमेन वनडे वर्ल्ड कप चैंपियन एलेक्स हार्टली के कमेंट पर हंगामा मचा, जिसके बाद उन्होंने आलोचकों को करारा जवाब दिया

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Alex Hartley On Period: इंग्लैंड की पूर्व स्पिनर और मौजूदा क्रिकेट कमेंटेटर एलेक्स हार्टली ने मेंस्ट्रुअल साइकिल के बारे में ज्यादा ओपन माइंड रखने की बात कही है. उन्होंने कहा कि महिलाओं को ‘अपनी पीरियड्स के बारे में बात करने से डरना नहीं चाहिए.’ उन्होंने वुमेन ऐशेज के दौरान रेडियो कमेंट्री में इस मसले पर चर्चा करने के बाद आलोचना का सामना किया.

कमेंट्री के दौरान आया पीरियड

‘बीबीसी टेस्ट मैच स्पेशल’ में बात करते हुए, एलेक्स हार्टली ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीसरे टेस्ट के दौरान अपने पीरियड शुरू होने के कारण ‘चिड़चिड़ा’ महसूस करने का जिक्र किया. इसके बाद सोशल मीडिया पर अच्छे और बुरे दोनों तरह के रिएक्शंस आए. भले ही इस पूर्व क्रिकेट को कुछ नेगेटिव कमेंट्स मिले, लेकिन उन्होंने कहा कि ज्यादातर रिस्पॉन्स पॉजिटिव थ., हजारों मैसेजेज में उनका शुक्रिया अदा किया गया कि उन्होंने एक ऐसे टॉपिक को नॉर्मल बनाने में मदद की जिसे अक्सर टैबू माना जाता है.

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‘बेहद नॉर्मल है पीरियड’

‘नो बॉल्स पोडकास्ट’ पर बोलते हुए, एलेक्स हार्टली ने जोर देकर कहा कि मेंस्ट्रुएशन जिंदगी का एक नेचुरल और नॉर्मल हिस्सा है और इसे खुले तौर पर चर्चा की जानी चाहिए, खास तौर से स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग जैसे पब्लिक स्पेस पर. वो मानती हैं कि ऐसी बातचीत सुन रही छोटी लड़कियों को ये भरोसा दे सकते हैं कि पीरियड्स को लेकर कोई शर्म महसूस करने वाली बात नहीं है.

मेंस्ट्रुअल साइकिल को लेकर शर्मिंदगी क्यों?

हार्टले ने स्पोर्ट्स में पीरियड्स से जुड़े कलंक के बड़े असर को सामने लाया किया, और भारत के एक लिसनर के मैसेज का जिक्र किया जिसे उसके पीरियड्स के कारण लड़कों के साथ क्रिकेट खेलने से रोक दिया गया था. उन्होंने एक ब्रिटिश कैंपेन का भी हवाला दिया, जिसमें ये बताया गया कि 64 फीसदी स्कूल जाने वाली उम्र की लड़कियां पीरियड के दर्द और शर्मिंदगी के कारण अपने मिड टीन एज तक खेलना छोड़ देती हैं.

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वुमेन टेस्ट में बढ़ जाती है परेशानी

ये परेशानी खास तौर से क्रिकेट में रिलेवेंट है, जहां महिला खिलाड़ी खास तौर से टेस्ट मैचेज में सफेद कपड़े पहनती हैं. हार्टले ने 13 साल की उम्र में क्लब मैच के दौरान अपनी पहले पीरियड के एक्सपीरिएंस को याद किया और इसके कारण होने वाली फिक्र के बारे में बताया. इंग्लैंड की गेंदबाज केट क्रॉस ने कहा कि टेस्ट मैचों के हफ्ते स्ट्रेस से भरे हो सकते हैं, और कुछ खिलाड़ी शर्मिंदगी से बचने के लिए पीरियड को देर से लाने के लिए दवाओं का इस्तेमाल करती हैं. हार्टले और क्रॉस दोनों सहमत हुए कि कलंक को कम करने और खेल में महिलाओं का सपोर्ट करने के लिए बातचीत बढ़ाना जरूरी है.

कब जीता था वनडे वर्ल्ड कप?

एलेक्स हार्टले इंग्लैंड वुमेन क्रिकेट टीम के लिए 28 वनडे और 4 टी-20 इंटरनेशनल मुकाबले खेले हैं. इंग्लिश टीम की तरफ से खेलते हुए उनके लिए सबसे यादगार लम्हा तब आया था, जब इंग्लैंड ने 23 जुलाई 2017 के फाइनल मुकाबले में भारत को 9 रनों से हराकर आईसीसी वुमेन वनडे वर्ल्ड कप ट्रॉफी पर कब्जा जमाया था.

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First published on: Dec 31, 2025 02:01 PM

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About the Author

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 के डिजिटल सेक्शन में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वो स्पोर्ट्स की खबरें लिखते हैं. हालांकि उन्हें नेशनल, इंटरनेशनल, ट्रैवल, टेक, हेल्थ, लाइफस्टाइल और रिलेशनशिप सेक्शन का बेहतरीन तजुर्बा है. 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत करने के बाद, वो दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके. एजुकेशनल क्वालिफिकेशन की बात करें तो उन्होंने बैंगलौर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म, और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.

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Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 के डिजिटल सेक्शन में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वो स्पोर्ट्स की खबरें लिखते हैं. हालांकि उन्हें नेशनल, इंटरनेशनल, ट्रैवल, टेक, हेल्थ, लाइफस्टाइल और रिलेशनशिप सेक्शन का बेहतरीन तजुर्बा है. 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत करने के बाद, वो दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके. एजुकेशनल क्वालिफिकेशन की बात करें तो उन्होंने बैंगलौर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म, और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.

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