Varaha Jayanti 2026: वराह जयंती कब है? भगवान विष्णु ने क्यों लिया जंगली सूअर का अवतार? जानें महत्व और पूजा विधि

Varah Jayanti 2026: भगवान विष्णु ने पृथ्वी की रक्षा और सृष्टि के संतुलन के लिए वराह यानी जंगली सूअर का अवतार लिया था. उनके इस आक्रामक रूप में भी पाप के नाश और धर्म के संरक्षण का अक्षुण्ण भाव था. जानें साल 2026 में भगवान वराह की जयंती की तिथि कब है और महत्व, पूजा विधि क्या है?

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पृथ्वी को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने वराह अवतार लिया था. (Photo Credit: AI/News24)

Varah Jayanti 2026: हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु ने पाप का नाश करने और धर्म की संस्थापना के लिए बहुत अनोखे-अनोखे काम किए और ऐसे-ऐसे अवतार लिए हैं, जिनके बारे में सोचकर हैरत होती है। जरा कल्पना कीजिए, पूरी सृष्टि जलमग्न हो जाती और पृथ्वी का अस्तित्व खतरे में होता है। तब भगवान विष्णु एक बेहद आक्रामक और अनूठा रूप धारण करते हैं।

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भगवान विष्णु का वराह अवतार एक ऐसा ही अवतार है, जो रहस्यमय और आश्चर्यजनक है। वराह का अर्थ होता है- ‘जंगली सूअर’। इस अवतार में भगवान विष्णु की अदम्य शक्ति और इच्छा सामने उभर कर आती है, जिसमें आक्रामकता के साथ संरक्षण का भाव है। आइए जानते हैं, वर्ष 2026 में उनके इस अवतार की जयंती कब है और पूजा विधि और अनुष्ठान क्या हैं?

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वराह जयंती 2026 कब है?

वराह जयंती हर साल भाद्रपद मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल यह तिथि रविवार 13 सितंबर 2026 को पड़ रही है। पंचांग के अनुसार, तृतीया तिथि की शुरुआत 13 तारीख की सुबह में 7 बजकर 8 मिनट पर हो रही है और इस तिथि का समापन 14 सितंबर को 7 बजकर 8 मिनट पर हो रही है।

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पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त: द्रिक पंचांग के अनुसार, भगवान विष्णु के वराह रूप की पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त मध्याह्न यानी दोपहर में है, जो 1 बजकर 30 मिनट से अपराह्न के 4 बजे तक है।

भगवान ने क्यों लिया वराह अवतार?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, हिरण्याक्ष नामक असुर ने अपनी प्रचंड शक्ति से तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया था और देवताओं को भी स्वर्ग से निकाल दिया था। केवल इतना ही नहीं, उसने पृथ्वी को भी चुरा लिया था और उसे समुद्र के गर्भ में छिपा दिया था। इससे पूरी धरती पर भी त्राहि-त्राहि मची हुई थी। सृष्टि का संतुलन बिगड़ गया था।

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तब देवताओं के आह्वान पर भगवान विष्णु ने हिरण्याक्ष के अंत के लिए वराह अवतार लिया था। कहते हैं, हिरण्याक्ष ने ब्रह्मा जी से वरदान मांगा था कि वह किसी ज्ञात जीवों और पशुओं से नहीं मारा जाएगा, लेकिन वह वराह यानी जंगली शूकर या सूअर का नाम लेना भूल गया था। इसी का लाभ लेकर विष्णु जी ने एक विशाल और भयंकर वराह का अवतार लिया और हिरण्याक्ष का अंत कर पृथ्वी की रक्षा की।

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वराह जयंती पूजा विधि

  • वराह जयंती के दिन यानी 13 सितंबर 2026 को सुबह जल्दी उठकर स्नान-आचमन कर व्रत का संकल्प लें.
  • पूजा के समय जल से भरे एक कलश पर भगवान वराह की मूर्ति या फोटो स्थापित करें.
  • फिर, पंचामृत से वराह रूप भगवान विष्णु का अभिषेक करें.
  • भगवान को पीले वस्त्र, पीले पुष्प, मिष्टान्न और नैवेद्य चढ़ाएं.
  • पूजा के दौरान,’ॐ वाराहाय नमः’ मंत्र का जाप करें.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Shyamnandan

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श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
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