Nimbu Mirchi: आपने अनेक दुकानों, संस्थानों और घरों के दरवाजे पर नींबू-मिर्ची की माला लटकी देखी होगी. क्या आपने कभी ये सोचा है, क्यों ये परंपरा बदस्तूर चली आ रही है? आपको बता दें कि नींबू-मिर्ची यह परंपरा महज एक रिवाज नहीं नहीं है. दरअसल, जनमानस की धारणा है कि यह ‘खुशहाली का सिक्योरिटी गार्ड’ और एक अचूक नजरबट्टू है. सदियों से चली आ रही इस परंपरा में इसे लगाने, बदलने और फेंकने के भी कुछ खास नियम भी हैं. कहते हैं, जरा सी लापरवाही महंगी पड़ जाती है. वहीं इसे सही विधि से लगाने पर यह बुरी नजर और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करता है. आइए, जानते हैं नींबू-मिर्ची लगाने, बदलने और विसर्जित करने की सटीक विधि, जो किस्मत बदल सकती है.
सही दिन और समय
नींबू-मिर्ची लगाने के लिए शनिवार का दिन सबसे शुभ माना गया है. कुछ परंपराओं में इसे मंगलवार को भी बदलते हैं. मान्यता है कि इसे हमेशा सुबह या शाम के समय लगाना शुभ और फलदायी होता है. इसे स्नान और पूजा-पाठ के बाद ही मुख्य द्वार पर टांगना चाहिए.
कब-किस दिन नहीं लगाएं: दोपहर या रात के समय इसे लगाने से बचना आवश्यक है. साथ ही यह ध्यान रखें कि अमावस्या या पितृपक्ष के दिन नई नींबू-मिर्ची न लगाएं, क्योंकि यह परिणाम नहीं दे पाता है.
बनाने और लगाने का सही तरीका
इसे बनाने के लिए एक साबुत नींबू और सात हरी मिर्च की जरूरत होती है. फिर इन्हें पिरोने के लिए काले रंग के सूती धागे का इस्तेमाल किया जाता है. ध्यान रखें, यदि इसे आप खुद बना रहे हैं, तो सबसे नीचे नींबू रखें और फिर उसके ऊपर सातों मिर्च पिरोएं.
कहां और कैसे लगाएं: इसे घर या दुकान के मुख्य दरवाजे के ठीक बीचों-बीच लटकाएं. ऊंचाई ऐसी रखें कि आने-जाने वालों का सिर इससे न टकराए, लेकिन बाहर से आने वालों की नजर इस पर जरूर पड़े.
मंत्र और शुभता
नींबू-मिर्ची की माला बनाते या बांधते समय “ॐ हनुमते नमः”, “ॐ नमः शिवाय” या “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का मानसिक जाप करें. इससे यह और अधिक प्रभावी हो जाता है और बुरी शक्तियां आपके घर के पास नहीं फटकतीं.
बदलने और फेंकने का सही नियम
पुरानी नींबू-मिर्ची को हर शनिवार को ही उतारकर नई लगानी चाहिए. अगर यह बीच में ही सूख जाए या काली पड़ जाए, तो उसे तुरंत हटा दें. उतारी गई पुरानी नींबू-मिर्ची को बहते पानी, जैसे, नदी या नहर में विसर्जित करें. यदि पानी की व्यवस्था न हो, तो इसे किसी सुनसान जगह या पेड़ के नीचे ऐसे स्थान पर रखें जहां किसी का पैर न पड़े. कभी भी पुरानी नींबू-मिर्ची को घर के कचरे के डिब्बे में न फेंकें. उतारते समय इस पर अपना पैर न पड़ने दें और न ही इसे किसी को दें.
धार्मिक कारण
पौराणिक मान्यता के अनुसार, अलक्ष्मी, जो कि दरिद्रता की देवी भी हैं, को खट्टा और तीखा भोजन पसंद है. जब वे घर के बाहर ही नींबू-मिर्ची का भोग पा लेती हैं, तो तृप्त होकर वहीं से लौट जाती हैं और घर के अंदर प्रवेश नहीं करतीं है. परिणामस्वरूप घर में शुभता और
वैज्ञानिक दृष्टि: कुछ लोग इसे विज्ञान से भी जोड़ते हैं. उनका तर्क है कि नींबू में साइट्रिक एसिड और मिर्च में कैप्साइसिन होता है. इनकी तेज गंध हवा को शुद्ध करती है और कीड़े-मकोड़ों, मच्छरों को घर से दूर रखती है. इसे भी नकारा नहीं जा सकता है.
नई गाड़ी-वाहन के लिए नींबू-मिर्ची
नई गाड़ी या वाहन के लिए नींबू-मिर्ची लगाते समय वाहन के ऑनर यानी मालिक को ही इसे खुद लगाना चाहिए. फिर पूजा के बाद सात हरी मिर्च और एक नींबू को काले या सफेद धागे में पिरोकर सामने के बंपर या नंबर प्लेट के नीचे लटका देना चाहिए. इसके बाद पहली यात्रा से पहले टायर के नीचे नींबू कुचलने का भी नियम है. मान्यता है कि यह व्हीकल को बुरी नजर से बचाता है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.