Premanand Maharaj: प्रेमानंद महाराज कौन हैं, कैसे बने संत, असल नाम क्या है… जानें पूरी जीवनी

Premanand Ji Maharaj: वर्तमान में प्रेमानंद महाराज का नाम राधा रानी के परम भक्तों में गिना जाता है, जिनकी प्रसिद्धि देश ही नहीं विदेश तक में फैली है. लेकिन क्या आपको पता है प्रेमानंद महाराज कौन हैं, उनका असली नाम क्या है, उन्होंने कब और कैसे भक्ति के मार्ग में कदम रखा है? यहां पर आपको प्रेमानंद महाराज के जीवन से जुड़े तमाम सवालों के जवाब मिल जाएंगे.

Premanand Ji Maharaj

Credit- Social Media

Premanand Ji Maharaj: राधा रानी को कृष्ण जी की परम सखी माना जाता है, जिनसे लोगों की खास आस्था जुड़ी है. इस समय राधा रानी के भक्त देश ही नहीं विदेश में भी फैले हुए हैं, जो उनकी नियमित रूप से पूजा-अर्चना करते हैं. हालांकि, जब भी राधा रानी के भक्तों का जिक्र होता है तो सबसे पहले संत प्रेमानंद महाराज का नाम आता है. वर्तमान में प्रेमानंद महाराज सत्संग और कीर्तन के माध्यम से ‘राधा नाम’ और ‘राधावल्लभ संप्रदाय’ का प्रचार-प्रसार के लिए जाने जाते हैं. लेकिन क्या आपको पता है प्रेमानंद महाराज का असली नाम क्या है, कैसे वो एक संत बने, वो केवल वृंदावन में ही क्यों रहते हैं? यदि नहीं, तो चलिए जानते हैं उनकी पूरी जीवनी के बारे में.

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प्रेमानंद महाराज का असली नाम क्या है?

प्रेमानंद महाराज एक प्रसिद्ध हिंदू संत और आध्यात्मिक गुरु हैं, जिन्हें ‘राधा नाम’ और ‘राधा वल्लभ संप्रदाय’ के प्रचारक के रूप में जाना जाता है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रेमानंद महाराज का असली नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे है और उनका जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के सरसौल गांव में 30 मार्च 1969 (अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक) को हुआ है. लेकिन बाबा अपना जन्मदिन हिंदू कैलेंडर विक्रम संवत के हिसाब से हर साल चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मनाते हैं.

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हालांकि, प्रेमानंद महाराज का असली नाम सार्वजनिक रूप से कम ही लिया जाता है क्योंकि संत बनने के बाद उन्होंने सांसारिक पहचान का त्याग किया है.

ब्राह्मण परिवार में हुआ जन्म

बता दें कि प्रेमानंद महाराज एक ब्राह्मण परिवार में पैदा हुए हैं. उनके पिता का नाम शंभू पांडे और माता का नाम रामा देवी है. हालांकि, प्रेमानंद महाराज के माता-पिता जीवित हैं या नहीं, इसकी कोई जानकारी नहीं है क्योंकि बाबा ने बहुत ही कम उम्र में अपना घर छोड़ दिया था, जिसके बाद वो उनसे कभी नहीं मिले. लेकिन पूज्य प्रेमानंद महाराज की बहन जिंदा हैं, जो एक साधिका हैं. हाल ही में रक्षाबंधन के अवसर पर वो बाबा से मिलने के लिए वृंदावन भी आई थी.

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महज 13 साल की उम्र में छोड़ दिया था घर

कहा जाता है कि बचपन से ही प्रेमानंद महाराज का झुकाव भगवान की भक्ति की ओर था. महज 13 वर्ष की आयु में वो अपने घर से भाग गए थे. उन्होंने कुछ साल काशी में गंगा किनारे सन्यासी जीवन व्यतीत किया और कड़ी तपस्या की, जिसके बाद वो वृंदावन जाकर राधा वल्लभ संप्रदाय से जुड़ गए. साथ ही श्री गौरांगी शरण जी से दीक्षा ली. इसी के बाद से उन्होंने अपना जीवन राधा रानी की सेवा में समर्पित कर दिया.

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प्रेमानंद महाराज की खराब हैं दोनों किडनी

कई बार प्रेमानंद महाराज ने खुद बताया है कि उनकी दोनों किडनी खराब हैं. उनका नियमित रूप से डायलिसिस होता है. लेकिन ये राधा रानी की ही कृपा है कि वो अभी तक जीवित हैं.

प्रेमानंद महाराज वृंदावन से बाहर क्यों नहीं जाते?

प्रेमानंद महाराज वृंदावन के श्री हित राधा केलि कुंज आश्रम में ही रहते हैं. बता दें कि प्रेमानंद महाराज ने ‘क्षेत्र संन्यास’ ले रखा है, जिसके अनुसार वो ब्रज की पवित्र सीमा छोड़कर बाहर नहीं जा सकते हैं. इसी वजह से देश के प्रभावशाली लोग भी उनसे मिलने के लिए वृंदावन जाते हैं.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी सोशल मीडिया पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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