Raksha Bandhan Story: रक्षाबंधन हर साल सावन पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं. भाई उनकी रक्षा का वचन देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर राखी बांधने की यह परंपरा शुरू कैसे हुई? इसके पीछे सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि कई पौराणिक कथाएं मिलती हैं. इन कहानियों में भाई-बहन का प्यार, अपनापन और एक-दूसरे की रक्षा का भाव साफ दिखाई देता है. आइए, जानते हैं राखी से जुड़ी 4 ऐसी ही दिलचस्प कथाएं और जानिए किसने बांधी थी पहली राखी?
इंद्र को इंद्राणी ने बांधा था रक्षा सूत्र
पौराणिक कथा के अनुसार, देवताओं और असुरों के बीच भयंकर युद्ध चल रहा था. युद्ध में देवताओं की स्थिति कमजोर होने लगी. तब इंद्राणी ने भगवान विष्णु की पूजा की. उन्होंने मंत्रों का जाप करके एक रक्षा सूत्र तैयार किया और इंद्र की कलाई पर बांध दिया. इसके बाद इंद्र ने पूरी ताकत से युद्ध किया और देवताओं को जीत मिली. माना जाता है कि यहीं से रक्षा सूत्र को संकट से बचाने वाली शक्ति के प्रतीक के रूप में देखा जाने लगा.
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भाई-बहन यमराज और यमुना की कथा
एक दूसरी पौराणिक कथा यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ी है. यमुना लंबे समय से अपने भाई के आने का इंतजार कर रही थीं. जब यमराज उनके घर पहुंचे, तो यमुना ने उनका प्यार से स्वागत किया. उन्होंने पूजा की और भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा. यमुना के स्नेह से खुश होकर यमराज ने उन्हें वरदान दिया. उन्होंने कहा कि जो बहन इस तरह अपने भाई को रक्षा सूत्र बांधेगी, उसके भाई को लंबी उम्र और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलेगा. इसी कथा को भाई-बहन के प्यार और सुरक्षा से जोड़कर देखा जाता है.
माता लक्ष्मी और राजा बलि की कथा
राखी से जुड़ी एक प्राचीन कथा भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और राजा बलि से भी जुड़ी है. कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने राजा बलि को वचन दिया था कि वे उनके राज्य में स्थायी रूप से रहेंगे और रहने लगे थे. यह घटना जानकर माता लक्ष्मी भगवान विष्णु को वापस लाना चाहती थीं. इसलिए वे राजा बलि के पास पहुंचीं. उन्होंने बलि की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा और उन्हें अपना भाई मान लिया. राजा बलि ने भी इस रिश्ते को दिल से स्वीकार किया. इसके बाद उन्होंने माता लक्ष्मी को भाई-बहन के रिश्ते का मान देते हुए भगवान विष्णु को उनके साथ जाने की अनुमति दी. यह कथा बताती है कि रक्षा सूत्र सिर्फ खून के रिश्ते तक सीमित नहीं है.
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कृष्ण और द्रौपदी की कहानी
महाभारत की एक प्रसिद्ध कथा भगवान कृष्ण और द्रौपदी से जुड़ी है. एक बार कृष्ण की उंगली में चोट लग गई और खून निकलने लगा. यह देखकर द्रौपदी ने बिना देर किए अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़ा और कृष्ण की उंगली पर बांध दिया. द्रौपदी के इस छोटे-से स्नेह ने कृष्ण को भावुक कर दिया. उन्होंने हमेशा उनकी रक्षा करने का वचन दिया. कहते हैं, जब कौरव सभा में द्रौपदी का अपमान हुआ, तो कृष्ण ने उनकी लाज बचाई. यह कथा बताती है कि रक्षा का रिश्ता सिर्फ एक धागे से नहीं बनता, बल्कि उसके पीछे प्रेम, भरोसा और अपनापन सबसे ज्यादा मायने रखता है.
क्या कर्णावती ने हुमायूं भेजी थी राखी?
राखी से जुड़ी एक और कहानी रानी कर्णावती और मुगल शासक हुमायूं की कही और सुनी जाती है. कहते हैं, एक समय राजस्थान के एक राज्य चित्तौड़ पर संकट के समय रानी कर्णावती ने हुमायूं को राखी भेजकर मदद मांगी थी. लेकिन आपको बता दें कि लोक कथाओं के अतिरिक्त इसका कोई ठोस ऐतिहासिक प्रमाण अभी तक नहीं मिला है. इतिहासकार सतीश चंद्र के अनुसार, इसका को ऐतिहासिक और प्रामाणिक दस्तावेज नहीं प्राप्त हुआ है. फिर भी यह कहानी राखी की सार्वभौमिकता और इसके सांस्कृतिक प्रभाव को दर्शाती है.
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