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होली में पहनकर रंग और गुलाल खेले गए कपड़ों का क्या करें? जानें

होली खेलने के बाद रंग लगे कपड़ों को संभालने के संबंध में ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अपने अलग-अलग नियम और धारणाएं हैं। इन्हें फिर पहनना, घर में रखना या दान करना सही नहीं माना जाता है। आइए जानते हैं कि इन कपड़ों का क्या करना चाहिए?

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होली रंगों का त्योहार है, जिसमें हर कोई अपने मित्रों, पड़ोसियों और रिश्तेदारों के साथ खुशियों के रंगों में सराबोर हो जाता है। यहां तक इस दिन लोग अनजाने लोगों को भी रंगने में संकोच नहीं करते हैं। लेकिन होली खेलने के बाद रंग लगे कपड़ों का क्या करना चाहिए? यह एक महत्वपूर्ण सवाल है, जिसे ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार जानना आवश्यक है। आइए जानते हैं कि इन कपड़ों का क्या करना चाहिए?

होली के कपड़ों से जुड़ी ज्योतिषीय मान्यताएं

नकारात्मक ऊर्जा: ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, होली के दौरान उपयोग किए गए कपड़ों में नकारात्मक ऊर्जा का वास हो जाता है, जो व्यक्ति के जीवन में बाधाएं उत्पन्न कर सकती है। इस कारण से इन्हें दोबारा पहनना शुभ नहीं माना जाता है।

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धोकर पहनना है अशुभ: कई लोग होली के बाद कपड़ों को धोकर दोबारा उपयोग में लाना चाहते हैं, लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ऐसा करना अनुकूल नहीं होता। इससे जीवन में नकारात्मकता आ सकती है।

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दान करने से बचें: कई बार लोग होली के बाद रंगीन कपड़ों को गरीबों में बांट देते हैं, लेकिन यह भी अनुचित माना जाता है। ऐसे कपड़ों में जो ऊर्जाएं होती हैं, वे किसी अन्य व्यक्ति को भी प्रभावित कर सकती हैं।

वास्तु शास्त्र के अनुसार उपाय

होली के दौरान पहने गए कपड़ों को अपने घर में लंबे समय तक नहीं रखना चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जा घर में बनी रहती है, जिससे परिवार के सदस्यों को परेशानी हो सकती है। इन रंगीन कपड़ों को फेंकने का सही तरीका अपनाना जरूरी है। इन्हें कूड़ेदान में सही तरीके गांठ लगाकर फेंक सकते हैं। सबसे अच्छा उपाय यह ही कि इन्हें किसी गड्ढे में डालकर मिट्टी से ढंक दें।

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कई लोग इन्हें जलाने की कोशिश करते हैं, लेकिन ऐसा करने से पर्यावरण को नुकसान होता है और इससे वायुमंडल में नकारात्मक ऊर्जा फैल सकती है। यदि संभव हो तो इन कपड़ों को किसी पवित्र नदी या बहते जल में प्रवाहित कर सकते हैं। यह नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति पाने का एक पारंपरिक तरीका माना जाता है। लेकिन ध्यान रखें कि यह भी पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है।

यदि फिर उपयोग करना चाहें, तब?

यदि कोई व्यक्ति होली के कपड़ों को दोबारा उपयोग में लाना चाहते हैं, तो उन्हें पहले गंगाजल या किसी अन्य पवित्र जल में धो लें और फिर सूर्य के प्रकाश में सुखाएं। इसके बाद हनुमान जी या इष्ट देवता की पूजा करें और तभी इन कपड़ों को पुनः धारण करें। हालांकि, फिर भी इन्हें नियमित उपयोग में लाने से बचना चाहिए।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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First published on: Mar 15, 2025 08:44 PM

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About the Author

Shyamnandan

साल 2006 में 'सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल' मैगजीन से बतौर सब-एडीटर जर्नलिज्म की दुनिया में एंट्री करने वाले श्यामनंदन को लगभग 20 वर्षों का कार्यानुभव है। बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी (BHU) के स्टूडेंट रहे ये हमेशा से एक्सपेरिमेंटल रहे हैं। डिजिटल दुनिया में इनकी पैठ साल 2009 में मोबाइल वैस (Mobile VAS) कंटेंट से हुई। हिंदुस्तान टाइम्स (HT Media), इंडिकस एनालिटिक्स की लाइव मोबाइल (LiveMobile), इंस्टामेज जैसी कंपनियों में मोबाइल प्लेटफॉर्म के लिए काम करते-समझते और जल्द ही कई पायदान लांघते हुए प्रोडक्ट मैनेजर बने। मोबाइल प्लेटफॉर्म की समझ ने इनके एनडीटीवी (NDTV) में जाने का रास्ता आसान बनाया। इनके खाते में एनडीटीवी (NDTV) की 'आस्था' और 'जॉब अलर्ट्स' पेज लॉन्च करने का श्रेय दर्ज है। यहीं से इनकी वास्तविक ऑनलाइन जर्नलिज्म शुरू हुई। इंटरनेशनल रिलेशंस, जियो-पॉलिटिक्स, एनवायरनमेंट, साइंस टेक, एजुकेशन, हेल्थ, लाइफस्टाइल, फैशन और व्यंजन-रेसपी पर काफी लिखने के बाद ये 'धर्म और ज्योतिष' कंटेंट में रम गए। इस विषय को और गहराई से समझने और प्रस्तुत करने लिए इन्होंने भारतीय विद्या भवन (BVB), नई दिल्ली से एस्ट्रोलॉजी का कोर्स कंप्लीट किया। वर्तमान में News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे श्यामनंदन, बंसल न्यूज (भोपाल) के 'वेबसाईट हेड' भी रह चुके हैं। इनकी एक बड़ी खासियत है, रणनीति और योजना के साथ आगे बढ़ना। इनको YouTube और Facebook के लिए कंटेंट क्रिएशन और कंटेंट प्रमोशन के साथ-साथ SEO, SMO और SMM की अच्छी समझ है। जहां तक हॉबी की बात है, इनको पटकथा (Screenplay) और गजल लिखने, फिल्म देखने, खाना बनाने और पेंटिंग में विशेष रूचि है। संपर्क करें: 📧 Email: shyam.nandan@bagconvergence.in 🔗 LinkedIn: https://www.linkedin.com/in/shyamnandan-kumar/ 🐦 Twitter/X: @Shyamnandan_K

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