---विज्ञापन---

क्रिकेट angle-right

कैमरून ग्रीन के मामले से BCCI लेगी सबक? IPL में प्लेयर्स की ‘बहानेबाजी’ को लेकर उठी नए तरह के बैन की मांग

Cameron Green: आईपीएल 2026 के मिनी ऑक्शन में कोलकाता नाइटराइडर्स ने ऑस्ट्रेलिया के ऑलराउंडर कैमरून ग्रीन को 25.20 करोड़ रुपये में खरीदा था, लेकिन ग्रीन इंडियन प्रीमियर लीग के 19वें सीजन में अब तक एक ओवर भी बॉलिंग नहीं कर पाएं हैं, हालांकि उन्हें नेट गेंदबाजी करते हुए देखा गया है.

---विज्ञापन---

Sunil Gavaskar Appel To BCCI: कोलकाता नाइटराइडर्स अभी मुश्किल में नजर आ रही है, अभी तक एक भी मैच न जीतने के बावजूद, कोई भी टीम की रणनीति, खिलाड़ियों के सिलेक्शन या नीलामी की रणनीति की आलोचना नहीं कर रहा है. कोई ये नहीं पूछ रहा कि केकेआर के कप्तान अजिंक्य रहाणे ने उस मैच में पहले बल्लेबाजी करने का फैसला क्यों किया, जिसमें बारिश के दखल की पूरी संभावना थी. इसके बजाय हर कोई कैमरून ग्रीन पर ही निशाना साध रहा है.

कैमरून ग्रीन की आलोचना कितनी सही?

इस ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर ने किसी भी फ्रेंचाइजी से यह गुजारिश नहीं की थी कि उसे करोड़ों डॉलर दिए जाएं. उसने तो बस खुद को 2 करोड़ रुपये की बेस प्राइस पर रजिस्टर किया था. यह वैसा ही था जैसा कई घरेलू और विदेशी खिलाड़ियों ने किया था. फिर भी, सबसे ज्यादा आलोचना उसी की हो रही है. उसे मिली 25.20 करोड़ रुपये की भारी-भरकम कीमत की वजह से उसे तीखी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें से ज्यादातर आलोचना बेबुनियाद है.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें- ‘दिल ले गई कुड़ी पंजाब दी’ कौन हैं PBKS की मिस्ट्री गर्ल, जिसने इंटरनेट पर मचा दिया तूफान?

कोई भी देख सकता है कि इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में आने से पहले ग्रीन बहुत अच्छी फॉर्म में नहीं था. ऑस्ट्रेलिया की टीम में सभी फॉर्मेट में, उसकी जगह पर सवाल उठ रहे हैं. एशेज और टी20 वर्ल्ड कप में उसका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा. उसे एक ऑलराउंडर के तौर पर जाना जाता है, लेकिन न तो उसकी बल्लेबाजी और न ही उसकी गेंदबाजी वैसी है, जैसी 4-5 साल पहले होने की उम्मीद थी.

---विज्ञापन---

ग्रीन की गेंदबाजी को लेकर इतना हंगामा क्यों?

हालांकि केकेआर की सारी परेशानियों का ठीकरा किसी न किसी तरह उसकी गेंदबाजी पर ही फोड़ा जा रहा है. ये सच है कि उसकी बल्लेबाजी अच्छी नहीं रही है: 2 बार वो जल्दी आउट हो गए और एक बार रन आउट हुए. लेकिन उसकी गेंदबाजी से कभी भी मैच का पासा पलटने की उम्मीद नहीं थी. केकेआर के हेड कोच अभिषेक नायर ने संकेत दिया था कि ग्रीन, आंद्रे रसेल की जगह लेंगे, हालांकि उनका रोल थोड़ा अलग होगा.

यह भी पढ़ें- IPL 2026 में भड़का नया विवाद, RCB से जुड़े मामले में SRH करने वाली है BCCI से शिकायत!

---विज्ञापन---

लेकिन ये समझना मुश्किल है कि ऐसा कैसे होगा. ग्रीन ने अपने टी20 करियर के 73 मैचों में कुल 113.4 ओवर फेंके हैं. इसका मतलब है कि उसने हर मैच में औसतन 1.5 ओवर ही फेंके हैं. वहीं रसेल ने 590 मैचों में तकरीबन 1,500 ओवर फेंके हैं. KKR के लिए उसने 139 मैचों में 292 ओवर फेंके हैं. ग्रीन, रसेल की तरह एक कम्पलीट ऑलराउंडर नहीं है. कम से कम अभी तो बिल्कुल नहीं.

BCCI से अहम गुजारिश

बेबुनियाद आलोचना को तो फिर भी समझा जा सकता है. लेकिन भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने सुझाव दिया है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) एक मिसाल कायम करे और ग्रीन तथा उनके जैसे अन्य खिलाड़ियों पर बैन लगाए, जो वो परपफॉर्म नहीं कर पाते जिसके लिए उन्हें चुना गया था. पंजाब किंग्स के कूपर कोनोली और लखनऊ सुपर जायंट्स के मिशेल मार्श जैसे खिलाड़ियों को भी क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने ग्रीन की तरह ही गेंदबाजी करने की इजाजत नहीं दी है. गावस्कर इसे बेहद गलत मानते हैं.

---विज्ञापन---

सुनील गावस्कर ने की बैन की अपील

कुछ दिन पहले गावस्कर ने सुझाव दिया था कि जो खिलाड़ी गलत कारणों से आईपीएल से हट जाते हैं, उन पर बैन का मियाद बढ़ाई जानी चाहिए; इसके लिए उन्होंने बेन डकेट की मिसाल दी थी. अब गावस्कर चाहते हैं कि बीसीसीआई ग्रीन जैसे खिलाड़ियों पर बैन लगाने पर विचार करे, जो आईपीएल में बिना पूरी तैयारी के ही आ जाते हैं. उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने फ्रेंचाइजियों को ग्रीन, कोनोली या मार्श के बारे में पहले ही इंफॉर्म कर दिया था. आईपीएल, ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों की नीलामी से होने वाली कमाई का 10% हिस्सा उनके बोर्ड को देता है, और गावस्कर का मानना ​​है कि ये रकम इतनी काफी है कि वो पीछे हटें और फ्रेंचाइजियों को अपने हिसाब से फैसले लेने दें.

सुनील गावस्कर ने ‘स्पोर्टस्टार’ के लिए लिखे अपने कॉलम में लिखा, ‘एक गेंदबाज एक मैच में सिर्फ 4 ओवर ही फेंक सकता है… तो फिर उन्हें मैच में ऐसा करने से कौन रोक रहा है? ये बिल्कुल सही है कि जो खिलाड़ी पहले दिन से ही पूरी तरह फिट न हो, उसे खुद ही हट जाना चाहिए और फ्रेंचाइजी को किसी और खिलाड़ी को चुनने का मौका देना चाहिए. ये कहना कि फ्रेंचाइजी को ‘पहले ही सूचित कर दिया गया था’, कोई बहुत अच्छा बहाना नहीं है. शायद बीसीसीआई को अब इस मामले में दखल देना चाहिए और उन खिलाड़ियों के लिए भी कुछ इसी तरह के नियम बनाने चाहिए जो पहले मैच से ही अवेलेबल नहीं होते. क्या फ्रेंचाइजियां खिलाड़ियों से पूरी तरह से कमिटेड होने की उम्मीद नहीं कर सकतीं?’

---विज्ञापन---
First published on: Apr 07, 2026 08:07 PM

End of Article

About the Author

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 के डिजिटल सेक्शन में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वो स्पोर्ट्स की खबरें लिखते हैं. हालांकि उन्हें नेशनल, इंटरनेशनल, ट्रैवल, टेक, हेल्थ, लाइफस्टाइल और रिलेशनशिप सेक्शन का बेहतरीन तजुर्बा है. 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत करने के बाद, वो दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके. एजुकेशनल क्वालिफिकेशन की बात करें तो उन्होंने बैंगलौर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म, और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.

Read More
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola