Vishwakarma Puja 2026: 17 सितंबर को ही क्यों होती है विश्वकर्मा पूजा, क्या है धार्मिक कारण? जानें महत्व और शुभ मुहूर्त

Vishwakarma Puja 2026: पौराणिक ग्रंथों में भगवान विश्वकर्मा के जन्म को लेकर भाद्रपद की अंतिम तिथि और आश्विन कृष्ण प्रतिपदा का अलग-अलग उल्लेख मिलता है, जो इनकी पूजा की तारीख 17 सितंबर से मेल नहीं खाता है, क्योंकि ये तिथियां बदलती रहती है। आइए जानते हैं, हर साल 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा मनाने का मुख्य कारण क्या है?

vishwakarma-puja

सौर पंचांग के अनुसार हर साल विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर को कन्या संक्रांति के दिन होती है. (Photo Credit: News24)

Vishwakarma Puja 2026: हिन्दू धर्म के मान्यता है कि विश्वकर्मा पूजा भगवान विश्वकर्मा के जन्म के उपलक्ष्य में मनाया जाता है. इसकी तारीख हर साल 17 सितंबर ही क्यों पड़ती है, इसके लिए विशेष पौराणिक साक्ष्य प्राप्त नहीं होते हैं. कुछ ग्रंथों में यह कहा गया है कि भगवान विश्वकर्मा का प्राकट्य भाद्रपद मास की अंतिम तिथि को हुआ था, तो कुछ जगह उल्लेख मिलता है कि उनका जन्म आश्विन कृष्ण प्रतिपदा को हुआ था. वहीं, कुछ शास्त्रों में यह जिक्र मिलता है कि विश्वकर्मा पूजा चंद्र पंचांग पर आधारित नहीं होकर, सूर्य पंचांग पर आधारित है. सौर कैलेंडर के मुताबिक, 17 सितंबर को हर साल ‘कन्या संक्रांति’ होती है. यही कारण है कि विश्वकर्मा पूजा की तारीख और तिथि नहीं बदलती है.

विज्ञापन

कौन हैं भगवान विश्वकर्मा?

हिन्दू धर्म में भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का पहला अभियंता यानी इंजीनियर माना गया है. वे इस ब्रह्मांड एक मुख्य वास्तुकार भी हैं. पौराणिक कथाओं में उनको ब्रह्मा जी का सातवां पुत्र कहा गया है. धर्म ग्रंथों में वर्णन मिलता है कि विश्वकर्मा जी ने ही सोने की लंका, अलकापुरी, भगवान श्रीकृष्ण की द्वारका नगरी, इंद्रपुरी और पुष्पक विमान जैसी दिव्य रचनाएं बनाई थी. भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र, भगवान शिव का त्रिशूल, पिनाका और गांडीव धनुष, वज्र, यमराज का कालदण्ड जैसे अस्त्र-शस्त्र उन्होंने ही बनाए थे.

विज्ञापन

17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा के मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, 17 सितंबर को दिन के सुबह में 7 बजकर 58 मिनट पर सूर्यदेव कन्या राशि में प्रवेश करेंगे. इसके बाद से विश्वकर्मा पूजा आरंभ हो जाएगी और यह पूरे दिन में कभी भी की जा सकती है. लेकिन इसका बेस्ट टाइम अभिजीत मुहूर्त में सुबह 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर के 12 बजकर 40 मिनट तक है. लेकिन दुकान और फैक्ट्रियों के लिए दोपहर 12 बजकर16 मिनट से दोपहर 1 बजकर 48 मिनट तक समय भी उत्तम है.

विज्ञापन

विश्वकर्मा पूजा का महत्व

17 सितंबर को पूरे भारतवर्ष के कल-कारखानों, मोटर गैराजों और मशीनों, कल-पुर्जों, पाना-रिंच से काम करने वाले सभी लोग भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते हैं. यह देखा गया है कि अब यह पूजा धर्म निरपेक्ष जैसा हो गया है. इसे जैन, बौद्ध, सिख यहां तक कि और भी धर्म के लोग इसे मनाने लगे हैं. क्योंकि यह पूजा श्रम को सम्मान देता है. इससे तरक्की और सुरक्षा की कामना जुड़ी होती है.

विज्ञापन

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

विज्ञापन

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Shyamnandan

Shyamnandan

श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
... और पढ़ें
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ