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ब्रह्मा,विष्णु और महेश को कैसे मिली थी शक्ति, जानिए कौन हैं मां सिद्धिदात्री?

Navratri 2025: नवरात्रि के अंतिम दिन माता सिद्धिदात्री का पूजन किया जाता है। माता को सिद्धियों की देवी माना जाता है। माता का पूजन त्रिदेवों ने भी किया था। माता का स्वरूप सिद्धियां और मोक्ष देने वाला माना जाता है। मान्यता है कि माता ने ही सृष्टि में शक्ति का संचार किया था। आइए जानते हैं मां सिद्धिदात्री की उत्पत्ति की कथा क्या है?

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Navratri 2025: नवरात्रि के आखिरी दिन माता दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री का पूजन किया है। माता का यह स्वरूप सिद्धि प्रदान करना वाला माना जाता है। मां के पूजन से व्यक्ति के सभी कार्य सिद्ध होते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। माता के इस स्वरूप का पूजन देवता, असुर, किन्नर, साधक, गृहस्थ, यक्ष और ऋषि मुनि आदि सभी करते हैं। माता समस्त संसार का कल्याण करती हैं, इस कारण उन्हें जगतजननी भी कहा जाता है।

श्रीमद् देवीभागवत पुराण के अनुसार सृष्टि के प्रारंभ में मां आदिशक्ति के स्वरूप सिद्धिदात्री ने देवताओं को सिद्धियां प्रदान की थीं। शिव पुराण के अनुसार सृष्टि की उत्पत्ति के समय शिव पूर्ण नहीं थे। उस समय उन्होंने माता सिद्धिदात्री की आराधना की तब माता ने उन्हें 8 सिद्धियां प्रदान कीं। मां की कृपा से ही भगवान शिव का आधा शरीर शक्ति को समर्पित हुआ और वे अर्द्धनारीश्वर कहलाए।

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कैसे हुई मां की उत्पत्ति?

शास्त्रों के अनुसार जब सृष्टि की रचना नहीं हुई थी, तब चारों ओर केवल अंधकार और शून्यता थी। उस समय पृथ्वी, आकाश और सूर्य आदि कुछ भी नहीं था। ऐसे समय एक प्रकाश उत्पन्न हुआ, जो स्वयं मां आदिशक्ति थीं। आदिशक्ति ने ब्रह्मा, विष्णु और महेश को उत्पन्न किया।

इन देवों का कार्य सृष्टि की रचना, पालन और संहार का था, लेकिन ये तीनों देव शक्तिहीन थे। इस कारण कुछ भी करने में समर्थ नहीं थे। इस पर मां आदि शक्ति ने मां सिद्धिदात्री का प्रकट किया। जो एक दिव्य रूप में पूर्णता, ज्ञान और सिद्धियों की दात्री थीं।

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त्रिदेवों को मिलीं शक्तियां

मां सिद्धिदात्री ने ब्रह्मा को सृष्टि की रचना की शक्ति और विष्णु को पालन की शक्ति और शंकर को संहार की शक्ति प्रदान की। इसके साथ ही उन्होंने 8 प्रमुख सिद्धियां (अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व) भी देवों को प्रदान कीं।

मां सिद्धिदात्री मंत्र

सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥

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स्तुति मंत्र

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।

मां के पूजन से मिलते हैं ये लाभ

माता सिद्धिदात्री के पूजन से मनुष्य को मन की शांति और पॉजिटिविटी प्राप्त होती है। इसके साथ ही व्यक्ति को मोक्ष मिलता है। डर दूर होता है और व्यक्ति का विवेक जाग्रत होता है।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्रों की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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First published on: Apr 06, 2025 07:57 AM

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About the Author

Mohit Tiwari

मोहित 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन सालों में इन्होंने कई बड़े मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। इनको फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क के साथ ही चैनल, प्रिंट और डिजिटल माध्यम में काम करने का अनुभव है। इसके साथ ही Astroyogi  व अन्य एस्ट्रोलॉजी प्लेटफॉर्म के लिए भी काम कर चुके हैं। इन्होंने एस्ट्रोलॉजी का गहन अध्ययन किया हुआ है। इसके चलते पुराणों और शास्त्रों में छिपे गूढ़ रहस्यों को लोगों तक सरल भाषा में पहुंचाने की कोशिश भी अपने आर्टिकल्स के माध्यम से करते हैं। धर्म के साथ ही लाइफस्टाइल के भी जटिल विषयों को सरलता से पाठकों के समक्ष रखते हैं। अब News 24 के साथ जुड़कर फीचर लेखन का कार्य कर रहे हैं।

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