---विज्ञापन---

Religion angle-right

शुक्र प्रदोष व्रत आज, जानिए कैसे करें पूजन से भोलेनाथ को प्रसन्न?

शुक्रवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को शुक्र प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती का पूजन हर प्रकार के सुख प्रदान करता है।

---विज्ञापन---

हिंदू धर्म में प्रदोष का बहुत अधिक महत्व होता है। हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान शिव की प्रदोष काल में आराधना करने से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। इसके साथ ही जीवन में सुख और समृद्धि का भी आगमन होता है।

वैशाख माह के कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत 25 अप्रैल शुक्रवार को पड़ रहा है। यह अप्रैल 2025 महीने का दूसरा और अंतिम प्रदोष होगा। वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 11 बजकर 44 से शुरू होगी और यह अगले दिन 26 अप्रैल की सुबह 8 बजकर 27 तक रहने वाली है।

---विज्ञापन---

क्या है पूजा मुहूर्त?

प्रदोष व्रत के दिन भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती का पूजन प्रदोष काल में ही किया जाता है। पंचांग के अनुसार 25 अप्रैल को प्रदोष काल शाम 6 बजकर 53 मिनट से शुरू होकर रात 9 बजकर 10 मिनट तक रहने वाला है। इस समय किया गया पूजन विशेष रूप से फलदायी रहेगा।

ऐसे करें प्रदोष के दिन पूजन

प्रदोष व्रत के दिन प्रदोष काल के समय नहाकर, साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद लकड़ी की चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर भगवान शिव की और पार्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद उनका पूजन करें। वहीं, अगर शिवलिंग है या फिर मंदिर में शिवलिंग की पूजा करने जाएं तो सबसे पहले जल से सबसे पहले शिवलिंग का अभिषेक करें। इसके बाद दूध, दही और फिर पंचामृत से प्रभु का अभिषेक करें।

---विज्ञापन---

इसके बाद घी, शहद, गन्ने का रस और फिर जल से अभिषेक करें। सबसे अंत में गंगाजल से अभिषेक करें। इसके बाद प्रभु को इत्र, वस्त्र, जनेऊ, अष्टगंध, चंदन, रोली, फूल माला, कमल आदि अर्पित करें। इसके साथ धतूरा, बेल व अन्य फलों का भी भोग प्रभु को लगाएं।

इसके बाद अक्षत, जौ आदि अनाज प्रभु को अर्पित करें और सबसे अंत में 5,7, 11 या 21 बेलपत्र भगवान भोलेनाथ को अर्पित करें। नैवेद्य के रूप में मिठाई भी अर्पित करें और प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें। महामृत्युंजय मंत्र का भी जाप करें और प्रभु की दीपक से आरती करें। अंत में उनसे क्षमा याचना करें। इस दिन आप अपनी श्रद्धा के अनुसार दान भी कर सकते हैं।

---विज्ञापन---

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्रों की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

First published on: Apr 25, 2025 02:22 AM

End of Article

About the Author

Mohit Tiwari

मोहित 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन सालों में इन्होंने कई बड़े मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। इनको फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क के साथ ही चैनल, प्रिंट और डिजिटल माध्यम में काम करने का अनुभव है। इसके साथ ही Astroyogi  व अन्य एस्ट्रोलॉजी प्लेटफॉर्म के लिए भी काम कर चुके हैं। इन्होंने एस्ट्रोलॉजी का गहन अध्ययन किया हुआ है। इसके चलते पुराणों और शास्त्रों में छिपे गूढ़ रहस्यों को लोगों तक सरल भाषा में पहुंचाने की कोशिश भी अपने आर्टिकल्स के माध्यम से करते हैं। धर्म के साथ ही लाइफस्टाइल के भी जटिल विषयों को सरलता से पाठकों के समक्ष रखते हैं। अब News 24 के साथ जुड़कर फीचर लेखन का कार्य कर रहे हैं।

Read More
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola