Ganpati Visarjan Mistakes: 17 सितंबर 2026 को गणपति पूजा का पांचवां दिन है. अब कई जगहों पर सार्वजनिक गणेश उत्सव पूजा के गणपति का विसर्जन होना शुरू हो जाएगा. गणपति पूजा के नियमों के अनुसार, जो गणपति की स्थापना करते हैं, वे डेढ़ दिन, 5 दिन, 7 दिन और 10 दिन की अपनी-अपनी मान्यता और संकल्प से अनुसार, गणपति जी की मूर्ति का विधि-विधान से विसर्जन करते हैं.
न करें गणपति विसर्जन में ये 7 गलतियां
आपको बता दें कि शास्त्रों के अनुसार गणपति विसर्जन के कुछ नियम बेहद कड़े हैं. जिनका पालन न करने से गणेश जी रुष्ट हो सकते हैं और घर का उत्सव दुख और परेशानियों में घिर सकता है. आइए जानते हैं, ‘गणपति बप्पा मोरया’ की अगली पंक्ति में ‘अगले बरस तू जल्दी आ’ की गूंज का जयकारा लगाते समय गणपति के विसर्जन में कौन-सी 7 गलतियां नहीं करनी चाहिए?
बिना पूजा-भोग के विसर्जन
शास्त्र के अनुसार, गणपति के विसर्जन में कभी जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए. विसर्जन से पहले आरती और भजन के साथ विधिवत ‘उत्तरंग पूजा’ जरूर करनी चाहिए. भोग में मोदक, लड्डू, मोहन भोग और फल जरूर अर्पित करें.
निर्माल्य को इधर-उधर फेंकना
हिन्दू धर्म के नियमों के अनुसार, गणपति पूजा-पाठ में व्यवहार किए गए फूल, पान, सुपारी, नारियल, माला, दूर्वा आदि को ‘निर्माल्य’ कहते हैं. पूजा के बाद और विसर्जन के समय इन चीजों को सड़कों, कूड़े के ढेर, नालियों आदि में भूल से भी न फेंकें.
भोग में तुलसी दल चढ़ाना
शास्त्रों के विधान के अनुसार, गणेश पूजन में तुलसी के पत्ते अर्पित नहीं किए जाते हैं. इसलिए न तो पूजा के समय और न ही विसर्जन में लगाए गए अंतिम भोग में तुलसी दल नहीं डालना चाहिए.
विसर्जन के समय प्रतिमा का मुख गलत दिशा में रखना
प्रचलित मान्यता और रिवाजों के अनुसार, जब गणपति जी का विसर्जन किया जाता है, तब उनको ले जाते समय उनका मुख पूजा करने वाले भक्त या पूजन स्थल की ओर रहना चाहिए. विसर्जन के समय आपका भाव ऐसा होना चाहिए कि जैसे सबसे प्रिय अतिथि को विदा कर रहे हैं.
अमर्यादित-उच्छृंखल व्यवहार
विसर्जन में उत्साह होना चाहिए, क्योंकि यह विदाई है. ढोल-ताशों और नाच-गाना भी ठीक है. लेकिन यह अश्लील, अमर्यादित और उच्छृंखल प्रकार का बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए. विसर्जन के समय अत्यधिक उछल-कूद या हुड़दंग नहीं होना चाहिए.
गणेश जी के आगे चलना
हिन्दू संस्कृति के अनुसार, जब मूर्ति विसर्जन के अनुष्ठान की यात्रा पर निकलते हैं, तो रास्ते में भक्तों और साधकों को हमेशा मूर्ति के पीछे चलना चाहिए. मूर्ति के आगे चलना गणपति जी का अपमान माना जाता है.
विसर्जन के बाद नकारात्मकता
यह देखा गया है कि गणपति पूजा समाप्त होने के बाद मन मायूस-सा होता है. ऐसा लगता है कि कुछ खो गया है. लोगों के मन में निराशा और नकारात्मकता भी आ सकती है. इससे बचना जरूरी है. विसर्जन के बाद झगड़ा करने से बचें. विवाद न करें. अपशब्द न बोलें.