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Raksha Bandhan 2026: साल में सिर्फ एक दिन खोला जाता है उत्तराखंड का ये मंदिर, रक्षाबंधन पर खुलते हैं कपाट

Raksha Bandhan 2026: उत्तराखंड में एक ऐसा मंदिर मौजूद है, जो केवल रक्षाबंधन के दिन ही खुलता है. इस मंदिर के कपाट केवल एक दिन के लिए खुलते हैं. इस मंदिर के बारे में रोचक बातें जानते हैं.

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Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन का पर्व इस साल 28 अगस्त को मनाया जाएगा. पंचांग के अनुसार, सावन माह की पूर्णिमा पर रक्षाबंधन मनाया जाता है. रक्षाबंधन के पावन पर्व पर बहन भाई को राखी बांधती हैं. इस दिन को भाई-बहन के रिश्ते के प्रतीक के तौर पर मनाया जाता है. उत्तर भारत के उत्तराखंड में एक ऐसा मंदिर है, जो रक्षाबंधन के लिए खोला जाता है. उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है. उत्तराखंड में मौजूद वंशी नारायण मंदिर रक्षाबंधन के दिन खोला जाता है.

वंशी नारायण मंदिर, उत्तराखंड

उत्तराखंड का वंशी नारायण मंदिर चमोली जिले की उर्गम घाटी में स्थित है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर को केवल रक्षाबंधन के दिन ही खोला जाता है. बाकि, के 364 दिन मंदिर बंद रहता है. रक्षाबंधन के दिन सूर्योदय के बाद से लेकर सूर्यास्त तक मंदिर के कपाट खोले जाते हैं. इसके बाद मंदिर को फिर से पूरे साल के लिए बंद कर दिया जाता है. वंशी नारायण मंदिर में भगवान नारायण और भगवान शिव दोनों की मूर्तियां स्थापित हैं.

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रक्षाबंधन पर ही क्यों खुलता है मंदिर?

वंशी नारायण मंदिर के रक्षाबंधन के दिन खुलने को लेकर एक पौराणिक कथा है. पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु राजा बलि की अपार भक्ति से प्रसन्न होकर पाताल लोक में उनके द्वारपाल बने थे. इसके कारण मां लक्ष्मी को कई दिनों तक विष्णु भगवान के दर्शन नहीं हुए. इसके बाद वह नारद मुनि के पास गई. तब नारद मुनि ने मां लक्ष्मी को पूरी कहानी बताई. उन्होंने सावन पूर्णिमा के दिन राजा बलि को रक्षासूत्र बांधकर विष्णु जी के वामन अवतार की मुक्ति मांगने के लिए कहा.

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मां लक्ष्मी ने सावन पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन के दिन रक्षासूत्र बांधकर भगवान विष्णु को मुक्त कराया. इसके बाद भगवान विष्णु ने पाताल लोक से मुक्त होने के बाद उत्तराखंड के इसी वंशी नारायण मंदिर में दर्शन दिए थे. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर में साल के 364 दिन नारद मुनि भगवान विष्णु की पूजा करते हैं. सावन पूर्णिमा के दिन वह माता लक्ष्मी के साथ पातल लोक गए थे. इसी मान्यता के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन मंदिर के कपाट खोले जाते हैं और स्थानिय लोग मंदिर में पूजा करते हैं.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र और सामान्य मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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First published on: Aug 27, 2026 07:57 AM

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