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भारत का पूर्व कोच विदेश में लड़ रहा कैंसर से जंग, इलाज के लिए बेटी ने मांगी मदद 

Michael Nobbs: पूर्व भारतीय हॉकी कोच माइकल नोब्स पिछले 5 साल से कैंसर से जूझ रहे हैं. जिसके लिए उनके पास इलाज के भी पैसे नहीं थे. उनके इलाज के लिए माइकल की बेटी कैटलिन को मदद मांगनी पड़ी. जिसके बारे में अब उन्होंने खुलकर बात की है. इस कहानी ने अब खेल जगत को बहुत ज्यादा हैरान कर दिया है. फैंस ने भी इस खिलाड़ी की मदद की है.

Author Written By: Aditya Updated: Jan 2, 2026 12:45
Michael Nobbs
Michael Nobbs

Michael Nobbs: ऑस्ट्रेलिया के पूर्व हॉकी खिलाड़ी माइकल नोब्स संन्यास के बाद भारतीय हॉकी टीम के कोच भी बने थे. माइकल पिछले 5 सालों से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं. जहां पर उन्हें पैसों की तंगी का सामना भी करना पड़ा. उनके पास इलाज कराने का पैसा भी नहीं था. माइकल की 2 बेटी है. जिनमें से एक कैटलिन नोब्स खुद हॉकी खिलाड़ी हैं. कैटलिन ने अपने पिता के इलाज के लिए मदद मांगी. जिसके बारे में उन्होंने बात की है. 

माइकल नोब्स को मांगनी पड़ी मदद 

एक क्राउडफंडिंग पोर्टल के मुताबिक माइकल नोब्स फेफड़ों के कैंसर से जूझ रहे हैं. ये कैंसर उनकी हड्डियों तक फैल चुका है. कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए एमीवेंटामैब नाम की दवाई की जरूरत है, लेकिन बहुत महंगी है. 6 महीने के इलाज में लगभग 64 हजार ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का खर्च आता है. 

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जिसके कारण ही कैटलिन और उनकी बहन जैमी ने 31 अगस्त 2025 को इलाज के लिए पैसों की मदद एक क्राउडफंडिंग पोर्टल पर मांगी. जिससे 75 हजार डॉलर आ गए. जिसके बाद भी सही से इलाज नहीं हो पा रहा है. जिसके बारे में कैटलिन ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में बताया है. उन्होंने कहा, ‘वह अभी सिडनी में रहते हैं जबकि हम पर्थ में रहते हैं. वहां पहुंचने के लिए हमें फ्लाइट से कम से कम पांच घंटे लगते हैं. दूर से मदद करना मुश्किल हो रहा है.  

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पिता के इलाज के बारे में बोली कैटलिन नोब्स 

इस इंटरव्यू में कैटलिन नोब्स ने कहा, ‘फिलहाल उनका इलाज चल रहा है जो चुनौतीपूर्ण है, लेकिन वे इससे उबर रहे हैं और उनमें जीने की प्रबल इच्छाशक्ति है. फिलहाल उनका ध्यान खुद को ठीक करने पर है और मैं यही चाहती हूं कि वे मुझे हॉकी खेलते हुए देखें. उन्हें इसमें बहुत आनंद आता है और इससे उनके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. फिलहाल मैं उनके लिए बस इतना ही कर सकती हूं. वह हर किसी में अच्छाई देखते हैं और उनका स्वभाव बेहद दयालु है. सौभाग्य से, हमारी हॉकी को लेकर ज्यादा बातचीत नहीं हुई है. हम हॉकी से ज्यादा पिता-पुत्री की तरह बातें करते रहे हैं. चाहे मैं अच्छा खेलूं या बुरा, वह हमेशा मेरे सबसे बड़े समर्थक रहे हैं.’

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First published on: Jan 02, 2026 12:45 PM

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