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Religion

Navdurga Stotram Lyrics: नवरात्रि में ही नहीं मासिक दुर्गाष्टमी पर भी करना चाहिए श्री नवदुर्गा स्तोत्रम् का पाठ, रातों-रात चमक सकता है भाग्य

Navdurga Stotram: मां दुर्गा को खुश करने के लिए नवदुर्गा स्तोत्रम् का पाठ करना शुभ होता है. इससे न सिर्फ जीवन की तमाम समस्याएं दूर होती हैं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति भी होती है. चलिए अब जानते हैं नवदुर्गा स्तोत्रम् के महत्व, लिरिक्स और लाभ के बारे में.

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Written By: Nidhi Jain Updated: Jan 26, 2026 07:13
Navdurga Stotram Lyrics
Credit- Social Media

Navdurga Stotram Lyrics: श्री नवदुर्गा स्तोत्रम् (श्री नवदुर्गा स्तोत्रम व श्री नवदुर्गा स्तोत्र) आदिशक्ति मां दुर्गा के नौ दिव्य रूपों का एक अत्यंत शक्तिशाली मंत्र है, जिसके पाठ से मां शैलपुत्री, मां ब्रह्मचारिणी, मां चन्द्रघण्टा, मां कूष्माण्डा, मां स्कन्दमाता, मां कात्यायनी, मां कालरात्रि, मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की विशेष कृपा प्राप्त होती है. अधिकतर लोगों को लगता है कि नवदुर्गा स्तोत्रम् का पाठ केवल नवरात्रि में ही किया जाता है, लेकिन ये सच नहीं है.

मासिक दुर्गाष्टमी और मां दुर्गा को समर्पित व्रत-त्योहार पर भी नवदुर्गा स्तोत्रम् का पाठ करना शुभ होता है. इसके पाठ से न सिर्फ मां दुर्गा खुश होती हैं, बल्कि अपने भक्तों को हर संकट से बचाती भी हैं. साथ ही नवग्रहों के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए भी इसका पाठ किया जाता है. यहां पर आप नवदुर्गा स्तोत्रम् के सही लिरिक्स पढ़ सकते हैं.

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श्री नवदुर्गा स्तोत्रम् (Navdurga Stotram Lyrics)

॥ देवी शैलपुत्री ॥

वन्दे वाञ्छितलाभायचन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढाम् शूलधरांशैलपुत्री यशस्विनीम्॥1॥

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॥ देवी ब्रह्मचारिणी ॥

दधाना करपद्माभ्यामक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयिब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥2॥

॥ देवी चन्द्रघण्टा ॥

पिण्डजप्रवरारूढाचन्दकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यम्चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥3॥

॥ देवी कूष्माण्डा ॥

सुरासम्पूर्णकलशम्रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्याम्कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥4॥

॥ देवी स्कन्दमाता ॥

सिंहासनगता नित्यम्पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवीस्कन्दमाता यशस्विनी॥5॥

॥ देवी कात्यायनी ॥

चन्द्रहासोज्ज्वलकराशार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्यादेवि दानवघातिनी॥6॥

॥ देवी कालरात्रि ॥

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णीतैलभ्यक्तशरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णाकालरात्रिर्भयङ्करी॥7॥

॥ देवी महागौरी ॥

श्र्वेते वृषे समारूढाश्र्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥8॥

॥ देवी सिद्धिदात्रि ॥

सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात्सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥9॥

॥ इति श्री नवदुर्गा स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥

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नवदुर्गा स्तोत्रम् के पाठ से जुड़े नियम (Navdurga Stotram Niyam)

  • ब्रह्म मुहूर्त में या संध्याकाल के दौरान ही इसका पाठ करना चाहिए.
  • स्नान आदि कार्य करने के बाद शुभ कपड़े पहनकर मंदिर घर में बैठकर इसका पाठ करना चाहिए.
  • पाठ के दौरान मन को एकाग्र रखें.
  • पाठ को एक बार शुरू करने के बाद पूरा जरूर करें.
  • आसन पर बैठने के बाद अपनी जगह को न छोड़ें.
  • नवदुर्गा स्तोत्रम् का पाठ करने से पहले मां दुर्गा की पूजा करें और मंदिर में घी का दीपक जलाएं.
  • झूठे मुंह से पाठ न करें.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Jan 26, 2026 07:12 AM

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