Anant Chaturdashi 2026 Date: अनंत चतुर्दशी कब है? इस दिन क्यों बांधते हैं 'अनंत डोरा'? जानें 14 गांठों का रहस्य

Anant Chaturdashi 2026 Date: अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर भक्त और साधक 14 गांठों वाला धागा अपनी बांह में बांधते हैं, जिसे अनंत सूत्र या अनंत डोरा कहते हैं. आइए जानते हैं, क्यों बांधते हैं यह धागा और इस डोरे की 14 गांठों का रहस्य क्या है?

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अनंत चतुर्दशी पर 14 गांठों वाला धागा भगवान विष्णु के अनंत रूप से जोड़ता है. (Photo Credit: AI/News24)

Anant Chaturdashi 2026 Date: हिन्दू धर्म में पूरे साल में एक दिन ऐसा आता है, जब धागे का एक छोटा-सा टुकड़ा और उसमें बनी 14 गांठें जीवन की दिशा बदल देती हैं. यह दिन होता है भाद्रपद मास की चतुर्दशी तिथि, जिसे ‘अनंत चतुर्दशी’ कहते हैं. इसी दिन गणेश चतुर्थी उत्सव एक गणपति मूर्ति का विसर्जन होता है. इस प्रकार यह एक ऐसा दिन है, जो एक तरफ प्रथमपूज्य देव गणेश की विदाई का दिन होता है, तो दूसरी ओर यह हमें जगत के पालनहार विष्णु के अनंत रूप भी से जोड़ता है. आइए जानते हैं, इस वर्ष यह दिन कब है, इस दिन अनंत डोरा क्यों बांधते हैं और इस डोरे की 14 गांठों का रहस्य क्या है?

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अनंत चतुर्दशी 2026 कब है?

द्रिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 25 सितंबर, 2026 को रात में 11 बजकर 18 मिनट पर आरंभ होगी और यह अगले दिन 25 सितंबर को रात में 11 बजकर 6 मिनट पर समाप्त होगी. उदायतिथि नियम के आधार पर अनंत चतुर्दशी और गणपति विसर्जन 25 सितंबर, 2026 को मनाया जाएगा. आपको बता दें कि अनंत चतुर्दशी भगवान विष्णु की प्रत्यक्ष कृपा दिलाने वाला व्रत माना गया है. इससे सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है और कष्टों से मुक्ति मिलती है.

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क्यों बांधते हैं ‘अनंत डोरा’?

अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के भक्त, विशेषकर वैष्णव लोग, विष्णु जी के अनंत रूप की पूजा के बाद पुरुष दाहिनी बांह और महिलाएं बायीं बांह पर एक विशेष धागा बांधते हैं, जिसे अनंत सूत्र, अनंत धागा या अनंत डोरा कहते हैं. इस धागे को पूजा में पवित्र किया जाता है. मान्यता है कि इस धागा या डोरा में भगवान विष्णु का वास होता है. इसे धारण करने से संकटों का अंत होता है और सुख के दिन आरंभ होते हैं.

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क्या है ‘अनंत सूत्र’ के 14 गांठ कर रहस्य

अनंत सूत्र या अनंत डोरे में प्रायः सूती धागा या रेशम का उपयोग किया जाता है. इस सूत्र को बनाने के दौरान इसमें 14 गांठें लगाई जाती है. प्रायः इसे हल्दी, कुमकुम या केसर से रंगा जाता है. मान्यता है कि इसकी 14 गांठें 14 भुवन यानी लोक के प्रतीक हैं, जिसके पालनकर्ता भगवान विष्णु हैं. कहते हैं, इस सूत्र या डोरा को धारण करने वालों को इन 14 लोकों के स्वामियों की कृपा मिलती है. आपको बता दें कि हिन्दू धर्म शास्त्रों में वर्णन मिलता है 14 लोकों में से 7 ऊपर के लोक हैं, तो 7 पाताल में नीचे के लोक हैं.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Shyamnandan

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श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
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