Pranam Benefits: बड़े-बुजुर्गों के पैर छूना नैतिक जिम्मेदारी है या धार्मिक संस्कार, जानें प्रणाम का वैज्ञानिक महत्व

Pranam Benefits: हिन्दू धर्म में बड़ों के पैर छूना सम्मान और संस्कार से जुड़ी पुरानी परंपरा है. प्रणाम में विनम्रता, भावनात्मक जुड़ाव और शारीरिक गतिविधि का मेल दिखता है. आइए जानते हैं, चरण स्पर्श सिर्फ नैतिक जिम्मेदारी है या इसके पीछे वैज्ञानिक पहलू भी हैं.

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बड़ों के पैर छूना सम्मान, संस्कार और धार्मिक आस्था से जुड़ी परंपरा है। (फोटो क्रेडिट: AI | News24)

Pranam Benefits: भारत में बचपन से बच्चों को सिखाया जाता है कि बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लेना चाहिए. भारतीय घरों में, विशेषकर हिन्दू धर्म में, इसे सम्मान और अच्छे संस्कार से जोड़कर देखा जाता है. लेकिन बदलते समय में एक सवाल भी उठता है. वह यह कि आखिर प्रणाम करने की यह परंपरा इतनी पुरानी होकर भी आज तक क्यों कायम है? इसका जवाब सिर्फ धार्मिक मान्यताओं में नहीं मिलता है. झुककर प्रणाम करने में सम्मान, विनम्रता, शारीरिक गतिविधि और भावनात्मक जुड़ाव का सुंदर मेल दिखाई देता है. यही वजह है कि आज भी यह परंपरा भारतीय परिवारों में अपनी खास जगह बनाए हुए है. आइए जानते हैं, बड़े-बुजुर्गों के पैर छूना केवल नैतिक जिम्मेदारी है या धार्मिक संस्कार और क्या प्रणाम का कोई वैज्ञानिक महत्व भी है?

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सम्मान का संस्कार

हिंदू परंपरा में बड़ों के झुककर चरण स्पर्श करने को बेहद सम्मान और विनम्रता का प्रतीक माना गया है. इसके जरिए व्यक्ति अपने से बड़े और अनुभवी लोगों के प्रति आदर जताते हैं. लेकिन साथ ही इससे आशीर्वाद लेने की परंपरा भी इसी भाव से जुड़ी है. बुजुर्ग जब स्नेह से आशीर्वाद देते हैं, तो परिवार में अपनापन और भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाता है.

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अहंकार पर लगाम

प्रणाम करने के लिए शरीर को झुकाना पड़ता है. यह छोटा सा व्यवहार मनोवैज्ञानिक तौर पर भी विनम्रता का भाव पैदा करता है. सामने वाले को सम्मान देना रिश्ते में सकारात्मक माहौल बनाता है. यह खास तौर पर बच्चों और युवाओं के लिए सामाजिक व्यवहार सीखने का एक तरीका भी है.

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रिश्तों में जुड़ाव

प्रणाम का सबसे व्यावहारिक असर सामाजिक स्तर पर दिखाई देता है. जब कोई युवा सम्मान से झुककर प्रणाम करता है, तो सामने वाले को महत्व मिलने का एहसास होता है. बदले में मिलने वाला स्नेह रिश्ते को मजबूत करता है.

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चरण स्पर्श का वैज्ञानिक पहलू

हिन्दू धर्म में चरण स्पर्श सिर्फ सम्मान जताने का तरीका नहीं माना जाता है. मान्यता है कि मस्तिष्क सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र होता है और पैर ऊर्जा के प्रवाह से जुड़े होते हैं. जब हम किसी बड़े या पूज्य व्यक्ति के पैर छूते हैं, तो हाथों की उंगलियां उनके पैरों से संपर्क करती हैं. इसे ऊर्जा के एक तरह के सर्किट से जोड़ा जाता है. इससे एक्यूप्रेशर जैसा प्रभाव मिलता है और शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है.

झुकने का शरीर पर असर

झुककर पैर छूने से कमर और रीढ़ की स्ट्रेचिंग होती है. इससे शरीर का लचीलापन बनाए रखने में मदद मिलती है. घुटनों के बल बैठकर प्रणाम करने से घुटनों और जोड़ों की हल्की एक्सरसाइज हो जाती है. वहीं, साष्टांग प्रणाम में पूरा शरीर जमीन के करीब आता है और शरीर की कई मांसपेशियों में स्ट्रेचिंग होती है. इससे मन को रिलैक्स महसूस होता है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Shyamnandan

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श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
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