Kaalchakra Today: मां लक्ष्मी के आठ रूपों में वैभव लक्ष्मी भी एक है, जिसकी आराधना करने से जीवन में सुख, समृद्धि के साथ अपार धन और सौभाग्य प्राप्त होता है। यह व्रत शुक्रवार को ही किया जाता है। कालचक्र कार्यक्रम में पंडित सुरेश पांडेय बताते हैं कि इस व्रत को 7, 11 या 21 शुक्रवार तक किया जाता है। इसकी पूजा शाम में की जाती है और पूजा में वैभव लक्ष्मी की कथा जरूर पढ़ी जाती है। इससे दरिद्रता अपने आप दूर होती है। आइए जानते हैं, इस व्रत का सम्पूर्ण लाभ क्या है और पूजा कौन सी गलती नहीं करनी चाहिए, वरना वह भारी पड़ जाती है?
वैभव लक्ष्मी व्रत के लाभ
पंडित सुरेश पांडेय के अनुसार, वैभव लक्ष्मी व्रत से जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है। धन के मामले में अगर नुकसान हो रहा है, तो वह रुक जाता है। अगर कोई कानूनी मसला जीवन को परेशान कर रहा है, तो वह रुक जाता है। छात्रों की पढ़ाई में आ रही रुकावट दूर होती है। बिजनेस और जॉब में तरक्की मिलती है। इनकम ने नए सोर्स बनते हैं। धन आमद का प्रवाह तेज होता है। सौभाग्य में वृद्धि होती है। लाइफ पार्टनर के साथ हेल्थ और आयु पर पॉजिटिव असर होता है। घर-परिवार के झगड़े-क्लेश समाप्त हो जाते हैं।
कुंवारी लड़कियां भी कर सकती हैं व्रत
पंडित जी यह भी कहते हैं कि वैभव लक्ष्मी की पूजा और व्रत में सत्विकता का पालन सबसे जरूरी है। यह मन, वचन और कर्म तीनों से होता है। विवाहित महिलाओं के लिए यह व्रत सबसे उत्तम है, लेकिन इसे कुंवारी लड़कियां भी कर सकती हैं। पुरुष भी श्री यंत्र की स्थापना और श्री सूक्तं का पाठ कर सकते हैं। इसकी पूजा से निस्संदेह घर में धन-धान्य भरा रहता है।
न करें ये गलतियां
पंडित जी बताते हैं कि वैभव लक्ष्मी व्रत में श्री यंत्र की पूजा जरूरी है। इसके साथ ही श्री सूक्तं और कनकधारा स्तोत्र का पाठ भी आवश्यक है। लेकिन वैभव लक्ष्मी व्रत में कुछ गलतियां भारी पड़ सकती हैं। इसमें तामसी भोजन, मांसाहार, लहसुन-प्याज वर्जित होता है। खट्टी चीज बिल्कुल नहीं खानी चाहिए। स्वभाव को विनम्र और साफ रखना चाहिए। किसी कि निंदा, चुगली या बुराई नहीं करनी चाहिए। किसी इस ईर्ष्या या घृणा नहीं करनी चाहिए।
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कालचक्र के इस कार्यक्रम को आप नीचे दिए वीडियो में देख सकते हैं:
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.