Santan Saptami 2026: 18 या 19 सितंबर, संतान सप्तमी व्रत कब है? जानें महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Santan Saptami 2026: संतान की लंबी आयु और उज्ज्वल भविष्य के लिए माता-पिता ‘संतान सप्तमी’ का व्रत रखते हैं. इस व्रत को संतान के लिए एक मजबूत ढाल माना गया है आइए जानते हैं, यह व्रत कब है, इसका शुभ मुहूर्त और स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि क्या है?

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संतान सप्तमी व्रत संतान की दीर्घायु और खुशहाली के लिए रखते हैं। (Photo Credit: AI/News24)

Santan Saptami 2026: दुनिया में ऐसे माता-पिता शायद ही होंगे, जिनका दिल अपने बच्चे के स्वास्थ्य, दीर्घ आयु और खुशहाली के लिए नहीं धकड़ता हो. मां-बाप अपने संतान के उज्ज्वल भविष्य के लिए हर जतन और उपाय करते हैं. खासकर माएं तो अपना सब कुछ न्यौछावर करने को तैयार रहती हैं और भांति-भांति के पूजा-पाठ और उपाय करती हैं कि बच्चों के रास्ते की मुश्किलें दूर हो जाएं. ऐसा ही के पावन व्रत है ‘संतान सप्तमी’, जिसे संतान की ढाल भी माना गया है. आइए जानते हैं, यह व्रत कब है, इसकी पूजा के लिए शुभ मुहूर्त क्या है और पूजा विधि क्या है?

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कब है संतान सप्तमी 2026?

संतान सप्तमी व्रत हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को रखा जाता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, सप्तमी तिथि की शुरुआत 17 सितंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट पर हो रही है और इसका समापन 18 सितंबर को दोपहर में 1 बजे होगा. उदयातिथि नियम के अनुसार, यह व्रत 18 सितंबर को ही रखना उत्तम और फलदायी है.

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संतान सप्तमी का महत्व

संतान हर भारतीय दंपति की एक आवश्यक चाहत है और संतान के उत्तम भविष्य के लिए संतान सप्तमी व्रत एक ‘महाकवच’ की तरह है. यह व्रत केवल माताएं ही नहीं कुछ जगहों पर पिता भी करते हैं. मान्यता है कि जिन दंपतियों को संतान सुख प्राप्त नहीं हुआ है, उनके लिए भी यह व्रत बेहद फलदायी है.

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पूजा का शुभ मुहूर्त

संतान सप्तमी व्रत एक लिए पूजा का सबसे उत्तम समय मध्याह्न काल यानी दोपहर का समय है, जो दोपहर में 12 बजकर 8 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक है. इसी पूजा अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 11 बजकर 36 मिनट से 12 बजकर 25 मिनट तक कर सकते हैं.

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संतान सप्तमी की पूजा विधि

संतान सप्तमी की पूजा विधि अलग-अलग क्षेत्रों में काफी भिन्न है. लेकिन यह पूजा भगवान शिव, मां पार्वती और गणेश जी की पूजा से जुड़ा है.

  • व्रती को सुबह नहा-धोकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए.
  • पूजा के समय एक स्थान पर चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर अक्षत या अनाज की ढेरी पर नारियल सहित कलश की स्थापित करना चाहिए.
  • चौकी पर महदेव शिव, माता पार्वती और गणेश जी प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए.
  • सबसे पहले दूर्वा और अक्षत्र से गणेश पूजा और फिर भगवान शिव और मां पार्वती अभिषेक और शृंगार करना चाहिए.
  • माता पार्वती को कुमकुम समेट सुहाग का हर सामान अर्पित करना चाहिए.
  • फिर सात गांठ लगी संतान सप्तमी का डोरा यानी रक्षा सूत्र को भगवान के चरणों में रखकर हल्दी-कुमकुम से पूजा करनी चाहिए.
  • फिर भगवान को 7 मीठी पूरिया या पुए का भोग लगाना चाहिए.
  • इसके बाद संतान सप्तमी व्रत की कथा सुनें और फिर ‘कर्पूरगौरं’ आरती करें.
  • पूजा पूरी होने के बाद संतान डोरा को बांह में बांधें और इसके बाद व्रत खोलें. पूजा में चढ़ाए 7 पूरियों या पुए में 4 खुद खाएं और 3 ब्राह्मण को दान दे दें.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Shyamnandan

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श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
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